चीन ने बढ़ाई इंडियन ऑटो इंडस्ट्री की टेंशन! रेयर अर्थ मैग्नेट की वजह से घटेगा प्रोडक्शन; महंगी होंगी गाड़ियां?
चीन द्वारा रेयर अर्थ मैग्नेट के निर्यात पर सख्त नियंत्रण और शिपमेंट मंजूरी में देरी के कारण भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग गंभीर संकट का सामना कर सकता। रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, इन मैग्नेट्स का स्टॉक जुलाई 2025 के मध्य तक खत्म हो सकता है।
इससे पैसेंजर व्हीकल और टू-व्हीलर के प्रोडक्शन में भारी रुकावट आ सकती है। ये मैग्नेट इलेक्ट्रिक और पारंपरिक वाहनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो मोटर, स्टीयरिंग, ब्रेक और अन्य सिस्टम में उपयोग होते हैं।

इंडियन ऑटो इंडस्ट्री पर संकट के बादल
ICRA के आला अधिकारी ने बताया कि भारत ने वित्त वर्ष 2025 में लगभग 200 मिलियन डॉलर मूल्य के रेयर अर्थ मैग्नेट आयात किए, जिनमें से 85% चीन से आए। हालांकि, इनका व्यापारिक मूल्य कम लग सकता है, लेकिन इनकी रणनीतिक महत्वता बहुत अधिक है।
चीन वैश्विक रेयर अर्थ मैग्नेट उत्पादन का 90% नियंत्रित करता है। इसने अप्रैल 2025 से निर्यात पर सख्त नियम लागू किए, जिसके कारण सप्लाई चेन में अनिश्चितता बढ़ गई है।
समस्या से कैसे निपटा जाए?
इस संकट से निपटने के लिए भारत कई विकल्प तलाश रहा है। इनमें चीन से पूरी तरह से असेंबल्ड मोटर आयात करना, रोटर को मैग्नेट असेंबली के लिए चीन भेजना और फिर वापस आयात करना या रेयर अर्थ मैग्नेट के बिना मोटर डेवलप करना शामिल है।
हालांकि, इन विकल्पों में लॉजिस्टिक, नियामक और इंजीनियरिंग जटिलताएं शामिल हैं। देश की कुछ ऑटो काप निर्माता कंपनियों ने कहा कि अभी तक उनके संचालन में कोई रुकावट नहीं आई है, लेकिन स्थिति पर नजर रखी जा रही है और कई समाधानों पर काम किया जा रहा है।
मुश्किल है आत्मनिर्भरता की राह!
ऑटो उद्योग वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chain) की तलाश कर रहा है, लेकिन चीन पर निर्भरता के कारण यह चुनौतीपूर्ण है। वैकल्पिक सामग्रियों का उपयोग या स्वदेशी सप्लाई चेन डेवलप करना लंबी अवधि का समाधान हो सकता है, लेकिन इसमें समय और निवेश की आवश्यकता है।
उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट भारत के लिए आत्मनिर्भर आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने का एक अवसर हो सकता है। हालांकि, इस राह में कई कठिनाइयां भी आने वाली हैं।


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