मारुति वैगन आर बायोफ्लेक्स लॉन्च: क्या पेट्रोल-CNG छोड़कर इसे खरीदना वाकई फायदे का सौदा है?
मारुति सुजुकी ने अपनी नई Wagon R Bioflex की कीमत का खुलासा कर दिया है, जो 7.24 लाख रुपये रखी गई है। स्टैंडर्ड पेट्रोल मॉडल के मुकाबले यह फ्लेक्स-फ्यूल हैचबैक करीब 86,000 रुपये महंगी है। हालांकि, पर्यावरण के लिहाज से इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब मिडिल क्लास खरीदार इस बात को लेकर तुलना कर रहे हैं कि शहर में रोजाना इस्तेमाल के लिए यह बेहतर है या फिर पॉपुलर CNG वेरिएंट।
आज के समय में बजट का ध्यान रखने वाले परिवारों के लिए कार चलाने का खर्च (Running Cost) सबसे ज्यादा मायने रखता है। पेट्रोल और डीजल के मुकाबले इथेनॉल-ब्लेंड फ्यूल काफी सस्ता पड़ता है। लेकिन ध्यान रहे, इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी पेट्रोल से कम होती है, जिसकी वजह से माइलेज में 15 से 20 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। इसलिए, कम कीमत और कम माइलेज के बीच के अंतर को बहुत सोच-समझकर तौलना जरूरी है।

मारुति वैगन आर बायोफ्लेक्स: कीमत और आपकी जेब पर असर
फिलहाल प्राइवेट कार मालिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती E85 फ्यूल पंप ढूंढना है। अभी सिर्फ दिल्ली और पुणे जैसे बड़े शहरों में ही खास इथेनॉल स्टेशन मौजूद हैं। मारुति शुरुआत में फ्लीट डिलीवरी (कमर्शियल इस्तेमाल) पर फोकस कर रही है ताकि इसके रियल-वर्ल्ड परफॉर्मेंस को परखा जा सके। कार बुक करने से पहले अपने इलाके में पंप की उपलब्धता जरूर चेक कर लें, क्योंकि अभी इसका नेटवर्क काफी सीमित है लेकिन धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
| फ्यूल का प्रकार | कीमत प्रति लीटर (अनुमानित) | माइलेज पर असर |
|---|---|---|
| पेट्रोल | 95-105 | स्टैंडर्ड |
| सीएनजी | 75-90 | शानदार माइलेज |
| E85 | 60-75 | 20% तक कम |
कड़ाके की ठंड और मानसून की बारिश में इथेनॉल इंजन को स्टार्ट करने में कभी-कभी दिक्कत आ सकती है। दरअसल, पेट्रोल के मुकाबले इथेनॉल का वेपर प्रेशर कम होता है, जिससे बहुत कम तापमान में इग्निशन थोड़ा धीमा हो जाता है। हालांकि, मारुति ने इंजन के कई हिस्सों में बदलाव किए हैं ताकि अल्कोहल से जंग (Corrosion) न लगे। इन तकनीकी बदलावों की वजह से कार पूरी तरह भरोसेमंद बनी रहती है। अच्छी बात यह है कि इसके टायर की लाइफ और वारंटी स्टैंडर्ड पेट्रोल मॉडल जैसी ही रहेगी।
मारुति वैगन आर बायोफ्लेक्स या सीएनजी: कौन सी है बेहतर?
इस कार को खरीदने पर आपकी मंथली EMI करीब 1,800 रुपये बढ़ जाएगी। अगर आपके घर के पास इथेनॉल पंप है, तो लंबी अवधि में यह काफी बचत करा सकती है। लेकिन अगर ऐसा नहीं है, तो फिलहाल ज्यादातर भारतीय ड्राइवरों के लिए मौजूदा CNG नेटवर्क ही ज्यादा सुविधाजनक है। बेहतर होगा कि फ्यूल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार तक थोड़ा इंतजार किया जाए। वैसे, यह फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल भविष्य की 'ग्रीन मोबिलिटी' की एक शानदार झलक जरूर है।


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