1-स्टार रेटिंग से मचा हड़कंप: क्या आपकी Kia Sonet सुरक्षित है? जानें भारत और अफ्रीका मॉडल का सच
ग्लोबल न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (GNCAP) ने हाल ही में क्रैश टेस्ट के नए नतीजे जारी किए हैं। 10 जून 2026 को सामने आए इन नतीजों में भारत में बनी एक SUV को निराशाजनक 1-स्टार रेटिंग मिली है। इस खबर ने भारतीय बजट SUV खरीदारों के बीच काफी उलझन पैदा कर दी है। ऐसे में ग्राहकों के लिए अलग-अलग कार मॉडल्स के बीच के तकनीकी अंतर को समझना अब बेहद जरूरी हो गया है।
अफ्रीका भेजे जाने वाले इस मॉडल में उन बुनियादी सेफ्टी फीचर्स की कमी है, जो भारतीय शोरूम्स में मिलने वाली कारों में स्टैंडर्ड तौर पर दिए जाते हैं। जहां एक्सपोर्ट वर्जन में सिर्फ दो एयरबैग्स थे, वहीं भारतीय सोनेट (Sonet) में 6 एयरबैग्स स्टैंडर्ड मिलते हैं। इन अलग-अलग सेफ्टी टेस्ट नतीजों में इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) ने भी बड़ी भूमिका निभाई है। किया इंडिया (Kia India) का कहना है कि उनके स्थानीय मॉडल्स भारत के सभी मौजूदा सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन करते हैं।

भारत और अफ्रीका वाले किया सोनेट मॉडल के सेफ्टी फीचर्स में क्या है अंतर?
भारत में सुरक्षा नियम काफी सख्त हैं, जहां नई कारों में 6 एयरबैग्स जैसे फीचर्स अनिवार्य कर दिए गए हैं। ये फीचर्स हाई-स्पीड क्रैश टेस्ट के दौरान कार के प्रदर्शन को काफी बेहतर बना देते हैं। अक्सर कंपनियां विदेशी बाजारों में लागत घटाने के लिए सस्ते सस्पेंशन या वेल्डिंग पार्ट्स का इस्तेमाल करती हैं। इन बदलावों से प्रति वाहन करीब बीस हजार रुपये तक की बचत की जा सकती है। हालांकि, भारतीय मॉडल्स को ऊंचे मानकों का पालन करना ही पड़ता है।
| SUV मॉडल | सेफ्टी रेटिंग | स्टैंडर्ड एयरबैग्स |
|---|---|---|
| Tata Nexon | 5 स्टार्स | 6 |
| Mahindra XUV 3XO | 5 स्टार्स | 6 |
| Maruti Brezza | 4 स्टार्स | 2 |
| Kia Sonet (India) | टेस्ट नहीं हुआ | 6 |
किया सोनेट के मुकाबले वाली कारों की सेफ्टी चेकलिस्ट
सोनेट की तुलना उसके प्रतिद्वंद्वियों से करने पर सेफ्टी मार्केट की तस्वीर और साफ हो जाती है। टाटा नेक्सन और महिंद्रा XUV 3XO पहले ही शानदार 5-स्टार रेटिंग हासिल कर चुकी हैं। वहीं, मारुति सुजुकी ब्रेज़ा अपने मजबूत स्कोर की वजह से ग्राहकों की पसंदीदा पसंद बनी हुई है। ये अंतर बताते हैं कि भारत न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (BNCAP) की रेटिंग चेक करना कितना जरूरी है। विस्तृत सेफ्टी रिपोर्ट्स खरीदारों को सही आर्थिक फैसला लेने में मदद करती हैं।
शोरूम जाते समय ग्राहकों को उस खास वेरिएंट (trim) के क्रैश टेस्ट नतीजों के बारे में जरूर पूछना चाहिए। हर मॉडल में इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) और साइड कर्टन एयरबैग्स जरूर चेक करें। भले ही अफ्रीका वाले मॉडल का टेस्ट डराने वाला हो, लेकिन भारतीय नियम सुरक्षा का एक बेहतर स्तर सुनिश्चित करते हैं। अपने परिवार के लिए फैंसी टचस्क्रीन के बजाय हमेशा मजबूत स्ट्रक्चर और सेफ्टी फीचर्स को प्राथमिकता दें। एक सुरक्षित गाड़ी भारतीय सड़कों पर आपको मानसिक शांति देती है।


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