भारत बनेगा वाहन स्कैपिंग का केंद्र, 150 किलोमीटर के दायरे में खुलेगा एक स्क्रैपिंग सेंटर
केंद्र सरकार अब हर शहर के 150 किलोमीटर के दायरे में एक वाहन स्क्रैपिंग यूनिट खोलने की योजना बना रही है। हाल ही में एक सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि उनकी योजना भारत को दक्षिण एशिया का वाहन स्क्रैपिंग हब (केंद्र) बनाने की है। इसके लिए देश के प्रमुख शहरों में 150 किलोमीटर के दायरे में एक स्क्रैपिंग सेंटर खोलने का लक्ष्य रखा गया है।

गडकरी ने कहा कि ऑटोमोबाइल और ट्रांसपोर्ट उद्योग को विकास के केंद्र में रखते हुए वाहन स्क्रैपिंग नीति भारत सरकार की एक दूरगामी योजना है। इससे देश में पुराने और खराब वाहनों को हटाने के साथ कम उत्सर्जन करने वाले नए वाहनों को शामिल किया जाएगा। गडकरी ने कहा कि वाहन स्क्रेपिंग नीति सभी तरह के छोटे-बड़े निवेशकों को एक तय नियम के अनुसार देश में स्क्रैपिंग प्लांट लगाने की अनुमति देती है।

वाहन स्क्रैपिंग प्लांट के शुरू होने से कई शहरों में कलेक्शन सेंटर भी शुरू होंगे जो लोगों से पुराने वाहनों को लेंगे और उनके वाहनों को डी-रजिस्टर करने के साथ उन्हें डिपाॅजिट सर्टिफिकेट भी जारी करेंगे। केंद्रीय मंत्री गडकरी ने बताया कि शहरों में स्क्रैपिंग सेंटर के खुलने से 2025 तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 5 करोड़ लोगों को रोजगार मिलेगा।

सरकार की योजना विदेशों से भी स्क्रैप वाहनों को आयात करने की है। गडकरी ने कहा कि हम म्यांमार, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव्स, नेपाल और श्रीलंका से स्क्रैप वाहनों को भारत के स्क्रैपिंग प्लांट में भेज सकते हैं। गडकरी ने कहा कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा सही ही देश की अर्थव्यवस्था को भी आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

बता दें कि केंद्र सरकार ने पिछले साल अगस्त में वाहन स्क्रैपिंग नीति की घोषणा की थी। देश में प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को व्यवस्थित ढंग से कबाड़ करने के लिए वाहन स्क्रैपिंग नीति लाई गई है। इस नीति को 1 अप्रैल 2022 से लागू कर दिया गया है। यह एक महत्वपूर्ण नीति है क्योंकि पुराने वाहन फिट वाहनों की तुलना में 10-12 गुना अधिक पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं।

राज्य और केंद्र शासित सरकारें 1 अप्रैल, 2022 से पुराने वाहन को स्क्रैप कराने के एवज में नए वाहन के रोड टैक्स पर 25 प्रतिशत की छूट दे रही हैं। अब प्राइवेट वाहनों को 20 साल और कमर्शियल वाहनों को 15 साल में फिटनेस टेस्ट करना अनिवार्य होगा।

मौजूदा समय में, देश में लगभग 51 लाख ऐसे हल्के मोटर वाहन हैं जो 20 साल से ज्यादा पुराने हैं और 34 लाख हल्के मोटर वाहन हैं जो 15 साल से ज्यादा पुराने हैं। इसके अलावा, लगभग 17 लाख मध्यम और भारी वाणिज्यिक वाहन है जो 15 वर्ष से अधिक पुराने हैं और बिना वैध फिटनेस प्रमाण पत्र के चलाये जा रहे हैं।

बता दें कि 1 अप्रैल 2022 से केंद्र सरकार 15 साल से ज्यादा पुराने निजी और वाणिज्यिक वाहनों पर री-रजिस्ट्रेशन के शुल्क को बढ़ाने जा रही है। अब 15 साल से जयदा पुराने वाहन के री-रजिस्ट्रेशन के लिए आठ गुना अधिक शुल्क का भुगतान करना होगा। हालांकि, इस नीति का दिल्ली के वाहन मालकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दिल्ली एनसीआर में पहले से ही 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से जयदा पुराने पेट्रोल वाहनों को चलाने पर रोक है।


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