मार्केट में पैसा अपार, फिर भी नहीं बन पा रही Solar Car! वजह जान हो जाएंगे हैरान

Solar Cars in India: लगातार बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दाम और सख्त एमीशन नॉर्म के चलते लोगों ने CNG Cars की ओर रुख किया। समय के साथ ये फ्यूल ऑप्शन भी महंगा हो गया है और सीएनजी खरीदने के लिए काफी मशक्कत भी करनी पड़ती है।

मार्केट थोड़ा एडवांस हुआ और कार निर्माता कंपनियों ने ICE-पावर्ड गाड़ियों की जगह ELectric Motor के साथ व्हीकल पेश करने शुरू कर दिए, जो थोड़े महंगे होते हैं लेकिन जीरो एमीशन के साथ अच्छी इकोनॉमी प्रदान करने में सक्षम है।

Solar Cars

इन सब के साथ मार्केट में पहली सोलर कार ने भी एंट्री मार ली है। ये पारंपरिक EV की तरह ही है, लेकिन इसको सोलर पैनल से भी सपोर्ट मिलता है, जिससे गाड़ी की रेंज बढ़ेगी। हालांकि, ये काम एक छोटे से स्टार्टअप ने किया है।

देश की प्रमुख कार निर्माता कंपनियां ऐसा कोई भी प्रोडक्ट पेश करने में फिलहाल दिलचस्पी नहीं दिखा रही हैं। अपने इस लेख में हम यही जानेंगे कि घरेलू बाजार में एंट्री मारने वाली पहली सोलर-पावर्ड कार कौन सी है। साथ ही सोलर कार के नफा-नुकसान पर भी नजर डालेंगे।

Solar Cars

क्यों नहीं बन पा रही सोलर कार?

भारत में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बेहतर स्थिति होने के बावजूद, देश की कोई भी ऑटोमोबाइल कंपनी सोलर कार के डेवलपमेंट में सक्रिय रूप से निवेश नहीं कर रही है। कई तकनीकी, आर्थिक और नीतिगत कारकों की वजह से इंडियन ऑटो मार्केट में सोलर कार का निर्माण नहीं हो पा रहा है। आइए, इन्हें अलग-अलग प्वाइंट्स में समझते हैं-

लागत ज्यादा मांग कम: सोलर कारों का निर्माण अन्य गाड़ियों के मुकाबले एक जटिल और महंगी प्रक्रिया है। सोलर पैनल, हाई एफिशियंसी वाली बैटरी और कार्बन फाइबर जैसे हल्के मैटेरियल की कीमत काफी ज्यादा है। भारत में जहां अधिकांश उपभोक्ता किफायती वाहनों को प्राथमिकता देते हैं, सोलर कारों की ज्यादा कीमत होने से मार्केट में उनकी मांग नहीं होगी।

मौसम की मार: सोलर कार का फायदा तभी है जब उन्हें धूप में चलाया जाए। लगातार मौसम में बदलाव होने के कारण हमारे यहां 3 से 4 महीने ही चटक धूप निकलती है। वायु प्रदूषण और बादल छाए रहने की स्थिति में भी सोलर कारों को मुश्किल होगी। विशेष रूप से मानसून और सर्दियों के दौरान तो कई दिनों तक धूप निकलती ही नहीं है।

इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों पर ध्यान: टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी और टोयोटा जैसी कंपनियां भारत में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के डेवलपमेंट पर अधिक ध्यान दे रही हैं। हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहन प्रदूषण को कम करने में प्रभावी हैं और सोलर कारों की तुलना में अधिक व्यावहारिक माने जाते हैं। कंपनियां सोलर कारों की अनिश्चित मांग और ज्यादा रिस्क की वजह से इस सेगमेंट में नहीं घुस रही हैं।

सोलर कार के फायदे

सोलर कारों के कई लाभ हैं, जो भारत जैसे विकासशील देश के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। सबसे बड़ा फायदा, सूर्य की रोशनी मुफ्त है। इससे पेट्रोल और डीजल पर होने वाला खर्च बचाया जा सकता है। सोलर कार की मदद से तेल के आयात पर निर्भरता भी घटेगी। अगर रोजगार के परिपेक्ष में देखा जाए, तो सौर पैनल निर्माण, बैटरी उत्पादन और मेंटेनेंस के क्षेत्र में नौकरियां बढ़ेंगी।

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देश की पहली Solar Car

हाल ही में हुए 2025 Auto Expo के दौरान Vayve Eva नाम से देश की पहली सोलर पावर्ड कार लॉन्च की गई है। इसकी शुरुआती एक्स शोरूम कीमत 3.25 लाख रुपये है। Vayve Eva सोलर इलेक्ट्रिक कार की टॉप स्पीड 70 KMPH है और ये सिंगल चार्ज पर 250KM तक की क्लेम्ड रेंज देने में सक्षम है।

महज 5 सेकेंड में 0-40KMPH की स्पीड पकड़ने वाली इस छोटी सी कार में 3 लोगों के बैठने की व्यवस्था है। फीचर्स की बात करें, तो ये लिक्विड बैटरी कूलिंग के साथ पैनोरमिक ग्लास रूफ, लैपटॉप चार्जर, एपल कारप्ले और एंड्रॉइड ऑटो सपोर्ट के साथ इंफोटेनमेंट और स्पीड सेंसिंग डोर लॉक जैसे फीचर्स से लैस है।

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Article Published On: Monday, June 16, 2025, 18:00 [IST]
English summary
Solar car in india concept challenges and benefits
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