सीएनजी के दाम बढ़े, क्या अब भी कार खरीदना फायदे का सौदा है? मिडिल क्लास के लिए ये है असली गणित
दिल्ली-एनसीआर में आज, 28 मई 2026 को सीएनजी (CNG) की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला है। अचानक हुई इस बढ़ोतरी ने मिडिल क्लास खरीदारों की टेंशन बढ़ा दी है। हालांकि, बड़े शहरों में पेट्रोल के दाम फिलहाल स्थिर हैं, लेकिन पेट्रोल और सीएनजी के बीच कम होता यह अंतर अब कार खरीदने के गणित को बदल रहा है। अगर आप नई कार लेने की सोच रहे हैं, तो अपना मंथली फ्यूल बजट दोबारा चेक कर लें। खासकर उन लोगों पर इसका ज्यादा असर पड़ेगा, जो रोजाना 50 किलोमीटर से ज्यादा ड्राइविंग करते हैं।
भारत में बजट कार सेगमेंट का पूरा खेल 'रनिंग कॉस्ट' यानी गाड़ी चलाने के खर्च पर टिका होता है। एक स्टैंडर्ड पेट्रोल कार को चलाने का खर्च करीब 8 रुपये प्रति किलोमीटर आता है। पहले सीएनजी कारों का खर्च इससे आधा होता था, लेकिन अब यह अंतर काफी कम हो गया है। रोजाना के इस्तेमाल के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EV) सबसे सस्ती पड़ती हैं, हालांकि उनकी शुरुआती कीमत काफी ज्यादा होती है। शोरूम जाने से पहले खरीदारों को इन सभी पहलुओं पर गौर करना चाहिए।

CNG की बढ़ती कीमतें और रनिंग कॉस्ट का गणित
| शहर | पेट्रोल (प्रति किमी) | CNG (प्रति किमी) | EV (प्रति किमी) |
|---|---|---|---|
| Delhi | ₹8.20 | ₹4.10 | ₹1.20 |
| Mumbai | ₹8.50 | ₹4.50 | ₹1.40 |
| Pune | ₹8.40 | ₹4.35 | ₹1.35 |
बाजार में कई दिग्गज ब्रांड्स 10 लाख रुपये से कम बजट में बेहतरीन कारें ऑफर कर रहे हैं। मारुति सुजुकी वैगनआर और स्विफ्ट आज भी लोगों की पहली पसंद बनी हुई हैं। वहीं, टाटा मोटर्स की टियागो iCNG अपनी ट्विन-सिलेंडर टेक्नोलॉजी के साथ आती है, जो परिवारों को बेहतर बूट स्पेस (डिग्गी की जगह) देती है। हुंडई एक्सटर और निओस भी सीएनजी के भरोसेमंद विकल्प हैं। ये कारें हर महीने फ्यूल पर होने वाले खर्च को कंट्रोल करने में मदद करती हैं और मिडिल क्लास भारतीयों के लिए बेस्ट बजट कार साबित हो रही हैं।
मिडिल क्लास की बचत के लिए टॉप बजट कारें
आज के समय में टियागो.ईवी (Tiago.ev) जैसी इलेक्ट्रिक कारें चलाने में बहुत सस्ती हैं। हालांकि, हाई टॉर्क की वजह से ईवी के टायर जल्दी घिसते हैं। हर 30,000 किलोमीटर पर टायर बदलना आपके खर्च को बढ़ा सकता है। इसके मुकाबले सीएनजी कारों का मेंटेनेंस काफी सस्ता पड़ता है। मिडिल क्लास खरीदारों को 'टोटल ओनरशिप कॉस्ट' देखनी चाहिए, जिसमें आपकी मंथली ईएमआई (EMI) और फ्यूल का खर्च दोनों शामिल हों। कई बार कम फ्यूल खर्च के चक्कर में ज्यादा ईएमआई जेब पर भारी पड़ सकती है।
आने वाले हफ्तों में फ्यूल मार्केट के ट्रेंड्स एक बार फिर बदल सकते हैं। दिल्ली, मुंबई और पुणे जैसे शहरों के खरीदारों को कीमतों पर नजर रखनी चाहिए। पेट्रोल, सीएनजी या इलेक्ट्रिक में से क्या चुनना है, यह पूरी तरह आपकी ड्राइविंग पर निर्भर करता है। शहर में आने-जाने वालों के लिए सीएनजी कारें आज भी काफी प्रैक्टिकल हैं। कोई भी डील फाइनल करने से पहले अपनी जरूरतों का सही आकलन करें, ताकि फ्यूल की बढ़ती कीमतों के बावजूद आप लंबी अवधि में बचत कर सकें।


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