इस कलर की गाड़ी लेकर निकले, तो तुरंत रोक लेगी पुलिस! जानिए क्यों लगा बैन
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पैसेंजर कार बाजार है। जापान को पीछे छोड़ हाल ही में इंडिया ने ये स्थान पाया, जबकि अमेरिका और चीन क्रमशः पहले और दूसरे नंबर पर काबिज हैं। वहीं, जापान को एक पायदान का नुकसान हुआ है।
घरेलू बाजार के अंदर विभिन्न रेंज और कलर ऑप्शन में गाड़ियां उपलब्ध हैं। ग्राहक अपनी उपयोगिता और सहूलियत के अनुसार मनपसंद गाड़ी का चुनाव करते हैं। हालांकि, एक स्पेसिफिक कलर भी है जिसे देश का आम नागरिक नहीं खरीद सकता है।

Olive Green में नहीं खरीद सकते गाड़ी: सरकारी नियमों के अनुसार कोई भी सिविलियन Olive green कलर में प्राइवेट व्हीकल नहीं खरीद सकता है। इस रंग विकल्प को Defense Vehicles के लिए रिजर्व करके रखा गया है।
कब लागू हुआ नियम: कुछ सुरक्षा कारणों के तहत MVA के अंदर साल 1989 में एक नया नियम जोड़ा गया था। केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम, 1989 के नियम 121 (1) के अनुसार ऑलिव ग्रीन कलर केवल रक्षा वाहनों के लिए आरक्षित है।
पकड़े जाने पर क्या होगा: सबसे पहली बात तो ये है कि इस स्पेसिफिक कलर ऑप्शन में कोई भी OEM गाड़ी नहीं बेचती है। हालांकि, कुछ लोग कोटिंग या पेंटिग की मदद से कलर बदलवा लेते हैं। ऐसा करने पर गाड़ी सीज होने के साथ भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
गाड़ी का रंग कैसे बदलें: अगर आप अपनी गाड़ी की पेंट स्कीम बदलना चाहते हैं, तो उसके लिए लीगल प्रोसेस है। आपको सबसे पहले संबंधित RTO को सूचित करना होगा और नए रंग के लिए वहां से मंजूरी लेनी होगी। अप्रूवल के बाद वाहन की RC पर भी कलर अपडेट कर दिया जाएगा।
आर्मी की गाड़ियां: भारतीय सेना के पास अमूमन Olive green कलर की गाड़ियां ही होती हैं। मौजूदा समय में आर्मी की फ्लीट में Tata Safari और Maruti Suzuki Gypsy जैसी गाड़ियां हैं। इसके अलावा Toyata Hilux, Maruti Jimny और Mahindra Scorpio जैसी कारें भी बेड़े का हिस्सा हैं।


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