Toyota ने एक साल में बेच डाली 1.5 करोड़ कारें, Volkswagen को पछाड़ा
जापान की टोयोटा मोटर एक बार फिर दुनिया भर में सबसे ज्यादा कारों की बिक्री करने वाली कंपनी बन गई है। मीडिया को दी गई एक सूचना में कंपनी ने बताया कि उसकी बिक्री वर्ष 2020 के मुकाबले 2021 में 10.1 फीसदी बढ़कर 1.50 करोड़ यूनिट हो गई। कंपनी ने वर्ष 2020 में 90.50 लाख यूनिट वाहनों की बिक्री की थी। कार निर्माता ने बताया कि इस बिक्री में उसकी सहयोगी कंपनियां Daihatsu Motors और Hino Motors का भी योगदान है।

वहीं कार वैश्विक कार बिक्री में कभी नंबर 1 पर रहने वाली फॉक्सवैगन (Volkswagen) की बिकी पिछले साल घटकर 80.90 हजार यूनिट रही गई है, जो कि 2020 के मुकाबले 5 फीसदी कम है। बता दें कि पिछले साल से चल रहे सेमीकंडक्टर की कमी के चलते कार निर्माताओं को उत्पादन में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ा जिसका सीधा असर बिक्री पर देखा गया।

बता दें कि पांच साल पहले जर्मन कार निर्माता फॉक्सवैगन टोयोटा को बिक्री के मामले में पीछे छोड़कर सबसे अधिक कार बेचने वाली कंपनी बन गई थी। साल 2020 कई उद्योगों के समेत वाहन उद्योग के लिए भी निराशाजनक रहा। हालांकि, 2020 के अंत तक बाजार में वाहनों की मांग बढ़ने लगी जिससे बिक्री में एक बार फिर उछाल आ गया। ऐसे में टोयोटा अपने कारोबार को बढ़ाने और कारों की बिक्री को पटरी पर लाने में कामयाब रही।

टोयोटा की सहायक कार कंपनियां, लेक्सस, हीनो, और डायहात्सू ने भी जापानी कार प्रमुख की वैश्विक बिक्री को शीर्ष स्थान पर लाने में प्रमुख भूमिका निभाई। हालांकि, टोयोटा को पीछे छोड़ते हुए इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली कंपनी टेस्ला अब सबसे वैल्यूएबल कार कंपनी बन गई है।

जनवरी 2021 में इलेक्ट्रिक कार निर्माता टेस्ला के शेयर्स में भारी उछाल के बाद यह दुनिया की सबसे मूल्यवान कार कंपनी बन गई थी। पिछले साल चीन, अमेरिका और यूरोप में टेस्ला की कारों की बिक्री बढ़ी जिससे कंपनी के कारोबार में इजाफा हुआ।

हालांकि, टोयोटा भी बैटरी आधारित कारों का विकास में लगी है और अगले दो सालों में यूरोप और अमेरिका समेत एशियाई महाद्वीप के कई देशों में इलेक्ट्रिक कारों को उतारने की योजना बना रही है। टोयोटा ने बताया है बिक्री में 23 प्रतिशत हिस्सा इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों का है। दुनिया भर के कई देशों में स्वच्छ ऊर्जा के प्रति रुझान और उत्सर्जन के कड़े नियमों के वजह से इलेक्ट्रिक कारों की मांग में वृद्धि होने के आसार दिख रहे हैं और इसके लिए कंपनी खुद को तैयार कर रही है।

फिलहाल, वैश्विक ऑटोमोबाइल उद्योग इलेक्ट्रॉनिक माइक्रोचिप की कमी से जूझ रहा है। इससे टोयोटा भी अछूती नहीं है। माइक्रोचिप की कमी के कारण टोयोटा को पिछले साल गुआंजो और टेक्सस स्थित प्लांट में उत्पादन बंद करना पड़ा था। जानकारों के अनुसार, इस साल के अंत तक माइक्रोचिप की सप्लाई पहले की तरह हो सकती है।


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