नई कार खरीदने जा रहे हैं? डीलर के इन 3 छिपे हुए खर्चों से बचें और बचाएं हजारों रुपये
नई कार खरीदने का उत्साह तब फीका पड़ जाता है जब डीलरशिप वाले आप पर महंगा इंश्योरेंस लेने का दबाव बनाने लगते हैं। ज्यादातर शोरूम खरीदारों को अपना ही 'इन-हाउस' इंश्योरेंस लेने पर मजबूर करते हैं, जिसकी कीमत बाजार से कहीं ज्यादा होती है। इस चक्कर में बिना किसी खास फायदे के आपके फाइनल बिल में हजारों रुपये फालतू जुड़ जाते हैं।
अगर आप पैसे बचाना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने अधिकारों को समझें। मौजूदा नियमों के मुताबिक, आप अपनी गाड़ी के लिए किसी भी कंपनी का इंश्योरेंस चुनने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। बाहर से इंश्योरेंस रेट्स की तुलना करके आप एक मोटी रकम बचा सकते हैं।

ऑन-रोड प्राइस का गणित: डीलर के छिपे हुए इंश्योरेंस चार्ज को ऐसे समझें
इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) के नियम साफ हैं—कोई भी डीलर आपको खास पॉलिसी लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। अपनी पसंद का इंश्योरेंस चुनना खरीदार का कानूनी हक है। ऐसा करके आप प्रीमियम के खर्च में 20,000 रुपये से लेकर 70,000 रुपये तक की बड़ी बचत कर सकते हैं।
अक्सर डीलर फाइनल कोटेशन में 'लॉजिस्टिक्स' या 'हैंडलिंग चार्जेस' जोड़ देते हैं। आपको बता दें कि भारतीय अदालतों के कई फैसलों के अनुसार ये चार्ज पूरी तरह गैरकानूनी हैं। शोरूम को कोई भी भुगतान करने से पहले हमेशा 'प्राइस ब्रेकअप शीट' जरूर मांगें ताकि एक-एक पैसे का हिसाब मिल सके।
बिल चेक करते समय देखें कि कहीं बिना मांगे एक्सेसरीज या सिरेमिक कोटिंग के पैसे तो नहीं जोड़ दिए गए। ये चीजें बिना किसी ठोस वजह के आपकी गाड़ी की ऑन-रोड कीमत (ORP) बढ़ा देती हैं। बाहर के रेट्स का हवाला देकर आप इन फालतू खर्चों को कम करने के लिए मजबूती से मोलभाव कर सकते हैं।
| चार्ज का प्रकार | संभावित बचत | खरीदार क्या करें |
|---|---|---|
| इंश्योरेंस | ₹15,000 - ₹40,000 | बाहर से कोटेशन लें |
| हैंडलिंग फीस | ₹5,000 - ₹12,000 | अवैध बताकर मना करें |
| एक्सेसरीज | ₹10,000 - ₹25,000 | जरूरत के हिसाब से चुनें |
जबरन फाइनेंस और EMI के जाल से कैसे बचें?
डीलरशिप से मिलने वाले लोन में अक्सर ब्याज दरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। कागजों पर साइन करने से पहले सीधे अपने बैंक जाकर सही रेट्स का पता लगाएं। ब्याज दर में मामूली सा अंतर भी 5 साल के लोन पीरियड में आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है।
अगर कोई डीलर अपनी शर्तें न मानने पर डिलीवरी रोकने की धमकी दे, तो तुरंत कार कंपनी (मैन्युफैक्चरर) को फॉर्मल ईमेल भेजें। डीलर के साथ हुई हर बातचीत का व्हाट्सएप रिकॉर्ड रखें। जब कंपनियों को ऐसे 'अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस' के लिखित सबूत मिलते हैं, तो वे तुरंत दखल देती हैं।
महीने के आखिरी दिनों में सेल्स टीम पर टारगेट पूरा करने का भारी दबाव होता है। अपनी हैचबैक या SUV के लिए बेहतर डील पाने का यह सबसे सही समय है। बाहर से इंश्योरेंस और फाइनेंस कराने की अपनी बात पर मजबूती से अड़े रहें और डील फाइनल करें।
नई कार खरीदना एक सुखद अनुभव होना चाहिए, न कि कोई आर्थिक बोझ। एक सही चेकलिस्ट के जरिए आप डीलरशिप के छिपे हुए खर्चों से खुद को बचा सकते हैं। जागरूक बनें और कार खरीदने की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करें।


Click it and Unblock the Notifications