FAME-II स्कीम खत्म होने के बाद डगमगाया EV 2-Wheeler मार्केट! छोटी कंपनियों का बचना मुश्किल
भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों (EV 2-Wheelers) का बाजार हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है, लेकिन फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (FAME-II) सब्सिडी नियमों के उल्लंघन के कारण छोटे निर्माताओं को भारी नुकसान हुआ है।
सरकार की सख्त कार्रवाई ने कई छोटे ईवी निर्माताओं को बाजार से लगभग बाहर कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप उनकी बिक्री में भारी गिरावट आई है। कई कंपनियां लगभग दिवालिया होने की कगार पर हैं। आइए जानते हैं कि ईवी टू-व्हीलर मार्केट में क्या उतार-चढ़ाव आए हैं।

FAME-II स्कीम का मिसयूज पड़ा भारी
FAME-II योजना का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना था, जिसमें दोपहिया वाहनों पर प्रति वाहन 15,000 रुपये तक की सब्सिडी शामिल थी। हालांकि, कुछ निर्माताओं पर नियमों का पालन न करने का आरोप लगा, जैसे कि लोकलाइजेशन स्टैंडर्ड को पूरा न करना। सरकार ने इन कंपनियों पर जुर्माना लगाया और सब्सिडी बंद कर दी, जिससे छोटे प्लेयर्स के लिए प्रोडक्शन कॉस्ट और कीमतें एकदम से बढ़ गई हैं।
कामकाज ठप होने का डर
छोटे निर्माता, जो पहले से ही बड़े ब्रांड्स जैसे Ola Electric और Hero Electric को कंपीट कर रहे थे, वह अभी तक इस झटके से उबर नहीं पाए हैं। उनकी बिक्री में भारी कमी आई, क्योंकि ग्राहक अब सस्ते विकल्पों की ओर मुड़ रहे हैं। कई छोटी कंपनियों ने अपने संचालन को सीमित कर दिया है या पूरी तरह बंद कर दिया, जिससे बाजार में एकाधिकार की स्थिति बन रही है।
क्या कहते हैं आंकड़ें
EV 2-Wheeler मार्केट में मौजूद छोटे प्लेयर्स की बात करें, तो ओकिनावा ऑटोटेक ने साल 2023 में 31,618 यूनिट सेल की थीं, जो 2024 में घटकर मात्र 4,855 यूनिट रह गई। एम्पीयर और ग्रीव्स ने 2025 में 26,963 यूनिट सेल कीं, जो 2024 में बिकी 36,148 और 2023 में बिकी 66,958 यूनिट के मुकाबले बेहद कम है।
एक समय में अपना जलवा बिखेरने वाली Hero Electric के दिन भी खराब चल रहे हैं। 2023 में इसने 29,965 यूनिट बेची थीं, जो 2024 में घटकर मात्र 2,916 रह गई और 2025 में कंपनी अब तक केवल 382 यूनिट बेच पाई है। इसके अलावा, साल 2025 में बेनलिंग इंडिया की 95 यूनिट और एएमओ मोबिलिटी की मात्र 25 यूनिट ही बिक पाई हैं।
ग्राहकों ने भी मुंह मोड़ा
सब्सिडी बंद होने से उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ा है। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की कीमतें बढ़ने से कई खरीदार पारंपरिक पेट्रोल वाहनों की ओर लौट रहे हैं। इससे न केवल छोटे निर्माताओं की मुश्किलें बढ़ी हैं, बल्कि भारत के पर्यावरणीय लक्ष्यों पर भी सवाल उठ रहे हैं। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 30% इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री का है, लेकिन यह कदम उस दिशा में एक रुकावट बन सकता है।
समाधान क्या है?
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह सख्ती दीर्घकालिक रूप से ईवी टू-व्हीलर मार्केट को मजबूत कर सकती है। नियमों का पालन करने वाली कंपनियां क्वालिटी और इनोवेशन पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैं। सरकार को भी नई नीतियों पर विचार करना चाहिए, जो छोटे निर्माताओं को सहायता प्रदान करें।


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