GST काउंसिल बैठक: क्या महंगी होंगी अर्टिगा और कारेंस? SUV/MUV सेस पर फैसले से बदल सकता है आपकी कार का बजट
जीएसटी काउंसिल (GST Council) की आज यानी 12 सितंबर को अहम बैठक हो रही है। ऑटो सेक्टर की इस बात पर पैनी नजर है कि क्या यूटिलिटी व्हीकल्स (UV) पर लगने वाले सेस (Cess) में कोई बदलाव होगा। अगर SUV और MUV की कैटेगरी या क्लासिफिकेशन का दायरा बदलता है, तो 15 लाख रुपये के बजट में आने वाली पॉपुलर 7 और 8 सीटर कारों की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। इनमें मारुति अर्टिगा, टोयोटा रुमियन, रेनॉ ट्राइबर और किआ कारेंस जैसी गाड़ियां शामिल हैं। फिलहाल, बैठक के पूरे एजेंडे का इंतजार किया जा रहा है।
मौजूदा नियमों के मुताबिक, उन यूटिलिटी व्हीकल्स पर 22 फीसदी कॉम्पेन्सेशन सेस (Compensation Cess) लगता है जो तीन मापदंडों पर खरे उतरते हैं: 1,500 cc से बड़ा इंजन, 4,000 मिमी से ज्यादा लंबाई और कम से कम 170 मिमी की अनलेडन ग्राउंड क्लीयरेंस। ये नियम SUV और MUV दोनों पर लागू होते हैं। वहीं, 4 मीटर से लंबी लेकिन 1.5-लीटर से कम क्षमता वाले इंजन वाली गाड़ियों पर आमतौर पर 17 फीसदी सेस लगता है, जबकि 4 मीटर से छोटी पेट्रोल कारों पर यह महज 1 फीसदी है।

GST काउंसिल बैठक: SUV/MUV सेस, संभावित बदलाव और कीमतों का गणित
अगर नियमों में कोई बदलाव नहीं होता, तो अर्टिगा, रुमियन और कारेंस 17 फीसदी सेस वाले मिड-साइज़ ब्रैकेट में ही रहेंगी और ट्राइबर को छोटी कार होने का फायदा मिलता रहेगा। लेकिन अगर MUV की परिभाषा का दायरा बढ़ाकर और गाड़ियों को इसमें लाया जाता है, तो सेस में 5 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। इससे 10 से 15 लाख रुपये एक्स-शोरूम कीमत वाली कारों के दाम करीब ₹50,000 से ₹75,000 तक बढ़ सकते हैं। आम बैंक ब्याज दरों के हिसाब से देखें तो 60 महीने वाले लोन पर आपकी महीने की EMI लगभग ₹1,060 से ₹1,590 तक बढ़ सकती है। काउंसिल का फैसला आते ही हम आपको अपडेट देंगे।
कार खरीदार क्या करें: बुकिंग टोकन, प्राइस प्रोटेक्शन और इनवॉइसिंग
अगर आप आज ही कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो डीलर से हर बात लिखित में तय कर लें। उनसे टोकन रिफंड की शर्तें, VIN अलॉटमेंट की टाइमलाइन और यह जरूर पूछें कि अगर बुकिंग के बाद टैक्स बदलता है, तो क्या आपको प्राइस प्रोटेक्शन मिलेगा या नहीं? अगर सेस में कोई बदलाव नहीं होता है, तो उसी दिन का प्रोफॉर्मा इनवॉइस (Proforma Invoice) बनवा लें। और अगर आप सतर्क रुख अपनाना चाहते हैं, तो जीएसटी बैठक के बाद स्थिति साफ होने तक इनवॉइसिंग रोककर रखें। इससे डिलीवरी के वक्त अचानक होने वाले अतिरिक्त खर्च से बचाव होगा।
बजट MPV की उपलब्धता और वेटिंग पीरियड
सितंबर की शुरुआत के डीलर आंकड़ों के मुताबिक गाड़ियों पर थोड़ा वेटिंग पीरियड चल रहा है, जो शहर और वेरिएंट के हिसाब से अलग-अलग है। गुड़गांव में मारुति अर्टिगा पर 10 से 98 दिनों का वेटिंग टाइम है। दिल्ली में टोयोटा रुमियन पर यह करीब 10 दिनों का है। किआ कारेंस के लिए वेरिएंट के आधार पर 6 हफ्ते से 3 महीने तक का वक्त लग सकता है। वहीं, रेनॉ ट्राइबर पर महीने की शुरुआत में ऑफर्स मिल रहे हैं, जो कई बाजारों में इसकी बेहतर सप्लाई का संकेत देते हैं। एसेसरीज या फाइनेंस डील पक्की करने से पहले डीलर से कार अलॉटमेंट का लाइव स्टेटस जरूर कन्फर्म कर लें।


Click it and Unblock the Notifications
