कार खरीदते समय यह पता कर लें कि उसमें यह डिवाइस है या नहीं, सरकार इसे कभी भी अनिवार्य कर सकती है...
भारत दुनिया में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाओं वाले देशों में से एक है। दैनिक दुर्घटनाओं का प्रतिशत धीरे-धीरे बढ़ रहा है जो थोड़ा परेशान करने वाला है। देश में वाहनों की संख्या भी दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। इसलिए दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं। दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ती जा रही है।
लेकिन, सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में भारत का रिकॉर्ड सबसे खराब में से एक है। ऐसे में सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता। भारत में सड़क दुर्घटनाओं के कई कारण हैं। नशा, नींद, तेज़ गति से गाड़ी चलाना, सड़क पार करना मुख्य जोखिम कारण हैं।

चाहे राजमार्ग हों या छोटी गलियां, ऐसे लोग हैं जो बहुत तेज़ गाड़ी चलाते हैं। दुनिया भर की सड़कों पर तेज़ रफ़्तार गाड़ी चलाना अब धीरे-धीरे खतरा बनता जा रहा है। भारत का हाल भी कुछ ऐसा ही है।
भारत में तेज गति को अक्सर दुर्घटनाओं के सबसे बड़े कारकों में से एक के रूप में देखा जाता है। इसलिए देश में बिकने वाली लगभग सभी नई कारों में अब ड्राइवर थकान अलर्ट जैसी स्पीड अलर्ट सिस्टम कारों में मानक के रूप में दिया जाने लगा हैं।

इस सिस्टम के लगने से यदि कार 80 किमी प्रति घंटे से अधिक चलती है तो ड्राइवर को सचेत करने के लिए एक बीप बजती है। वहीं अगर आप भारतीय मोटर वाहन अधिनियम के तहत 120 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति सीमा को पार करते हैं, तो बीप लगातार बजती रहेगी।
इसे इस तरह से विकसित किया गया है कि गाड़ी तेज रफ्तार होने पर सिर्फ बीप की आवाज ही नहीं आती बल्कि इंफोटेनमेंट स्क्रीन पर भी ओवर स्पीड चेतावनी का संदेश दिखाई देगा। इस तकनीक को इंटेलिजेंट स्पीड असिस्ट (ISA) कहा जाता है।

इस तकनीक की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह उस सड़क के आधार पर काम करती है जिस पर कार चल रही है। यानी यह सड़क के प्रकार और उसकी गति सीमा के अनुसार खुद को समायोजित कर लेती है।
उदाहरण के लिए, शहर के भीतर कार की अधिकतम गति केवल 50 किमी प्रति घंटा है। यह राजमार्गों पर अधिकतम 120 किमी प्रति घंटे की गति तक पहुंच सकता है।
इसके लिए इस टूल के साथ एक कैमरा भी लगाया गया है। साथ ही यह टूल जीपीएस पर सरकार द्वारा निर्धारित गति सीमा की जानकारी के साथ काम करता है।
मतलब आपके गाड़ी पर लगा हुआ कैमरा और जीपीएस का डेटा मिलकर यह बता सकता है कि आप कितनी तेजी से गाड़ी चला रहे हैं। सरकार ने हर सड़क के लिए गति सीमा तय की है। यह तकनीक यह जांचती है कि आप गति सीमा का पालन कर रहे हैं या नहीं।
अन्य देशों में, ISA डिवाइस में आवाज और वीडियो अलर्ट भी शामिल होते हैं जो आपको गति सीमा पार करने पर चेतावनी देते हैं। गाड़ियों में ISA लगाने से सड़क दुर्घटनाएं कम होने की संभावना हैं। लेकिन अभी तक यह भारत में अनिवार्य नहीं है।
वहीं जुलाई से यूरोप में सभी नई गाड़ियों में ISA लगाना अनिवार्य किया जा रहा है। अमेरिका की एक बीमा कंपनी के अध्ययन में पता चला है कि 60% लोग अपनी गाड़ियों में ISA चाहते हैं। ऐसे में भारत भी अब इस ओर कदम उठा रहा है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि ISA डिवाइस को अनिवार्य बनाने से सड़क सुरक्षा बढ़ सकती है, खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां लोगों को महानगरीय शहरों की तुलना में गति सीमा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं हो पाती है।
ड्राइवस्पार्क की राय: भारत सरकार सड़क सुरक्षा और सड़क की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। ऐसे में अगर जल्द ही ISA डिवाइस भारत में अनिवार्य कर दिया जाएं तो इसमें आश्चर्य नहीं होगा। इससे ओवरस्पीड से होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आ सकती हैं।


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