पेट्रोल-डीजल की मार! कार EMI का बोझ कम करने के लिए अपनाएं ये स्मार्ट तरीके
ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजह से इस वीकेंड भारत के बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ गए हैं। कीमतों में हुए इस बदलाव ने कार खरीदारों को अपने मंथली बजट और लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल प्लानिंग पर फिर से सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। जब फ्यूल बिल बढ़ता है, तो कार लोन और रोजमर्रा के सफर के बीच आपकी जेब पर सीधा असर पड़ता है।
कीमतों में हालिया अपडेट के बाद अब पेट्रोल और डीजल वेरिएंट्स को चलाने का खर्च काफी बदल गया है। अगर आप रोजाना औसतन 40 किलोमीटर गाड़ी चलाते हैं, तो आपका महीने का फ्यूल खर्च कई सौ रुपये तक बढ़ सकता है। यही वजह है कि ज्यादा ड्राइविंग करने वाले लोग अब इंजन टाइप के चुनाव या दूसरे किफायती विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी: आपकी कार EMI पर क्या होगा असर?
ज्यादातर खरीदार कार का बजट उसकी शुरुआती कीमत और मंथली लोन की किस्तों के आधार पर तय करते हैं। हालांकि, ईंधन के बढ़ते दाम आपके महीने के कुल खर्च को काफी बढ़ा देते हैं। अगर आप अपना मंथली बजट बिगड़ने नहीं देना चाहते, तो आपको लोन की रकम या डाउन पेमेंट पर फिर से विचार करने की जरूरत हो सकती है।
| एक्स-शोरूम कीमत | डाउन पेमेंट (20%) | अनुमानित मंथली EMI | अनुमानित मंथली फ्यूल खर्च |
|---|---|---|---|
| 7,00,000 | 1,40,000 | 11,200 | 5,500 |
| 11,00,000 | 2,20,000 | 17,600 | 6,800 |
| 15,00,000 | 3,00,000 | 24,000 | 8,200 |
अगर आप डाउन पेमेंट में सिर्फ दस प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हैं, तो फ्यूल पर होने वाले एक्स्ट्रा खर्च को काफी हद तक बैलेंस किया जा सकता है। यह स्ट्रैटेजी आपकी EMI को कम और मैनेज करने लायक बनाए रखती है। इसके अलावा, मौजूदा कीमतों को देखते हुए अब CNG या हाइब्रिड गाड़ियों पर स्विच करना पहले के मुकाबले ज्यादा फायदेमंद साबित हो रहा है।
पेट्रोल-डीजल के दाम और ओनरशिप कॉस्ट का गणित
भारत में कार रखने का खर्च सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक ही सीमित नहीं है। रिसर्च बताती है कि पेट्रोल के मुकाबले डीजल इंजन वाली गाड़ियों के टायर जल्दी घिसते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि डीजल गाड़ियां आमतौर पर ज्यादा भारी होती हैं और हाई टॉर्क जेनरेट करती हैं। लंबे समय में पैसे बचाने के लिए इन छिपे हुए खर्चों को समझना बहुत जरूरी है।
कीमतों में हो रहे इन बदलावों के बीच सही गाड़ी चुनना और बेहतर फाइनेंशियल प्लानिंग करना ही समझदारी है। कोई भी नई कार फाइनल करने से पहले उसकी लेटेस्ट ऑन-रोड कीमत और रनिंग कॉस्ट जरूर चेक करें। यह तरीका सुनिश्चित करेगा कि आपकी नई कार आप पर आर्थिक बोझ न बने। ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़े सही फैसले लेने के लिए हमेशा अपडेटेड रहें।


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