कार खरीदते समय इन सेफ्टी फीचर्स का जरुर रखें ध्यान, वरना बाद में हो सकता है बड़ा नुकसान!
Car Safety Features: कार खरीदते समय अक्सर लोग मॉडल, कलर और डिजाइन देखकर कार का चुनाव करते हैं। लेकिन इसके साथ-साथ हमें कार की सेफ्टी फीचर्स पर भी ध्यान देना चाहिए। सरकार भी वाहन निर्माताओं को अपने वाहनों को सुरक्षित बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
साथ ही खरीदारों को सुरक्षित कार के महत्व के बारे में जागरूक कर रही है। सेफ्टी फीचर्स वाली कार दुर्घटना की स्थिति में आपकी जान बचा सकती है। हालांकि हर कार में एडवांस सेफ्टी फीचर नहीं होते लेकिन उनमें से कुछ आवश्यक सेफ्टी फीचर आपकी कार में जरूर होने चाहिए।

1. Airbags : एयरबैग कार की सबसे जरुरी सेफ्टी फीचर है। जब भी आप कार खरीदने जाएं तो ये जरूर चेक करें की गाड़ी में कितने एयरबैग्स हैं। एयरबैग आपको दुर्घटना की स्थिति में बचाने का काम करता है।
जैसे ही आपके कार को तेज टक्कर लगती है, वैसे ही एयरबैग्स खुल जाते हैं, जिससे आपको कम चोट लगती है। कार में डुअल फ्रंट एयरबैग मौजूद होने चाहिए, कम से कम 6 एयरबैग (साइड और पर्दे सहित) वाला मॉडल खरीदने की सलाह दी जाती है।

2. Anti-lock Braking System (ABS): ABS कार के ब्रेकिंग सिस्टम को बेहतर बनाते हैं। अगर किसी सिचुएशन में अचानक ब्रेक मारना पड़ जाता है, जिसकी वजह से कार अपना बैलेंस खो देती है।
जिससे दुर्घटना होने की संभावनाएं बढ़ जाती है। ऐसे में ये एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम पहियों को लॉक कर देता है, जो कार को फिसलने से बचाता है। इससे कार का बैलेंस भी कंट्रोल रहता है।

3. Electronic Stability Control (ESC) : यह फीचर कार के स्टीयरिंग व्हील एंगल के साथ-साथ उसके अलग-अलग व्हील रोटेशन पर भी नजर रखता है। जब आप गाड़ी चला रहे होते हैं और अचानक मोड़ देते हैं या अचानक ब्रेक लगाना पड़ जाता है।
तब ऐसे में ये गाड़ी के अलग-अलग पहियों पर एक सामान ब्रेक न लगाकर, जरुरत के मुताबिक कम ज्यादा ब्रेक लगाकर गाड़ी को फिसलने से बचा लेता है। इससे दुर्घटनाओं से बचने में मदद मिलती है।

4. Tyre Pressure Monitoring System (TPMS): कार के चारों टायरों में सटीक हवा का दबाव वाहन की स्थिरता और बेहतर संचालन के लिए महत्वपूर्ण है। टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (टीपीएमएस) टायर में हवा के प्रेशर को चेक करता रहता है।
यह सिस्टम कार के टायर में हवा को मेंटेन रखने में मदद करता है। टायर में हवा कम रहने से यह सिस्टम ड्राइवर को अलर्ट भेज देता है। जिससे की किसी प्रकार के अनहोनी की संभावना खत्म हो जाती है।

5. Blind Spot Detection: ब्लाइंड स्पॉट सड़क के वे हिस्सें होते हैं जो विभिन्न कारणों से ड्राइव को दिखाई नहीं देते हैं। ड्राइव करते समय अगर सड़क पर ब्लाइंड स्पॉट न दिखे तो यह एक्सीडेंट की वजह बन सकता है।
सड़क पर ब्लाइंड स्पॉट डिटेक्ट करने के लिए कार में सेंसर लगाए जाते हैं। कोई भी खतरा महसूस होने पर यह सिस्टम ड्राइवर को अलर्ट भेज देता है। जिससे वाहन और उसमें बैठे लोगों की सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिलती है।

6. 360 Degree Camera : 360 डिग्री कैमरा सेटअप गाड़ी के अलग अलग हिस्सों में कुछ कैमरा एक सॉफ्टवेयर के जरिए एक दूसरे से कनेक्टेड होते हैं। ये कैमरे कार के चारों ओर की स्थिति को एक सिंगल स्क्रीन डिस्प्ले करता है।
जिसकी मदद से ड्राइविंग सीट पर बैठे व्यक्ति को खासकर ट्रैफिक जैसी स्थिति में गाड़ी को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद करता है। आमतौर पर 360 डिग्री कैमरा सेटअप में कम से कम 4 कैमरे होते हैं।

7. Hill Assist Control : यह सिस्टम कठिन और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में ड्राइविंग को आसान बनाता है और यह एक सुरक्षित ड्राइविंग कंडिशन तैयार करता है। खासकर नए ड्राइवरों के लिए यह काफी उपयोगी है।
जब आप ढलान वाली जगह से गाड़ी चलाना शुरू करते हैं तो आप क्लच और ब्रेक को छोड़ते हैं और फिर से एक्सीलेटर दबाते हैं। ऐसे में आपकी कार पीछे जा सकती है। हिल होल्ड कंट्रोल फीचर कार को पीछे जाने से रोकने में मदद करता है।

8. ISOFIX माउंट: यह एक ऐसा सिस्टम है जिसके माध्यम से छोटे बच्चों के लिए एक अलग सीट को कार में लगाया जाता है। हांलाकि ये फीचर मौजूदा प्रीमियम कारों में दी जा रही है।
लेकिन आप इसे अपने पुराने मॅाडलों में भी इंस्टॉल करा सकते हैं। इसे इंस्टॉल करना और बाहर निकालना दोनों ही आसान प्रक्रिया है। इससे दुर्घटना के दौरान बच्चे को चोट लगने की संभावना कम हो जाती है।


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