Car Safety: कार में पीछे बैठे यात्रियों को भी लगाना होगा सीट बेल्ट, सरकार लाने जा रही नया नियम!
हम जानते हैं कि आमतौर पर कारों में ड्राइवर और आगे की सीट पर बैठे यात्री ही सीट बेल्ट पहनते हैं। पीछे बैठने वाले यात्रियों के लिए सीट बेल्ट की सुविधा होने के बावजूद भी कई लोग इसका पालन नहीं करते हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने हाल ही में एक अहम फैसला लिया है। दरअसल सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 1 अप्रैल, 2025 से सभी कारों में 'रियर सीट बेल्ट अलार्म' लगाने का निर्देश दिया है।

केंद्र सरकार द्वारा इस प्रावधान को अनिवार्य बनाने के पीछे कुछ महत्वपूर्ण कारण हैं। दरअसल भारत में यातायात नियमों और कानूनों के अनुसार, कारों की पिछली सीट पर बैठे यात्रियों को भी सीट बेल्ट पहनना चाहिए।
क्या कहता है नियम: यात्री अगर रियर सीट बेल्ट नियम का उल्लंघन करते हैं, तो उन पर मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। लेकिन हकीकत तो यह है कि पिछली सीट पर बैठने वाले ज्यादातर यात्री सीट बेल्ट नहीं पहनते हैं।

कई लोगों का मानना है कि केवल कार की आगे की सीटों पर बैठे लोगों को ही सीट बेल्ट लगानी चाहिए। उनका मानना है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि दुर्घटनाओं में आगे की सीट पर बैठे यात्रियों को पीछे की सीट पर बैठने वाले यात्रियों से ज्यादा खतरा होता है।
लेकिन नियमों के मुताबिक कार में सभी यात्रियों को सीट बेल्ट लगाना जरूरी है। यदि कारों में पीछे की सीट के यात्री सीट बेल्ट नहीं लगाते हैं तो सड़क दुर्घटना में पीछे की सीट के यात्रियों को गंभीर चोट लग सकती है।
लेकिन कई लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इसीलिए केंद्र सरकार ने नए नियम को अनिवार्य करने की योजना बना रही है। केंद्र सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में होने वाले नुकसान को रोकने के लिए कार निर्माताओं को रियर सीट बेल्ट अलार्म लगाने का निर्देश दिया है।
यदि पीछे बैठे यात्री ने सीट बेल्ट नहीं पहना है, तो यह सुविधा अलार्म बजाती है। इसलिए पीछे की सीट पर बैठे यात्रियों को सीट बेल्ट अवश्य लगाना चाहिए।केंद्र सरकार ने ऑटो निर्माताओं से कहा कि 1 अप्रैल 2025 से बनने वाली कारों में यह फीचर जरूर शामिल होना चाहिए।
रियर सीट बेल्ट से कम होगी दुर्घटना: सरकार को उम्मीद है कि इस नियम से वाहन दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या में कमी आएगी। साथ ही गंभीर रूप से घायल लोगों की संख्या में कमी आने की संभावना है। परिणामस्वरूप सड़क सुरक्षा की दिशा में व्यापक सुधार होगी।


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