1 जुलाई से महंगी हुईं कारें: टाटा नेक्सन और सेल्टोस खरीदने वालों को अब देना होगा ज्यादा पैसा!
आज यानी 1 जुलाई, 2026 से भारत में कई दिग्गज कार कंपनियों ने अपनी गाड़ियों की कीमतें आधिकारिक तौर पर बढ़ा दी हैं। बीती रात 12 बजे से ही शोरूम के डीलर मैनेजमेंट सिस्टम (DMS) इनवॉइस पर नई कीमतें लागू हो गई हैं। ऑटोमोबाइल मार्केट में यह बदलाव इनपुट कॉस्ट (लागत) बढ़ने की वजह से देखा जा रहा है। अब टाटा नेक्सन जैसे पॉपुलर मॉडल्स खरीदने वाले ग्राहकों को पहले के मुकाबले ज्यादा ऑन-रोड कीमत चुकानी होगी।
कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी का सीधा असर एक्स-शोरूम रेट और रजिस्ट्रेशन फीस पर पड़ा है। नए इनवॉइस में अब रिवाइज्ड टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) और रजिस्ट्रेशन चार्ज जुड़कर आएंगे। इसके साथ ही, सभी नई लग्जरी गाड़ियों के लिए हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) फीस देना भी अनिवार्य होगा। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे बकाया पेमेंट करने से पहले अपनी गाड़ी का व्हीकल आइडेंटिफिकेशन नंबर (VIN) जरूर वेरिफाई कर लें।

1 जुलाई से महंगी हुईं कारें: आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर?
कीमतों में बदलाव के कारण अब कार फाइनेंस कराना भी महंगा हो गया है। 9.5% से 11% के बीच रहने वाली ब्याज दरों की वजह से आपकी मंथली EMI बढ़ जाएगी। जो ग्राहक 7 साल की अवधि के लिए लोन ले रहे हैं, उन पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। इसके अलावा, बढ़े हुए TCS रेट्स ने भी कार की कुल कीमत में काफी इजाफा कर दिया है।
| मॉडल का नाम | 30 जून की ऑन-रोड कीमत | 1 जुलाई की ऑन-रोड कीमत | EMI में अंतर |
|---|---|---|---|
| Tata Nexon | Rs 14.20 Lakh | Rs 14.45 Lakh | + Rs 550 |
| Kia Seltos | Rs 18.50 Lakh | Rs 18.82 Lakh | + Rs 720 |
| BYD Atto 3 | Rs 34.50 Lakh | Rs 35.10 Lakh | + Rs 1,150 |
कार डीलर्स की सलाह: इन बातों का रखें खास ख्याल
डीलर्स अब ग्राहकों को सलाह दे रहे हैं कि वे अपनी पेंडिंग बुकिंग के लिए तुरंत 'प्राइस-प्रोटेक्शन लेटर' हासिल कर लें। यह डॉक्यूमेंट शुरुआती खरीदारों को बढ़ी हुई कीमतों के बोझ से बचा सकता है। पेमेंट करने से पहले डीलर मैनेजमेंट सिस्टम (DMS) में अपना स्टेटस जरूर चेक करें। साथ ही, डिलीवरी की पक्की टाइमलाइन और VIN अलॉटमेंट की मांग करें ताकि भविष्य में किसी भी तरह के एक्स्ट्रा चार्ज से बचा जा सके।
बढ़ती कीमतों के इस दौर में सही फैसला लेने के लिए आपको अपने लोकल डीलरशिप से लगातार संपर्क में रहना होगा। जहां कुछ ब्रांड्स अभी अपने सिस्टम अपडेट कर रहे हैं, वहीं कुछ ने नई दरें सख्ती से लागू कर दी हैं। डाउन पेमेंट के बोझ को कम करने के लिए आप अपनी पुरानी गाड़ी को एक्सचेंज (ट्रेड-इन) भी कर सकते हैं। इनवॉइस में हुए इन बदलावों की पूरी जानकारी रखकर ही आप एक बेहतर फाइनेंशियल फैसला ले पाएंगे।


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