मुंबई में येलो अलर्ट: भारी बारिश में भी सुरक्षित सफर के लिए चुनें ये 5 हाई-ग्राउंड क्लीयरेंस कारें
मौसम विभाग ने बुधवार, 5 अगस्त को मुंबई के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। ऐसे में रोजाना सफर करने वाले लोगों के लिए भारी जलभराव (waterlogging) एक बड़ी मुसीबत बन सकता है। सड़कों पर जमा गहरे पानी से सुरक्षित निकलने के लिए ड्राइवरों को अच्छे ग्राउंड क्लीयरेंस वाली गाड़ियों की जरूरत होती है। यही वजह है कि आजकल खरीदार ऊंचे ग्राउंड क्लीयरेंस वाली बजट कारों को काफी पसंद कर रहे हैं। बाजार में 10 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) से कम कीमत में कई भरोसेमंद गाड़ियां मौजूद हैं।
मानसून के इस अनप्रिडिक्टेबल मौसम में गाड़ी के सेफ्टी फीचर्स बेहद जरूरी हो जाते हैं। इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) गीली और फिसलन भरी सड़कों पर गाड़ी को फिसलने से बचाता है। आजकल कार कंपनियां अपनी शुरुआती (एंट्री-लेवल) गाड़ियों में भी स्टैंडर्ड तौर पर 6 एयरबैग दे रही हैं। पैसेंजर सेफ्टी पर यह फोकस सफर को काफी सुरक्षित और तनावमुक्त बनाता है। एक मजबूत कार चुनकर आप बारिश से बेहाल सड़कों पर भी आसानी से निकल सकते हैं।

Mumbai Yellow Alert: आज ही घर लाएं 10 लाख से कम बजट वाली ये हाई-ग्राउंड क्लीयरेंस कारें
बाजार में कई ऐसी कॉम्पैक्ट कारें हैं जो अपने ऊंचे स्टांस और बेहतरीन सेफ्टी फीचर्स के लिए जानी जाती हैं। टाटा पंच (Tata Punch) शानदार सेफ्टी रेटिंग और अच्छे ग्राउंड क्लीयरेंस के साथ आती है। वहीं, रेनॉल्ट काइगर (Renault Kiger) और निसान मैग्नाइट (Nissan Magnite) का ग्राउंड क्लीयरेंस भी बेहद जबरदस्त है। मारुति फ्रोंक्स (Maruti Fronx) में भी यात्रियों की सुरक्षा के लिए स्टैंडर्ड तौर पर 6 एयरबैग मिलते हैं। नीचे इन पॉपुलर मॉडल्स की आपस में तुलना की गई है।
| कार मॉडल | ग्राउंड क्लीयरेंस | स्टैंडर्ड एयरबैग |
|---|---|---|
| टाटा पंच | 187 mm | 6 एयरबैग |
| रेनॉल्ट काइगर | 205 mm | 4 एयरबैग |
| निसान मैग्नाइट | 205 mm | 2 एयरबैग |
| मारुति फ्रोंक्स | 190 mm | 6 एयरबैग |
| हुंडई एक्सटर | 185 mm | 6 एयरबैग |
Mumbai Yellow Alert: भारी बारिश के बीच गाड़ी का ऐसे रखें ख्याल, अपनाएं ये जरूरी टिप्स
सही गाड़ी चुनने के साथ-साथ उसकी सही देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है। केबिन के अंदर पानी घुसने से रोकने के लिए दरवाजे के सील (door seals) की नियमित जांच करें [subhead]। आमतौर पर एक टायर की लाइफ लगभग 40,000 से 45,000 किलोमीटर होती है। अगर टायर की थ्रेड डेप्थ (tread depth) 2 मिलीमीटर से कम हो जाए, तो उसे तुरंत बदल दें। इसके अलावा, इमरजेंसी के लिए गाड़ी में हमेशा एक पोर्टेबल टायर इन्फ्लेटर (tyre inflator) साथ रखें।
समझदारी भरे फैसले आपको भारी आर्थिक नुकसान से बचा सकते हैं। कार इंश्योरेंस में 'इंजन-प्रोटेक्ट' एड-ऑन (engine-protect add-on) लेने से आप हाइड्रोस्टेटिक लॉक के महंगे खर्च से बच सकते हैं [subhead]। सड़क पर पानी का स्तर अगर पहियों के आधे हिस्से से ऊपर हो, तो वहां गाड़ी ले जाने से बचें। गहरे पानी से निकलने के बाद हमेशा अपनी गाड़ी को एक मिनट के लिए स्टार्ट (idle) छोड़ दें [subhead]। मानसून के इस मौसम में थोड़ी सी सावधानी आपकी गाड़ी को बड़े नुकसान से बचा सकती है।


Click it and Unblock the Notifications