भारी बारिश में कार चलाने का रिस्क: ₹15 लाख वाली SUV के लिए IMD का अलर्ट और जरूरी टिप्स

बुधवार, 2 सितंबर 2026: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताज़ा नक्शों ने आज दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही उत्तराखंड और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों समेत मध्य भारत के बड़े हिस्से में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। गुरुग्राम, नोएडा, भोपाल और देहरादून के अंडरपास में पानी भरने के पूरे आसार हैं। ऐसे में अगर आपके पास 15 लाख रुपये से कम बजट वाली माइक्रो या कॉम्पैक्ट SUV है, तो अपनी गाड़ी की वॉटर-वेडिंग लिमिट (पानी में उतरने की क्षमता), इंश्योरेंस ऐड-ऑन्स, वॉरंटी की शर्तें और डिलीवरी-वीक चेक तुरंत समझ लें।

ध्यान रखें कि गाड़ी का ग्राउंड क्लीयरेंस उसकी पानी में उतरने की असली लिमिट नहीं होता। अगर पानी पहिये के हब के बीचों-बीच या दरवाजे की निचली किनारी (सीम) तक आ चुका है, तो गाड़ी आगे बढ़ाना सरासर बेवकूफी होगी। अगर कम गहरे और ठहरे हुए पानी से निकलना मजबूरी ही बन जाए, तो निचले गियर में चलें, एक्सीलेटर (RPM) को स्थिर रखें और ऐसी रफ्तार रखें जिससे आगे पानी का बड़ा उफान न बने। बहते हुए पानी में गाड़ी ले जाने का जोखिम कभी न उठाएं।

Heavy Rain Alert: Essential Driving Tips for Compact SUVs in 2026 Monsoon

IMD का आज का अलर्ट और ₹15 लाख से सस्ती कॉम्पैक्ट SUVs की वॉटर लिमिट

एक्स्ट्रा (Exter), पंच (Punch) या फ्रोंक्स (Fronx) जैसी माइक्रो SUVs में एयर-इंटेक बड़ी SUVs के मुकाबले थोड़ा नीचे होता है, इसलिए ज्यादा सावधानी बरतें—पानी का स्तर व्हील हब और बंपर लाइन के काफी नीचे ही रहना चाहिए। अगर रास्ते में इंजन झटके लेने लगे या बंद हो जाए, तो इसे तुरंत ऑफ कर दें और पानी बढ़ने लगे तो बाहर निकल आएं। बंद होने के बाद गाड़ी दोबारा स्टार्ट करने की गलती बिल्कुल न करें; सीधे रोडसाइड असिस्टेंस को फोन करें और कार को टो कराएं।

फ्लड-इंश्योरेंस ऐड-ऑन्स और वॉरंटी से जुड़ी काम की बातें

इंजन में पानी जाने से होने वाला नुकसान (हाइड्रोस्टैटिक लॉक) आमतौर पर बेसिक इंश्योरेंस पॉलिसी में कवर नहीं होता। इससे बचने के लिए 'इंजन प्रोटेक्ट' (Engine Protect) ऐड-ऑन की जरूरत पड़ती है, जो इंजन के अंदरूनी पार्ट्स को कवर करता है। दावे (Claim) के समय पार्ट्स की घटती कीमत का नुकसान न झेलना पड़े, इसके लिए इसे 'जीरो डेप्रिसिएशन' के साथ लें। इसे कार खरीदते समय या रिन्यूअल पर जुड़वा सकते हैं; चाहें तो अपनी इंश्योरेंस कंपनी से आज ही मिड-टर्म एंडोर्समेंट के बारे में बात कर लें।

ज्यादातर कार कंपनियां पानी घुसने या बाढ़ से हुए नुकसान को स्टैंडर्ड वॉरंटी से बाहर रखती हैं। हालांकि, मारुति का 'कस्टमर कन्वीनियंस पैकेज' (CCP) खास तौर पर हाइड्रोलॉक को कवर करता है, जो नॉर्मल वॉरंटी में नहीं मिलता—इससे साफ पता चलता है कि ऑटो कंपनियां ऐसे मामलों को कैसे देखती हैं। अगर पानी कार के मैट/कारपेट या कंट्रोल मॉड्यूल तक पहुंच गया है, तो गाड़ी टो कराने से पहले हर चीज की फोटो और वीडियो बना लें और बीमा कंपनी को तुरंत सूचना दें। ऐसे में इंजन स्टार्ट करने की कोशिश आपका क्लेम खारिज करवा सकती है।

सफर से पहले के जरूरी चेक्स और डिलीवरी वाले हफ्ते में PDI का सही तरीका

ड्राइव पर निकलने से पहले कार के टायरों की ग्रिप (ट्रेड), ब्रेक का रिस्पॉन्स, वाइपर, डोर सील और कार के अंदर की नमी की बदबू जरूर चेक करें। पानी के छींटे पड़ने के बाद हल्की रफ्तार में ब्रेक लगाकर उन्हें सुखा लें। अगर आप इस हफ्ते नई कार की डिलीवरी ले रहे हैं, तो बारिश के मौसम को देखते हुए PDI (प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन) पर खास जोर दें। अगर कारपेट में सीलन दिखे, हेडलाइट्स या टेललाइट्स में फॉग जम रहा हो या डैशबोर्ड पर वॉर्निंग लाइट जल रही हो, तो ऐसी कार की डिलीवरी लेने से साफ मना कर दें। शोरूम वालों के बेमतलब के एंटी-रस्ट कोटिंग वाले अपसेल के झांसे में न आएं; पहले अपनी कार की 'एंटी-परफोरेशन' (जंग से बचाव) वॉरंटी कवरेज जांचें। बारिश में बड़े गड्ढे में कार जाने से सस्पेंशन आर्म या स्ट्रट मुड़ सकते हैं, जिनके स्पेयर पार्ट्स का खर्च ही आमतौर पर हर तरफ का ₹5,000 से ₹8,000 तक बैठता है, साथ ही व्हील अलाइनमेंट और बैलेंसिंग का ₹1,500 से ₹2,500 का खर्च अलग से आता है।

Article Published On: Wednesday, September 2, 2026, 10:17 [IST]
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