Report में खुलासा: पुरानी बसों को इलेक्ट्रिक बनाकर बचत करें पैसा और प्रदूषण, नए रोजगार भी होंगे पैदा!

Primus Partners और EGROW फाउंडेशन द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन में भारत में डीजल बसों को इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणाली (Electric propulsion systems) में बदलने के लाभों पर गहनता से चर्चा की गई है। अध्ययन में बताया गया है कि रेट्रोफिटिंग (Retrofitting) से कार्बन उत्सर्जन को काफी कम किया जा सकता है व शहरी परिवहन को और अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है।

इस अध्ययन का शीर्षक "इंटर-सिटी डीजल पैसेंजर बसों की रेट्रोफिटिंग: एक आर्थिक विश्लेषण और नीति निर्देश" रखा गया था। इस अध्ययन में कई बातें सामने आई हैं जिसको अपनाकर बहुत हद तक शहरी परिवहन को पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकता है।

Private bus

डीजल बसों में रेट्रोफिटिंग के लाभ: इस अध्ययन में बताया गया है कि बदले हुए इंजन वाली बसों (रेट्रोफिटेड बसों) को चलाने और बनाए रखने का खर्च, पारंपरिक बसों और नई इलेक्ट्रिक बसों की तुलना में काफी कम होगा।

साथ ही यह रिपोर्ट डीजल से चलने वाली बसों को फिर से तैयार करने के आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों को उजागर करती है। रिपोर्ट के अनुसार, 9 मीटर की बस पर किए गए बदलाव (रेट्रोफिट) से प्रति किलोमीटर चलने की लागत में लगभग 34.48% की कमी आती है।

Private bus

अगर भारत हर साल 20,000 बसों को भी इस तरह से बदल देता है तो यह लगभग 500,000 टन डीजल बचा सकता है और हर साल कच्चे तेल के आयात को 12.7 मिलियन बैरल कम कर सकता है।

इतना ही नहीं इससे यह उद्योग 2047 तक भारत के 30-35 मिलियन नए हरित रोजगार पैदा करने के लक्ष्य में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। ऐसे में ये पर्यावरणीय लाभों के साथ-साथ नए रोजगार पैदा करने में भी मददगार साबित हो सकता हैं।

Private bus

रेट्रोफिटिंग को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत सिफारिशें: रेट्रोफिटिंग को अपनाने में तेजी लाने के लिए, रिपोर्ट में कई नीतिगत उपायों को अपनाने का सुझाव दिया गया है। जिसमें ट्रायल प्रोग्राम चलाना ताकि रेट्रोफिटिंग की प्रक्रिया को परखा और बेहतर बनाया जा सके।

इसके अलावा, इसमें वाहन स्क्रैपेज पॉलिसी में बदलाव कर रेट्रोफिटेड बसों को लंबे समय तक चलाने की अनुमति देना, सब्सिडी और खास वित्तीय योजनाएं देना, रेट्रोफिटिंग तकनीक और इलेक्ट्रिक बैटरी पर रिसर्च को बढ़ावा देना और FAME III नीति में रेट्रोफिटिंग को प्रोत्साहन देना शामिल है।

भारत के स्थायी भविष्य में रेट्रोफिटिंग की भूमिका: रेट्रोफिटिंग को अपनाना भारत के लिए कार्बन उत्सर्जन को कम करने, आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है क्योंकि यह एक स्वच्छ, अधिक स्थायी भविष्य की ओर बढ़ रहा है।

ड्राइवस्पार्क की राय: डीजल बसों को इलेक्ट्रिक पावरट्रेन (Retrofitting Diesel Buses) से बदलना एक शानदार पहल होगी। क्योंकि इससे न केवल धुंआ में कमी आयेगी, बल्कि पूरी तरह से नए वाहनों के निर्माण से होने वाले सामूहिक प्रदूषण से भी बचा जा सकेगा।

More from Drivespark

Article Published On: Monday, July 1, 2024, 15:11 [IST]
English summary
New study shows retrofitting diesel buses saves money and cuts pollution
Read more on #auto news #india
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+