CNG vs Petrol Cost: सीएनजी गाड़ियां पेट्रोल मॉडल से क्यों महंगी होती हैं? जानिए इसके 4 बड़े कारण
क्या आपने कभी सोचा है कि CNG कारें पेट्रोल मॉडल से ज्यादा महंगी क्यों होती हैं? ऐसा लगता है कि सीएनजी जैसा सस्ता ईंधन इस्तेमाल करने वाली गाड़ी कम खर्चीली होनी चाहिए, है ना? लेकिन हकीकत ये है कि सीएनजी कारों की कीमत पेट्रोल कारों से ज्यादा होती है।
ऐसे में हम आपको इसके पीछे के कई कारण बताने जा रहे हैं, जिससे आप समझ पायेंगे कि क्यों सीएनजी कारें बेहतरीन होने के बावजूद भी पेट्रोल कारों की तुलना में महंगी बिकती हैं।

सीएनजी किट: पेट्रोल कारों के इंजन को सीएनजी पर चलाने के लिए एक खास किट लगानी पड़ती है। इस किट में कई पार्ट्स जैसे- हाई-प्रेशर स्टोरेज टैंक, फिलिंग नोजल, प्रेशर रेगुलेटर, जंग रोधक पाइपलाइन होते हैं, जिनके रिसर्च और डेवलपमेंट में काफी पैसा लगता है।
मजबूत इंजन: सीएनजी पर चलने के लिए इंजन में कुछ बदलाव करने पड़ते हैं, जैसे मजबूत पिस्टन, वाल्व और फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम में बदलाव, जिससे लागत बढ़ जाती है। साथ ही सीएनजी गैस जलाने के लिए पेट्रोल के मुकाबले ज्यादा मजबूत इंजन की जरूरत होती है।
ये इंजन इसलिए जरूरी होते हैं क्योंकि सीएनजी गैस को जलाने के लिए ज्यादा प्रेशर की जरूरत होती है। मजबूत इंजन बनाने में ज्यादा मेटल और एडवांस टेक्नोलॉजी लगती है, जिससे गाड़ी की कीमत बढ़ जाती है।
सुरक्षा मानक: सीएनजी ज्वलनशील गैस है, इसलिए इन कारों को कड़े सुरक्षा मानकों का पालन करना होता है। मजबूत और सुरक्षित सीएनजी टैंक बनाने में भी ज्यादा खर्च आता है।
कम डिमांड: भारत में अभी भी सीएनजी कारों की डिमांड कम है। कम डिमांड होने की वजह से कंपनियां सीएनजी कारों को उतना नहीं बनाती जितना कि पेट्रोल कारों को बनाती हैं।
ऐसे में प्रोडक्शन कम होने से कार कंपनियों को हर गाड़ी पर ज्यादा लागत लगती है, और वो इसी लागत को कार की कीमत में शामिल कर उसे महंगा बेचते हैं।
इन कारणों से सीएनजी कारों की शुरुआती लागत पेट्रोल कारों की तुलना में 1 से 1.5 लाख रुपये तक अधिक होती है। हालांकि, सीएनजी कारों का मेंटेनेंस कम खर्चीला होता है और इनमें माइलेज भी ज्यादा मिलता है, जिससे लंबे समय में ये पेट्रोल कारों से किफायती हो सकती हैं।


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