RBI MPC बैठक: क्या रेपो रेट में कटौती से सस्ती होगी आपकी कार की EMI?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की अहम बैठक आज से शुरू हो गई है। तीन दिनों तक चलने वाला यह सत्र 5 जून को समाप्त होगा। नई कार खरीदने की योजना बना रहे लोग ब्याज दरों को लेकर आने वाली खबर का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। रेपो रेट में कटौती होगी या यह स्थिर रहेगा, इसी से आपकी कार की EMI तय होगी। हालांकि, ज्यादातर जानकारों का मानना है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।
पिछले एक साल से ज्यादा समय से रेपो रेट 6.50 प्रतिशत पर स्थिर बना हुआ है। इस स्थिरता का सीधा असर देशभर में नई गाड़ियों के लिए जाने वाले लोन की लागत पर पड़ता है। ब्याज दरें ऊंची होने का मतलब है कि आम परिवारों के लिए कार की मासिक किस्त (EMI) महंगी बनी हुई है। अगर MPC दरों में कोई बदलाव नहीं करती है, तो खरीदारों के लिए कार की EMI मौजूदा स्तर पर ही बनी रहेगी।

RBI MPC Meeting: आपकी कार की EMI और डाउन पेमेंट पर क्या होगा असर?
अगर रेपो रेट में 0.25% (25 bps) की भी कटौती होती है, तो आपके मासिक ब्याज का बोझ काफी कम हो सकता है। फिलहाल बड़े सरकारी बैंकों में कार लोन की दरें करीब 8.75 प्रतिशत से शुरू हो रही हैं। वहीं, प्राइवेट बैंक लग्जरी मॉडलों के लिए इससे ज्यादा ब्याज वसूल सकते हैं। ब्याज दरों में मामूली कटौती भी मारुति और हुंडई जैसी कंपनियों द्वारा इस महीने बढ़ाई गई कीमतों से राहत दिलाने में मददगार साबित होगी। इससे नई कार खरीदना आपकी जेब के लिए थोड़ा आसान हो जाएगा।
| लोन की राशि | मौजूदा दर (8.75%) | प्रस्तावित दर (8.50%) |
|---|---|---|
| ₹5 लाख | ₹10,311 | ₹10,253 |
| ₹10 लाख | ₹20,622 | ₹20,506 |
दिल्ली और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में गाड़ियों की ऑन-रोड कीमतें बढ़ने की वजह से अब ज्यादा डाउन पेमेंट की जरूरत पड़ रही है। खर्च को मैनेज करने के लिए कई खरीदार अब 7 साल की लंबी अवधि वाला लोन चुन रहे हैं। इस रणनीति से महीने की किस्त तो कम हो जाती है, लेकिन कुल चुकाया जाने वाला ब्याज बढ़ जाता है। डीलरशिप पर बुकिंग अमाउंट के आसान भुगतान के लिए आप UPI का इस्तेमाल कर सकते हैं। लोन लेने से पहले हमेशा अलग-अलग बैंकों के ऑफर्स की तुलना जरूर करें।
मार्केट ट्रेंड: कार खरीदने वालों के लिए क्या है एक्सपर्ट्स की सलाह?
कार खरीदारों को इस शुक्रवार सुबह 10 बजे होने वाले पॉलिसी ऐलान पर नजर रखनी चाहिए। घोषणा के तुरंत बाद कुछ NBFC कंपनियां अपनी ब्याज दरों में बदलाव कर सकती हैं। बाजार के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए फिक्स्ड-रेट लोन लेना एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है। इन वित्तीय बदलावों की जानकारी रखकर ही आप अपने परिवार के बजट के हिसाब से सही फैसला ले पाएंगे। बैंक के सभी विकल्पों की अच्छी तरह समीक्षा करने के बाद ही अपनी गाड़ी की खरीदारी प्लान करें।


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