भारी बारिश में Tata Nexon या Maruti Brezza: जलभराव में कौन सी SUV है ज्यादा सुरक्षित?
मौसम विभाग (IMD) ने आज, 22 अगस्त 2026 की सुबह दिल्ली-एनसीआर, पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बंगाल के कई हिस्सों में भारी बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बारिश और जलभराव के बीच अगर रोजाना का सफर आपकी भी मजबूरी है, तो कॉम्पैक्ट-एसयूवी सेगमेंट में सबसे पहला ख्याल टाटा नेक्सन (Tata Nexon) और मारुति ब्रेजा (Maruti Brezza) का ही आता है। लेकिन जब सड़कें समंदर बन जाएं और विजिबिलिटी गिर जाए, तो इन दोनों में से कौन सी कार आपको ज्यादा सुकून और सुरक्षा का अहसास कराएगी?
शुरुआत हार्डवेयर से करते हैं। टाटा नेक्सन का 208 mm का ग्राउंड क्लीयरेंस मारुति ब्रेजा के 198 mm के मुकाबले थोड़ा ज्यादा मार्जिन देता है, जिससे गहरे पानी और बंपर के टकराने का खतरा कम रहता है। दोनों ही गाड़ियों में इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम (ESP) और हिल-होल्ड जैसे फीचर्स दिए गए हैं, जो फिसलन भरी ढलानों पर अचानक ब्रेक या थ्रॉटल देने पर भी कार का संतुलन बिगड़ने नहीं देते। हालांकि, ब्रोशर के दावों से इतर टायरों की भूमिका भी काफी अहम होती है: नेक्सन में 195/60 R16 या 215/60 R16 टायर्स का विकल्प है, जबकि ब्रेजा में आमतौर पर 215/60 R16 टायर्स ही मिलते हैं।

IMD रेन अलर्ट: आज शहर में ड्राइविंग का असली गणित
आज कार खरीदने का फैसला इस बात पर भी निर्भर करता है कि कौन सी गाड़ी आपको कितनी जल्दी मिल सकती है। मारुति के कॉन्फिगरेटर के मुताबिक, ब्रेजा के लोकप्रिय ऑटोमैटिक (AT) ट्रिम्स पर देशभर में 2 महीने से ज्यादा की वेटिंग चल रही है। दिल्ली में ऑन-रोड कीमतों की बात करें तो ब्रेजा करीब ₹8.3 लाख से शुरू होती है और नेक्सन लगभग ₹8.2 लाख से; मुंबई में ये रेट्स थोड़े ज्यादा हैं। वहीं दिल्ली में नेक्सन का वेटिंग पीरियड वेरिएंट के हिसाब से 10 से 90 दिनों तक का है।
| मानसून फैक्टर | टाटा नेक्सन | मारुति ब्रेजा |
|---|---|---|
| ग्राउंड क्लीयरेंस | 208 mm | 198 mm |
| ESC + हिल-होल्ड | स्टैंडर्ड (ब्रोशर के अनुसार) | स्टैंडर्ड (वेबसाइट के अनुसार) |
| टायर्स | 195/60 R16 या 215/60 R16 | 215/60 R16 |
| रियर वाइपर/डिफॉगर | उपलब्ध | उपलब्ध |
आखिर टायर्स और सेफ्टी फीचर्स इस मौसम में इतने जरूरी क्यों हैं? दरअसल, जमा पानी में चौड़े टायर्स जल्दी एक्वाप्लेनिंग (सड़क से ग्रिप खोना) का शिकार हो सकते हैं, इसलिए 3 mm से ज्यादा थ्रेड वाले टायर्स गीली सड़कों पर बेहतर ग्रिप देते हैं। जब कोई एक पहिया अपनी ग्रिप खोता है, तो ESC कार को सीधा बनाए रखता है; वहीं हिल-होल्ड फिसलन भरे रैंप पर गाड़ी को पीछे की तरफ फिसलने से रोकता है। जब सड़क से उड़ने वाले पानी के छीटें विजिबिलिटी खराब करते हैं, तो रियर डिफॉगर और वाइपर कांच को एकदम साफ कर देते हैं। लेकिन याद रखें, कोई भी ड्राइव मोड आपकी सावधानी से गाड़ी चलाने की आदत का मुकाबला नहीं कर सकता।
Tata Nexon vs Maruti Brezza: पानी से नुकसान और इंश्योरेंस की जरूरी बातें
पानी में उतरने के बाद अगर इंजन अचानक बंद हो जाए, स्टार्ट होने में दिक्कत करे या फिर लोहे के टकराने जैसी आवाजें आएँ, तो यह 'हाइड्रोलॉक' का साफ इशारा है। ऐसे में इंजन रिपेयर का खर्च ₹1 से ₹1.5 लाख तक पहुंच सकता है। साधारण कार इंश्योरेंस में पानी से हुए नुकसान का कवर नहीं मिलता, जब तक कि आपने 'इंजन प्रोटेक्शन' या 'कॉन्सिक्वेंशियल लॉस' का ऐड-ऑन न लिया हो। इन ऐड-ऑन्स के लिए सालाना ₹600 से ₹1,300 तक का मामूली खर्च आता है। अगर गाड़ी पानी में बंद हो जाए, तो उसे दोबारा स्टार्ट करने की भूल कभी न करें। गाड़ी को हमेशा उस पानी से बचाएं जो व्हील-हब (पहिए का मध्य हिस्सा) से ऊपर हो, और जरूरत पड़ते ही तुरंत रोडसाइड असिस्टेंस की मदद लें।


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