बीएस-3 और बीएस-4 इंजन वाले पुराने ट्रकों की मांग बढ़ी, नए ट्रकों के कल-पुर्जों की हुई कमी
भारत पुराने वाहनों का एक बड़ा बाजार है। पुराने निजी वाहनों के अलावा, देश में पुराने व्यावसायिक वाहनों की भी भारी डिमांड है। जब बात पुराने ट्रकों की आती है तो इस श्रेणी में पुराने बीएस4 ट्रक पुराने बीएस6 ट्रकों को बिक्री में मात दे रहे हैं। यूज्ड ट्रक बाजार में बीएस6 ट्रकों के कल-पुर्जों की कमी के कारण इनकी बिक्री कम हो रही है।

इकोनॉमिक टाइम्स ऑटो की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पुराने ट्रकों के बाजार में बीएस3 और बीएस4 ट्रकों का कब्जा है। यह इसलिए क्योंकि बीएस3 और बीएस4 ट्रकों के कल-पुर्जे आसानी से उपलब्ध हैं और इनकी मरम्मत का खर्च कम है। वहीं दूसरी ओर, पुराने बीएस-6 ट्रकों के कल-पुर्जों की बाजार में कमी है जिसके चलते पुराने ट्रकों के ग्राहक बीएस-6 ट्रकों को खरीदने से परहेज करते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पुराने ट्रकों में 90 प्रतिशत बीएस-3 और बीएस-4 इंजन के होते हैं। इन ट्रकों के पुर्जे आसानी से उपलब्ध होते हैं और इनकी मरम्मत भी किफायती होती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि बीएस-6 ट्रकों की मांग सेकंड हैंड ट्रक बाजार में कुछ सालों से कम है। यह इसलिए क्योंकि कंपनियां बीएस-6 ट्रकों के कल-पूर्जे का उत्पादन सीमित तरीके से कर रही हैं। इसके चलते बीएस-3 और बीएस-4 ट्रकों की तुलना में बीएस-6 ट्रकों के कल पुर्जे महंगे हो गए हैं।

भारत में कोरोना महामारी का प्रभाव कम होने के बाद आर्थिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। इसका सीधा फायदा व्यवसायिक वाहन उद्योग को भी हो रहा है। पिछले कुछ महीनों के दौरान यात्री वाहनों की बिक्री में उतार चढ़ाव जारी है, लेकिन व्यावसयिक वाहन खंड अपनी रफ्तार को बनाए हुए है।

व्यवसायिक वाहन खंड में भारी मांग के कारण पुराने टिपर और भारी व्यवसायिक वाहनों की मांग में 15 प्रतिशत का उछाल आया है, जबकि हल्के व्यवसायिक वाहन खंड में पुराने वाहनों की मांग में 20-25 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, पुराने ट्रकों की ज्यादातर मांग छोटे कारोबारियों या ट्रांसपोर्ट कंपनियों से आ रही है। व्यवसायिक वाहन खंड में पुराने ट्रकों की मांग वित्तीय वर्ष 2021-2022 के दौरान 30 फीसदी तक बढ़ी है।


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