मुंबई-पुणे की मूसलाधार बारिश में फंसने से बचना है? 6 लाख के बजट में लाएं ये दमदार पुरानी कारें
मुंबई और पुणे में आज, 6 जुलाई को हो रही मूसलाधार बारिश के चलते स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। इलाके में रेड अलर्ट जारी होने के कारण प्रशासन ने 'वर्क फ्रॉम होम' (WFH) की सलाह दी है। भारी बारिश की वजह से मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर यात्रियों को जबरदस्त ट्रैफिक और दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस मानसूनी आफत के बीच, कई खरीदार अब 6 लाख रुपये से कम बजट वाली मजबूत पुरानी (Used) कारों को तरजीह दे रहे हैं। ये गाड़ियां हैचबैक के मुकाबले जलभराव वाली सड़कों पर बेहतर प्रदर्शन करती हैं और बजट में भी फिट बैठती हैं।
पुरानी कार खरीदने का एक बड़ा फायदा यह है कि बारिश के बावजूद आपको एक हफ्ते के भीतर डिलीवरी मिल सकती है। ठाणे और पुणे के स्थानीय डीलर्स के पास ऐसी दमदार कारों का नया स्टॉक उपलब्ध है। खरीदारों को ऐसी गाड़ियों पर फोकस करना चाहिए जिनकी ग्राउंड क्लीयरेंस ज्यादा हो, ताकि पानी से भरी सड़कों पर सुरक्षित चला जा सके। भारी बारिश में बेहतर कंट्रोल के लिए सेफ्टी फीचर्स को प्राथमिकता देना जरूरी है। कुछ खास मॉडल्स अपनी मजबूती के कारण मौजूदा मौसम की चुनौतियों से निपटने में काफी कारगर साबित हो रहे हैं।

मुंबई-पुणे की बारिश और ट्रैफिक के लिए 6 लाख के अंदर बेस्ट पुरानी कारें
अपनी 198mm की शानदार ग्राउंड क्लीयरेंस और भरोसेमंद परफॉर्मेंस के कारण मारुति विटारा ब्रेज़ा (Maruti Vitara Brezza) इस लिस्ट में टॉप पर है। इसके पुराने मॉडल 6 लाख रुपये के बजट में आसानी से मिल जाते हैं। वहीं, फोर्ड इकोस्पोर्ट (Ford EcoSport) भी अपनी बेहतरीन 'वॉटर-वेडिंग' क्षमता (पानी में चलने की काबिलियत) की वजह से एक मजबूत दावेदार है। इन कारों के ऊपरी ट्रिम्स में अक्सर रियर वाइपर और डिफॉगर जैसे फीचर्स मिलते हैं, जो महाराष्ट्र में हो रही भारी बारिश के दौरान विजिबिलिटी (दृश्यता) बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी हैं।
| मॉडल | ग्राउंड क्लीयरेंस | मानसून के लिए खास फीचर |
|---|---|---|
| मारुति विटारा ब्रेज़ा | 198mm | जबरदस्त भरोसा |
| फोर्ड इकोस्पोर्ट | 200mm | पानी में चलने की क्षमता |
| टाटा नेक्सन | 209mm | सेफ्टी रेटिंग |
6 लाख से कम की पुरानी कार खरीदते समय इन बातों का रखें ख्याल
आज के समय में कार की जांच करते समय सबसे पहले ECU (Electronic Control Unit) स्कैन जरूर कराएं ताकि छिपी हुई तकनीकी खामियों का पता चल सके। कारपेट के नीचे हाथ लगाकर नमी या कीचड़ के निशानों की जांच करें, जो बाढ़ के पानी के घुसने का संकेत हो सकते हैं। सीट की रेलिंग पर जंग या केबिन से आने वाली सीलन की बदबू नमी से हुए नुकसान को दर्शाती है। इसके अलावा, इंश्योरेंस हिस्ट्री चेक करने से यह साफ हो जाएगा कि कार कभी हादसे या बाढ़ का शिकार तो नहीं हुई है। हमेशा सुनिश्चित करें कि टायरों में बेहतर ग्रिप के लिए कम से कम 5mm का थ्रेड बचा हो।
बढ़ती लागत के बावजूद इन कारों को शहर में चलाना काफी किफायती है। अगर आप पुरानी CNG कार लेते हैं, तो रनिंग कॉस्ट महज 3 से 4 रुपये प्रति किलोमीटर तक रह सकती है। RTO के जरिए ओनरशिप ट्रांसफर का खर्च आमतौर पर 3,000 से 5,000 रुपये के बीच आता है। कागजी कार्रवाई जल्दी पूरी कर आप अगली भारी बारिश से पहले सड़क पर उतरने के लिए तैयार हो सकते हैं। सुरक्षित और बेखौफ सफर के लिए आज ही अपनी गाड़ी सुरक्षित करें और मुंबई-पुणे के मानसून का सामना आत्मविश्वास के साथ करें।


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