RBI रेपो रेट बढ़ने के बाद भी कार खरीदना हुआ आसान; 10-12 हजार की EMI में मिलेंगी ये बेस्ट गाड़ियां
9 अक्टूबर तक की स्थिति देखें तो, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 7 अक्टूबर को रेपो रेट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत किए जाने के बाद ऑटो लोन की ब्याज दरें थोड़ी बढ़ गई हैं। हालांकि, कम बजट वाले कार खरीदारों की जेब पर इसका बहुत बड़ा असर नहीं पड़ा है और EMI में मामूली बढ़ोतरी ही दर्ज की गई है। आरबीआई के फैसले के 24 घंटे के भीतर ही बैंकों ने रेपो-लिंक्ड और MCLR दरों में बदलाव शुरू कर दिया। इसके बावजूद, अगर आप मेट्रो या प्रमुख टियर-2 शहरों में सही डाउन पेमेंट देकर कार का एंट्री-लेवल वेरिएंट खरीद रहे हैं, तो गाड़ी अभी भी आपके बजट में ही रहेगी।
आज की ताजा दरों पर नजर डालें तो एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) का एक साल का MCLR 8.30 प्रतिशत है। वहीं एसबीआई (SBI) की फिक्स्ड-रेट कार लोन दरें लगभग 8.40 से 9.35 प्रतिशत के बीच हैं, जबकि नीतिगत बदलाव के बाद पीएनबी (PNB) की रेपो-लिंक्ड दर बढ़कर 8.35 प्रतिशत हो गई है। इसका गणित बिल्कुल सीधा है—हर 1 लाख रुपये के लोन पर अगर ब्याज दर 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) बढ़ती है, तो 5 या 7 साल की अवधि वाले लोन की EMI में महज 12 से 13 रुपये का फर्क आता है। इसे डाउन पेमेंट में थोड़ा सा बदलाव करके आसानी से संभाल जा सकता है।

7 अक्टूबर के RBI रेपो रेट बढ़ोतरी के बाद EMI का गणित
| प्रति ₹1 लाख | 5 साल की EMI | 7 साल की EMI |
|---|---|---|
| 8.50% (बढ़ोतरी से पहले) | ₹2,052 | ₹1,584 |
| 8.75% (बढ़ोतरी के बाद) | ₹2,064 | ₹1,596 |
अब सवाल यह है कि 10 से 12 हजार रुपये की EMI में कौन-कौन सी कारें आ सकती हैं? अगर आप लगभग 8.75 प्रतिशत ब्याज दर पर 7 साल के लिए लोन लेते हैं, तो 6.1 लाख से 7.5 लाख रुपये तक का लोन इस EMI ब्रैकेट में आ जाता है। आज की ऑन-रोड कीमतों की बात करें तो—मुंबई में हुंडई एक्स्ट्रा (Hyundai Exter) बेस वेरिएंट ~₹6.8 लाख, दिल्ली में टाटा पंच (Tata Punch) बेस वेरिएंट ~₹6.6 लाख, दिल्ली में ही डिजायर (Dzire) बेस वेरिएंट ~₹7.1–7.4 लाख और जयपुर में एक्स्ट्रा बेस वेरिएंट ~₹6.6–6.8 लाख के आसपास मिल रहा है। अगर आप 15 से 25 प्रतिशत तक डाउन पेमेंट करते हैं, तो आपकी महीने की किश्त आपके बजट में ही रहेगी।
बड़े शहरों में ऑन-रोड बजट और तुरंत डिलीवरी वाले रंग
कार डीलरशिप्स पर आमतौर पर सबसे ज्यादा बिकने वाले न्यूट्रल कलर्स का स्टॉक ज्यादा रहता है। सफेद (White) और ग्रे (Grey) रंगों का उत्पादन सबसे ज्यादा होता है, इसलिए मेट्रो शहरों में इन्हीं शेड्स में एक ही हफ्ते के अंदर डिलीवरी मिलने की संभावना सबसे अधिक होती है। जब भी डीलर "रेडी स्टॉक" का दावा करे, तो सबसे पहले VIN एलोकेशन (वाहन पहचान संख्या) और प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन (PDI) को प्राथमिकता दें। इसके अलावा, मारुति की स्विफ्ट और डिजायर में नए ऑटोमैटिक S-CNG ऑप्शन भी आ गए हैं, जो कम रनिंग कॉस्ट में शहर के लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो रहे हैं।
10 लाख रुपये तक के बजट में 5-स्टार BNCAP सेफ्टी वाली कारें
सुरक्षा को तवज्जो देने वाले परिवारों के लिए 10 लाख रुपये से कम के ऑन-रोड बजट में दो शानदार विकल्प मौजूद हैं—टाटा अल्ट्रोज़ (Tata Altroz - पेट्रोल, डीजल और सीएनजी तीनों में 5-स्टार भारत NCAP) और अपडेटेड टाटा पंच (Tata Punch - 5-स्टार भारत NCAP)। कई शहरों में इनके कई ट्रिम्स 10 लाख रुपये से कम ऑन-रोड कीमत पर मिल जाते हैं, जिससे एक सामान्य डाउन पेमेंट देकर आप इन्हें 10 से 12 हजार रुपये की EMI वाले ब्रैकेट में आसानी से ले सकते हैं।
मौजूदा ब्याज दरों को देखते हुए कुछ काम की फाइनेंस टिप्स: रेपो-लिंक्ड लोन की दरें बाजार के हिसाब से जल्दी रीसेट होती हैं। एसबीआई का फिक्स्ड-रेट कार लोन पूरे टेन्योर में बदलता तो नहीं है, लेकिन नए ग्राहकों को बढ़ी हुई दरों पर ही लोन जारी किया जाएगा। अगर आपका बैंक EMI पुरानी ही रखने के लिए लोन की अवधि (Tenure) बढ़ाता है, तो शुरुआती समय में ही थोड़ा-बहुत पार्ट-प्रीपेमेंट कर दें, इससे आपका कुल ब्याज काफी कम हो जाएगा। टायरों की बात करें तो भारतीय सड़कों पर ये 40,000 से 55,000 किलोमीटर तक चलते हैं; टायरों की ग्रिप 1.6 मिमी तक घिसने पर उन्हें तुरंत बदल लें।


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