क्या E20 फ्यूल से कम होता है गाड़ी का माइलेज? जानें एथेनॉल ब्लेंड पेट्रोल के फायदे और नुकसान
Ethanol Blend Fuel यानी E20 पेट्रोल ( (20% एथेनॉल मिलाया गया पेट्रोल) इस वक्त देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। सरकार ने E20 एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लक्ष्य को हासिल कर लिया है। देशभर में इसके फायदे और नुकसान दोनों पर चर्चा चल रही है।
भारत सरकार ने इस फ्यूल को बढ़ावा देने का उद्देश्य प्रदूषण कम करना और क्रूड ऑयल इंपोर्ट पर निर्भरता घटाना बताया है। पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से गाड़ियों को होने वाले नुकसान को लेकर आम लोगों में चिंता है, ऐसे में आइए इसके फायदे-नुकसान के साथ सरकारी पक्ष पर नजर डालते हैं।

Ethanol Blend Fuel (E20) के फायदे
पर्यावरण के लिए बेहतर: एथेनॉल एक बायोफ्यूल है, जो पेट्रोल की तुलना में कम प्रदूषण करता है। E20 पेट्रोल से कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन उत्सर्जन में 20-50% तक कमी आती है। इससे एयर क्वालिटी बेहतर होता है।
क्रूड ऑयल के इंपोर्ट में कमी: भारत 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। एथेनॉल ब्लेंडिंग से तेल इंपोर्ट में कमी आएगी। इसके अलावा एथेनॉल गन्ने, मक्का और कृषि प्रोडक्ट्स से बनता है। इससे किसानों को अपनी फसलों और अवशेषों की अच्छी कीमत मिलती है, जिससे उनकी आय बढ़ती है।

Ethanol Blend Fuel (E20) के नुकसान या चिंता
1. कुछ वाहन मालिक और वाहन निर्माता चिंतित हैं कि पुरानी गाड़ियों में 20% तक के एथेनॉल ब्लेंड का ज्यादा इस्तेमाल इंजन, गास्केट और फ्यूल सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे वाहनों के लिए जिन्हें E20 के लिए ट्यून नहीं किया गया, माइलेज में 3-6% तक की गिरावट हो सकती है क्योंकि इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी पेट्रोल से कम होती है।
2. कुछ वाहन निर्माता 20% एथेनॉल वाले फ्यूल के नुकसान को अपनी वारंटी में शामिल नहीं करते हैं, जिससे वाहन मालिकों की परेशानी बढ़ सकती है। इसके अलावा वाहन में तकनीकी बदलाव जैसे एंटी-करॉसिव कोटिंग्स, इंजन रीमैपिंग और फैब्रिकेशन जरूरी हो सकती है ताकि E20 फ्यूल का सही उपयोग हो सके। बाजार में कुछ E20 कंप्लायंट पेट्रोल में पानी या मिलावट की शिकायतें भी आई हैं, जिससे वाहन के इंजन पर असर पड़ सकता है।
Ethanol Blend Fuel (E20) को लेकर सरकार का दावा
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) के मुताबिक E20 पेट्रोल पुरानी गाड़ियों को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचाता। मंत्रालय का दावा है कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और अन्य संस्थानों के टेस्ट में E20 से गाड़ियों के परफॉर्नेंस, पावर या फ्यूल कंजम्बशन में कोई खास अंतर नहीं दिखा।
एथेनॉल ब्लेंड पेट्रोल आपकी गाड़ी को नुकसान नहीं पहुंचाता बल्कि फ्यूल की परफॉर्मेंस और पर्यावरण के लिहाज से फायदे करता है। सरकारा का दावा है कि टेस्टिंग के दौरान पुरानी गाड़ियों में 20,000-30,000 किमी के बाद रबर पुर्जों को बदलने की सलाह दी गई है, जो सस्ता और आसान है और परफॉर्मेंस पर खास असर देखने को नहीं मिला है।
इसके अलावा कहा गया कि उन गाड़ियों में माइलेज में 1 से 2 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है जो बेसिकली E10 पेट्रोल के लिए डिजाइन किए गए हैं। इसके अलावा अन्य वाहनों में, गिरावट लगभग 3 से 6 प्रतिशत हो सकती है, लेकिन इंजन में ज्यादा खराबी की बात नहीं कही गई है। सरकार E20 फ्यूल को देश में तेजी से बढ़ावा देने की प्लानिंग पर कायम है और ये लक्ष्य 27% तक मिश्रण बढ़ाने का भी है।
बाइक और कार यूजर्स की मांग
ज्यादा बाइक और कार यूजर्स और ऑटोमोबाइल निर्माता चाहते हैं कि सरकार E20 और प्योर पेट्रोल को अलग-अलग बेचे, ताकि पुरानी गाड़ियों वाले लोग अपनी जरूरत के हिसाब से फ्यूल चुन सकें। साथ ही, पेट्रोल पंपों पर E10 या E20 की क्लीयर जानकारी देने की मांग भी उठ रही है।


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