मारुति अल्टो के10 व वैगन आर सेफ्टी में साबित हुई फिसड्डी, जानें कितनी मिली रेटिंग
ग्लोबल एनसीएपी ने हाल ही में मारुति सुजुकी को दो कारों को टेस्ट किया हैं जिन्हें वर्तमान में भारतीय बाजार में बेचा जाता है। ग्लोबल एनसीएपी ने मारुति अल्टो के10 व मारुति वैगन आर को टेस्ट किया है और दोनों ही सेफ्टी में फिसड्डी साबित हुई है।
बात करें मारुति अल्टो के10 की तो इसे एडल्ट सेफ्टी में सिर्फ 2-स्टार व 34 में सिर्फ 21.67 अंक प्राप्त हुए है। वहीं चाइल्ड सेफ्टी में 49 में से सिर्फ 3.52 अंक प्राप्त हुई है और सिर्फ शून्य स्टार प्राप्त हुए है। इसके नए मॉडल को टेस्ट किया गया है।

मारुति अल्टो के10 ने क्रैश टेस्ट के दौरान स्थिर स्ट्रक्चर पाया है, वहीं सामने से हुए इम्पैक्ट में सर से लेकर छाती तक अच्छा प्रोतेक्शन मिला है। वहीं साइड से हए इम्पैक्ट पर छाती पर प्रोटेक्शन बहुत कमजोर रहा है। ऐसे में यह कार असुरक्षित मानी जाती है।
वहीं मारुति वैगन आर की बात करें तो इसे एडल्ट सेफ्टी में सिर्फ 1-स्टार व 34 में सिर्फ 19.69 अंक प्राप्त हुए है। वहीं चाइल्ड सेफ्टी में 49 में से सिर्फ 3.40 अंक प्राप्त हुई है और सिर्फ शून्य स्टार प्राप्त हुए है।

ग्लोबल एनसीएपी ने पाया कि वैगन आर में ड्राईवर की छाती का प्रोटेक्शन कमजोर है। मारुति ने इन कारों में चाइल्ड रिस्त्रेंट सिस्टम नहीं दिया है। सभी सीटिंग पोजिशन में थ्री-पॉइंट सीटबेल्ट की कमी की वजह से भी चाइल्ड प्रोटेक्शन में दोनों मॉडल्स को शून्य अंक मिलें हैं।
ग्लोबल एनसीएपी के सेक्रेटरी जनरल ने कहा कि, भारत में बेचें जानी वाली नई मॉडल्स में छह एयरबैग अनिवार्य होने के बावजूद, ग्लोबल एनसीएपी के लिए यह चिंता का विषय है कि मारुति सुजुकी ने इस अनिवार्यता को ग्राहकों को विकल्प के रूप में भी उपलब्ध नहीं कराया है।
मारुति अल्टो के10 में फ्रंट प्रोटेक्शन के लिए फ्रंट एयरबैग, बेल्ट प्रीटेंशनर, बेल्ट लोडलिमिटर दिया गया है, इसमें नी एयरबैग नहीं दिया गया है। इसके साथ ही साइड प्रोटेक्शन के लिए कोई फीचर्स नहीं दिए गये हैं, इसके अलावा इसमें सीट बेल्ट रिमाइंडर दिया गया है।
वहीं मारुति वैगन आर में फ्रंट प्रोटेक्शन के लिए फ्रंट एयरबैग, बेल्ट प्रीटेंशनर, बेल्ट लोडलिमिटर दिया गया है, इसमें नी एयरबैग नहीं दिया गया है। इसमें भी सीट बेल्ट रिमाइंडर के अतिरिक्त कोई अन्य सेफ्टी फीचर्स नहीं दिए गये हैं।
ग्लोबल एनसीएपी के अपडेटेड क्रैश टेस्ट प्रोटोकॉल के अंतर्गत फ्रंट व साइड इम्पैक्ट तथा इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोटेक्शन व पेडेस्ट्रियन प्रोटेक्शन शामिल है। वहीं अधिक रेटिंग के लिए साइड इम्पैक्ट पोल प्रोटेक्शन भी शामिल है।


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