व्हीकल एक्सपोर्ट में खत्म हुई जापान की बादशाहत! इस देश ने पछड़ा, जानें डिटेल्स
व्हीकल एक्सपोर्ट के मामले में जापान की बादशाहत खत्म हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन वाहनों की निर्यात में जापान को पछाड़कर दुनिया में नंबर वन बन गया है।
बता दें कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा वाहन मैन्युफैक्चर करने वाला देश है। ऐसे में व्हीकल एक्सपोर्ट के मामले में चीन ने जापान को पीछे छोड़कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है।

रिपोर्ट के मुताबिक जापान ने साल 2023 में 4.42 मिलियन वाहन एक्सपोर्ट किए। वहीं China Association of Automobile Manufacturers (CAAM) के आंकड़ो के मुताबिक चीन ने 4.91 मिलियन वाहनों के निर्यात किए हैं।
वहीं चीन के कस्टम ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक यह संख्या 5.22 मिलियन है। यह प्रतिवर्ष 57 प्रतिशत की भारी वृद्धि है। बता दें कि जापान कई वर्षों से वाहनों के निर्यात के मामले पूरी दुनिया में सबसे आगे रहा है।

लेकिन हाल के दिनों में इसके ऑटोमोटिव उद्योग को जोरदार गिरावट के दौर से गुजरना पड़ा है। बता दें कि चीन पहले से ही मासिक आधार पर जापान से अधिक वाहन निर्यात कर रहा था, लेकिन हाल के आंकड़ों से पुष्टि हुई कि वह पूरे साल भी नंबर एक रहा।
हालांकि अपने चीनी कंपीटीटर्स के मुकाबले Toyota सहित कई अन्य जापानी वाहन निर्माता, यूनिट सेल के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी के रूप में जानी जाती है, क्योंकि ये कंपनिया बड़े पैमाने पर दूसरे देशों में भी वाहन का निर्माण करते हैं।

हाल के वर्षों में इलेक्ट्रिक कारों में बड़े पैमाने पर निवेश के कारण चीन के ऑटो सेक्टर में जबरदस्त तेजी आई है। हालांकि जपानी कंपनियों ने भी इस क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाएं हैं।
जापानी कार निर्माताओं ने लंबे समय से हाइब्रिड मॅाडल्स पर काम कर रही है। इस क्षेत्र की पहली शुरुआत Toyota Prius के साथ हुई थी। बता दें कि हाल ही में चीनी कंपनी BYD ने इलेक्ट्रिक वाहनों के सेल के मामले में टेस्ला को पीछे छोड़ दिया है।
BYD न केवल बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन बल्कि हाइब्रिड वाहन भी बनाती है। वहीं टेस्ला केवल पूरी तरह से इलेक्ट्रिक कारें बेचता है। BYD की स्थापना 1995 में एक बैटरी निर्माण कंपनी के रूप में हुई थी। BYD ने 2003 में कार निर्माण सेक्टर में प्रवेश किया।
BYD चीन और चुनिंदा यूरोपीय बाजारों में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड दोनों मॉडल बेचता है। चीनी कंपनी भारत में दो ईवी बेच रही है। जैसे-जैसे चीनी बाजार में ईवी की मांग बढ़ी और कंपनी को सरकार से पूरा समर्थन मिला, कंपनी बढ़ी और फली-फूली।


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