एमयूवी व एक्सयूवी की कीमत में हो सकती है वृद्धि, जीएसटी परिषद की बैठक में होगा फैसला
जीएसटी परिषद जल्द ही मल्टी यूटिलिटी व्हीकल्स (एमयूवी) व क्रॉसओवर यूटिलिटी व्हीकल्स (एक्सयूवी) की परिभाषा को साफ करने वाली है ताकि 28% जीएसटी के ऊपर 22% कॉम्पनसेशन सेस लगाया जा सके। यह बहुत ही बड़ा झटका हो सकता हो।
जीएसटी परिषद अपनी अगली मीटिंग में इस बात को साफ करने वाली है जो कि 11 जुलाई को होगी। फिटमेंट कमेटी ने जीएसटी परिषद को कहा है कि एमयूवी व एक्सयूवी को परिभाषित करें ताकि जीएसटी लगाया जा सके।

कमेटी ने कहा कि सभी यूटिलिटी वाहन, चाहे उनका कोई भी नाम हो, पर 22% सेस लगाया जाए अगर वह तीन पैरामीटर - लंबाई 4 मीटर से अधिक, 1500सीसी से अधिक इंजन क्षमता तथा ग्राउंड क्लियरेंस 170मिमी से अधिक हो, पूरा करते हो।
पिछले साल जीएसटी परिषद, जिसमें केंद्रीय वित्त मंत्री तथा राज्यों के वित्त मंत्री शामिल होते है, ने दिसंबर में एसयूवी की परिभाषा साफ की थी। उसी समय, कुछ राज्यों ने एमयूवी की भी परिभाषा साफ करने की बात कही थी।

इस कदम का सीधा-सीधा मतलब यह होगा कि टोयोटा इनोवा जैसे वाहन महंगे हो सकते है क्योकि इनपर 22% अतिरिक्त सेस लगाया जाएगा और कंपनियां इस प्रभाव को कम करने के लिए वाहन की कीमत में वृद्धि कर सकती है।
यह सीधे रूप से ग्राहकों को प्रभावित करेगा। ऐसे में एमयूवी की बिक्री प्रभावित होगी। पिछले कुछ वर्षों में इस सेगमेंट की बिक्री में वृद्धि हुई है और बहुत सी कंपनियों ने इस सेगमेंट में प्रवेश किया है जिसमें किया तथा मारुति सुजुकी भी शामिल है।

दिसंबर 2022 मीटिंग के बाद जीएसटी परिषद ने कहा था कि एक मोटर वाहन पर 22% कॉम्पनसेशन सेस लगाया जाएगा अगर वह चार कंडीशन को पूरा करती है। पहला कि वह एसयूवी के नाम से जानी जाती हो, दूसरी इंजन क्षमता 1500सीसी से अधिक हो।
तीसरा यह कि इसकी लंबाई 4000मिमी से अधिक हो तथा चौथा कि इसका ग्राउंड क्लियरेंस 170 मिमी या उससे अधिक हो। इसका मतलब यह है कि एसयूवी पर 28% जीएसटी व 22% कॉम्पनसेशन लगेगा लेकिन एमयूवी के लिए ऐसा नहीं है।
एमयूवी जिनकी इंजन क्षमता 1500सीसी से कम हो, उसपर 28% जीएसटी तथा 15% सेस लगेगा, जिनकी इंजन क्षमता 1500सीसी से अधिक हो, लेकिन एसयूवी के पैरामीटर में ना हो, उसपर 28% जीएसटी तथा 20% सेस लगेगा।
अभी तक इस पर ऑटोमोबाइल निर्माताओं की तरफ से कोई बयान नहीं आया है लेकिन 11 जुलाई को मीटिंग के बाद बयान सामने आ सकते हैं। अब देखना होगा यह निर्णय ऑटो इंडस्ट्री को किस तरह व कितना प्रभावित करती है।


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