पुराने और नए ग्लोबल एनसीएपी क्रैश टेस्ट में क्या है अंतर, जानिए विस्तार से

ग्लोबल एनसीएपी ने हाल ही में वोक्सवैगन ताइगुन और स्कोडा कुशाक एसयूवी की सुरक्षा रेटिंग जारी की, जिनका परीक्षण नए क्रैश टेस्ट प्रोटोकॉल के तहत किया गया था। ये नए प्रोटोकॉल जुलाई 2022 से लागू हुए हैं, लेकिन इसमें 5 स्टार स्केल पहले ही जैसा है। तो आखिर इसमें नया क्या है और नई प्रणाली पिछली से कितनी अलग है? इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

ग्लोबल एनसीएपी पुराना प्रोटोकॉल

ग्लोबल एनसीएपी पुराना प्रोटोकॉल

पुराने ग्लोबल एनसीएपी में केवल एक फ्रंटल क्रैश टेस्ट के आधार पर वाहनों का मूल्यांकन किया जाता था। जिसे (फ्रंट) ऑफसेट डिफॉर्मेबल बैरियर (ODB) टेस्ट कहा जाता है, इसमें एक वाहन को 64 किलोमीट प्रति घंटे की रफ्तार पर 40 प्रतिशत ओवरलैप के साथ एक डिफॉर्मेबल बैरियर क्रैश कराया जाता है।

पुराने और नए ग्लोबल एनसीएपी क्रैश टेस्ट में क्या हुआ बदलाव, जानिए विस्तार से

इसकी रीडिंग को कार के अंदर रखे टेस्ट डमी से लिया जाता था। इसमें एक अडल्ट सुरक्षा के लिए और दूसरा बच्चों की सुरक्षा के लिए होता था। परिणामों ने अडल्ट की सुरक्षा के लिए 16 और बच्चों की सुरक्षा के लिए 49 पॉइंट तक स्कोर दिया जाता था। वहीं साइड इफेक्ट टेस्ट उन वाहनों पर किया जाता जो खुद से फाइव स्टार स्कोर पाने के लिए पेश होते थे।

ग्लोबल एनसीएपी नया प्रोटोकॉल

ग्लोबल एनसीएपी नया प्रोटोकॉल

फ्रंटल क्रैश टेस्ट में गति और ऑफसेट प्रतिशत समान रहता है, इसलिए ग्लोबल एनसीएपी ने क्रैश टेस्ट डमी पर अब चेस्ट लोड रीडिंग की गणना करता है। साइड इफेक्ट टेस्ट की बात करें तो, नए प्रोटोकॉल के तहत, यह टेस्ट अब अनिवार्य है। हालांकि, अगर कोई वाहन फ्रंटल क्रैश टेस्ट में शून्य स्टार प्राप्त करता है, तो ग्लोबल एनसीएपी उस वाहन पर साइड-इफेक्ट टेस्ट नहीं करेगा।

पुराने और नए ग्लोबल एनसीएपी क्रैश टेस्ट में क्या हुआ बदलाव, जानिए विस्तार से

इसके अलावा, पिछले प्रोटोकॉल में, साइड इफेक्ट परीक्षणों के लिए चाइल्ड डमी की जरूरत नहीं थी लेकिन अब अनिवार्य है। स्कोर की बात करें तो वयस्क सुरक्षा स्कोर अधिकतम 34 अंक (फ्रंट क्रैश टेस्ट के लिए 16 अंक, साइड इफेक्ट टेस्ट के लिए 16 अंक और सीट बेल्ट रिमाइंडर के लिए दो अंक) है।

पुराने और नए ग्लोबल एनसीएपी क्रैश टेस्ट में क्या हुआ बदलाव, जानिए विस्तार से

खासतौर से, प्रत्येक सीटबेल्ट रिमाइंडर को ग्लोबल एनसीएपी से 0.5 अंक मिलते हैं, जिसमें अधिकतम दो अंक होते हैं। हालांकि, किसी भी कार के लिए इन पॉइंट को हासिल करने के लिए, सभी सीटों पर सीटबेल्ट रिमाइंडर होना चाहिए।

नए नियम के तहत 5-स्टार रेटिंग ये शर्तों हैं जरूरी

नए नियम के तहत 5-स्टार रेटिंग ये शर्तों हैं जरूरी

पोल साइड इफेक्ट: नया प्रोटोकॉल पोल टेस्ट के साथ गणना किए गए साइड हेड इफेक्ट को भी ध्यान में रखता है, जिसे पिछले प्रोटोकॉल ने ध्यान में नहीं रखा गया था। पोल प्रभाव के लिए परीक्षण किए जाने वाले वाहन के लिए, ग्लोबल एनसीएपी इसे किसी प्रकार की हेड प्रोटेक्शन सिस्टम के लिए अनिवार्य करता है।

ईएससी की जरूरत

ईएससी की जरूरत

5 स्टार रेटिंग के लिए, ग्लोबल एनसीएपी ने इलेक्ट्रॉनिक स्थिरता नियंत्रण (ESC) को भी अनिवार्य कर दिया है। प्रोटोकॉल में कहा गया है कि कारों में ईएससी दो गुना होना चाहिए - चाहे वह वाहन के बेस्टसेलिंग वैरिएंट में हो या अन्य वैरिएंट में हो। उदाहरण के लिए, यदि सबसे अधिक बिकने वाला वर्जन प्रति माह 100 यूनिट बेचता है, तो ईएससी उस वर्जन में मानक फिटमेंट होना चाहिए या अन्य सभी वैरिएंट की 100 यूनिट्स में एक साथ रखा जाना चाहिए।

पैदल चलने वालों की सुरक्षा

पैदल चलने वालों की सुरक्षा

यूएन 127 या जीटीआर9 के अनुसार 5-स्टार रेटिंग के लिए, नए प्रोटोकॉल में पैदल यात्री की सुरक्षा को भी मानक फिटमेंट भी जरूरी होती है और कार्यक्षमता प्रदर्शित करने के लिए कार निर्माताओं को यह सत्यापन प्राप्त करना होगा और एक पास/असफल परिणाम दिखान होगा।

सीट बेल्ट रिमाइंडर

सीट बेल्ट रिमाइंडर

कारों को फाइव स्टार रेटिंग के लिए, कार को सीट बेल्ट रिमाइंडर के लिए कम से कम एक अंक मिलना जरूरी है।

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What are the differences between new and old gncap crash test protocols details
 
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