दिल्ली बॉर्डर पर अब नहीं लगेगा जाम! MLFF सिस्टम से बिना रुके कटेगा टोल और ECC

दिल्ली की सीमाओं पर बिना रुके टोल टैक्स कटने की व्यवस्था अब कागजों से निकलकर जमीन पर उतर आई है। 16 सितंबर को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम के तहत दिल्ली नगर निगम (MCD) के गेंट्री लगाने के लिए दो अनापत्ति प्रमाण पत्रों (NOC) को मंजूरी दे दी। इस हरी झंडी के बाद अब एंट्री फीस और पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) बिना किसी रुकावट के अपने आप कट सकेगा। फास्टैग (FASTag) का इस्तेमाल करने वाले चालकों के लिए नंबर प्लेट और टैग के जरिए ही टैक्स की कटौती और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

दिल्ली बॉर्डर पर लागू हो रहा MLFF सिस्टम मुख्य रूप से उन कमर्शियल वाहनों के लिए है, जिन्हें MCD टोल और ECC देना होता है। आम तौर पर निजी कारों को इन दोनों शुल्कों से छूट मिली हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने MCD को निर्देश दिया है कि अक्टूबर 2026 तक दिल्ली के सभी 126 एंट्री पॉइंट्स को पूरी तरह बैरियर-फ्री बनाया जाए। शुरुआती चरण में, NHAI की मंजूरी मिलने के बाद अक्टूबर के अंत तक 9 प्रमुख हाईवे एंट्री पॉइंट्स पर इसे शुरू करने की योजना है, जिनमें डीएनडी (DND), रजोकरी, कुंडली, बदरपुर और गाजीपुर शामिल हैं।

Delhi Border MLFF System: How FASTag and Automatic Toll Collection Works for Commercial Vehicles in 2026

दिल्ली में FASTag के इस्तेमाल को कैसे बदल देगा MLFF सिस्टम?

पुराने टोल बूथों की तरह अब गाड़ियों को बार-बार रोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। MLFF तकनीक की मदद से गाड़ियां अपनी सामान्य रफ्तार से निकल सकेंगी और सिस्टम अपना काम करता रहेगा। ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक MCD के RFID और फास्टैग डेटा को आपस में जोड़कर बकाया राशि का पता लगाएगी। अगर किसी कमर्शियल वाहन में एक्टिव टैग या पर्याप्त बैलेंस नहीं होगा, तो ANPR तुरंत उसकी पहचान कर लेगा और नगर निगम के नियमों के तहत वसूली व जुर्माना लगाया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, गेंट्री, सेंसर्स और पूरे सिस्टम के इंटीग्रेशन का खर्च ठेकेदार ही उठाएगा, जिससे निगम पर कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।

ECC, एंट्री फीस और पेनल्टी: समझिए पूरा गणित

इसी साल मई में ECC की दरों में बदलाव किया गया था, जिसके तहत दिल्ली आने वाले कमर्शियल ट्रकों पर शुल्क बढ़ा दिया गया था। यह शुल्क MCD टोल के अलावा लिया जाता है और MLFF लागू होने के बाद इसकी वसूली पूरी तरह ऑटोमैटिक हो जाएगी। शुल्क न देने पर टोल टैक्स बाय-लॉज के तहत जुर्माना और सख्ती से वसूली की जा सकती है। वहीं, नोएडा, गुरुग्राम या गाजियाबाद से आने-जाने वाली निजी कारों को ECC और MCD टोल से बाहर रखा गया है, बशर्ते उनका इस्तेमाल कमर्शियल वाहन के रूप में न हो रहा हो।

वाहन की श्रेणी संशोधित ECC (प्रति एंट्री)
लाइट ड्यूटी और 2-एक्सल ट्रक ₹2,000
3-एक्सल, 4-एक्सल और उससे बड़े ट्रक ₹4,000

ट्रायल, टाइमलाइन और ड्राइवरों के लिए जरूरी टिप्स

एनओसी की औपचारिकताएं पूरी होते ही 9 हाईवे पॉइंट्स पर जल्द ही ट्रायल शुरू होने की उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट ने टोल प्लाजा को पूरी तरह बैरियर-फ्री करने के लिए अक्टूबर 2026 तक की समयसीमा तय की है। पेनल्टी से बचने के लिए चालकों को सलाह दी जाती है कि वे अपना FASTag हमेशा एक्टिव रखें, UPI के जरिए ऑटो-रिचार्ज की सुविधा ऑन करें और पर्याप्त बैलेंस बनाए रखें। NHAI ने 1 फरवरी 2026 से कारों के लिए KYV (नो योर व्हीकल) की अनिवार्यता खत्म कर दी है, लेकिन बैंक/इश्यूअर के नियमों के अनुसार हर दो साल में KYC अपडेट करना अभी भी लागू रहेगा।

कैब, डिलीवरी वाहनों और रोजाना सफर करने वालों पर क्या पड़ेगा असर?

कैब और डिलीवरी से जुड़े वाहनों के लिए MLFF सिस्टम बड़ी राहत लेकर आएगा। इससे रजोकरी, डीएनडी, गाजीपुर और कुंडली जैसे भीड़भाड़ वाले बॉटलनेक पॉइंट्स पर लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी और समय की बचत होगी। कमर्शियल वाहन मालिक अपने RFID या FASTag को सही तरीके से लिंक रखें, बैलेंस मेंटेन करें और आने वाले ई-नोटिस पर नजर रखें। वहीं, गुरुग्राम, नोएडा या गाजियाबाद से दिल्ली आने-जाने वाले निजी कार चालकों को MCD टोल तो नहीं देना होगा, लेकिन उन्हें NHAI के टोल प्लाजा के लिए अपने फास्टैग में पर्याप्त बैलेंस जरूर रखना चाहिए।

Article Published On: Wednesday, September 16, 2026, 7:15 [IST]
Read more on #four wheelers
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+