हिमाचल की फिसलन भरी सड़कों पर ये 7-सीटर कारें हैं सबसे सुरक्षित, मानसून में परिवार रहेगा सेफ

हिमाचल प्रदेश में आज, 10 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जिससे सफर करना काफी जोखिम भरा हो गया है। शिमला और मंडी जैसे इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए अब सुरक्षित सफर के विकल्पों की जरूरत बढ़ गई है। यही वजह है कि कई खरीदार 15 लाख रुपये के बजट में ऐसी मल्टी-पर्पज व्हीकल (MPV) तलाश रहे हैं, जो फिसलन भरी चढ़ाइयों और अचानक होने वाले लैंडस्लाइड के बीच मजबूती से टिक सकें। इस मानसून सीजन में अब बेसिक सुविधाओं से कहीं ज्यादा जरूरी गाड़ियों के सेफ्टी फीचर्स हो गए हैं।

महिंद्रा बोलेरो नियो (Mahindra Bolero Neo) में रियर व्हील ड्राइव (RWD) सिस्टम मिलता है, जो गीली और खड़ी पहाड़ी सड़कों पर टायर की पकड़ को बेहतर बनाता है। फ्रंट-व्हील ड्राइव कारों के मुकाबले, यह कीचड़ भरे रास्तों पर ज्यादा आसानी से चढ़ पाती है। धर्मशाला के डीलर्स के पास फिलहाल इसका स्टॉक तुरंत डिलीवरी के लिए उपलब्ध है। इसका लैडर-फ्रेम चेसिस पहाड़ों के उन खराब और टूटे रास्तों पर गाड़ी को मजबूती देता है, जो अक्सर बारिश के बाद देखने को मिलते हैं।

Best 7-Seater MPVs for Himachal Monsoon 2026: Safe Cars for Hilly Roads

हिमाचल की पहाड़ी सड़कों के लिए बेस्ट 7-8 सीटर सुरक्षित MPVs

गीली सड़कों पर इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) एक बेहद जरूरी फीचर है। यह ड्राइवर को फिसलन भरे मोड़ों पर गाड़ी पर कंट्रोल बनाए रखने में मदद करता है। किया कारेंस (Kia Carens) जैसे मॉडल्स में हिल होल्ड कंट्रोल (HHC) दिया गया है, जो गाड़ी को खड़ी चढ़ाई पर पीछे लुढ़कने से रोकता है। वहीं, मारुति XL6 और सिट्रोएन C3 एयरक्रॉस में पथरीले रास्तों के लिए बेहतरीन ग्राउंड क्लीयरेंस मिलता है।

मॉडल का नाम सीटिंग ड्राइव टाइप हिल सेफ्टी किट
महिंद्रा बोलेरो नियो 7 सीटर रियर व्हील ड्राइव MLD, हाई ग्राउंड क्लीयरेंस
किया कारेंस 7 सीटर फ्रंट ड्राइव ESC, HHC, 6 एयरबैग्स
मारुति XL6 6 सीटर फ्रंट ड्राइव HHC, 360-व्यू कैमरा
रेनॉ ट्राइबर 7 सीटर फ्रंट ड्राइव 4-स्टार सेफ्टी, ESC

बहुत ज्यादा खड़ी चढ़ाइयों पर कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) वेरिएंट्स के इस्तेमाल से बचें। पहाड़ों पर भारी लोड के साथ इन इंजनों में अक्सर जरूरी टॉर्क (ताकत) की कमी हो जाती है। साथ ही, सभी सीटों का इस्तेमाल करने पर सामान रखने की जगह भी काफी कम बचती है। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि रेड अलर्ट और रात में होने वाली भारी बारिश के दौरान घर के अंदर ही रहें। पानी से भरे रास्तों को तभी पार करें जब पानी का स्तर पहिए के हब (बीच का हिस्सा) से नीचे हो। सही प्लानिंग ही आपके परिवार को सुरक्षित रख सकती है।

Article Published On: Friday, July 10, 2026, 12:33 [IST]
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