न पेट्रोल, न डीजल! केवल हाइड्रोजन से चलती है ये कार, केरल के आरटीओ में रजिस्टर हुई पहली यूनिट
कुछ ही दिनों पहले परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली कार टोयोटा मिराई (Toyota Mirai) को लॉन्च किया था। अब देश में इस कार की बुकिंग और रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुकी है। हाल ही में एक नई टोयोटा मिराई का रजिस्ट्रेशन केरल के तिरुवनंतपुरम में किया गया है। जानकारी के मुताबिक, इस कार को हरे रंग का नंबर प्लेट दिया गया है। इसका रजिस्ट्रेशन नंबर 'KL 1 CU 7610' है। पंजीकरण बिना किसी कर के ऑनलाइन किया गया और सिर्फ रजिस्ट्रेशन फीस ही ली गई है।

फिलहाल यह कार आम जनता के लिए लॉन्च नहीं हुई है और अभी केवल शोध और विकास के उद्देश्य से लोगों को उपलब्ध कराई जा रही है। भारत में टोयोटा मिराई की कीमत 1.10 करोड़ रुपये (एक्स-शोरूम) तय की गई है। इसपर सरकारी सब्सिडी भी दी जा रही है, लेकिन इसका फायदा केवल विशेष उद्देश्य से खरीदे जाने वाले मॉडलों पर ही मिलेगा।

भारत में टोयोटा मिराई को इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (ICAT) द्वारा चलाए जा रहे पायलट प्रोजेक्ट के तहत लॉन्च किया गया है। यह पायलट परियोजना वैकल्पिक ईंधन के बारे में जागरूकता फैलाने पर केंद्रित है। भारत में हाइड्रोजन कारों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है, लेकिन हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली कारों को परिचालन में पूरी तरह उतारने में और समय लगने की संभावना है।

त्रावणकोर कोचीन केमिकल्स (TCC), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड और कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (CIAL) इस प्रक्रिया में शामिल हैं। KSRTC की भी हाइड्रोजन फ्यूल आधारित बसों में स्विच करने की प्रमुख योजनाएं बना रहा है। इसने 50 इलेक्ट्रिक बसों और 10 हाइड्रोजन बसों को खरीदने की योजना की घोषणा की है, इसके अलावा कुछ डीजल बसों को इलेक्ट्रिक से बदला गया है। यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल होता है तो हम जल्द ही भारतीय सड़कों पर हाइड्रोजन से चलने वाली बसें, ट्रक और अन्य भारी वाहन देख सकते हैं।

टोयोटा मिराई हाई प्रेशर हाइड्रोजन फ्यूल टैंक के साथ आती है। इस कार का इंजन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की प्रतिक्रिया से उत्पन्न ऊर्जा को बिजली में बदल देता है, जिससे कार में लगे इलेक्ट्रिक मोटर को ऊर्जा मिलती है। इस प्रतिक्रिया से भाप उत्पन्न होता है जो कार के एग्जॉस्ट पाइप से बाहर निकल जाता है। जानकारी के अनुसार, टोयोटा मिराई के हाइड्रोजन टैंक को केवल 5 मिनट में पूरी तरह भरा जा सकता है। फुल टैंक हाइड्रोजन पर यह 646 किलोमीटर तक चलाई जा सकती है।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, ग्रीन हाइड्रोजन द्वारा संचालित परिवहन भविष्य का एक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी विकल्प होने जा रहा है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाली कारों के अलावा, बस, ट्रक, जहाज, ट्रेन और मध्यम से लंबी दूरी के लिए चलने वाले वाहनों को भी लाने की योजना तैयार की गई है।

भारत में ग्रीन हाइड्रोजन नीति की घोषणा हो चुकी है जिसका उद्देश्य 2030 तक ग्रीन हाइड्रोजन के घरेलू उत्पादन को 5 मिलियन टन तक बढ़ाना है और भारत को स्वच्छ ईंधन के लिए एक निर्यात केंद्र बनाना है। ग्रीन हाइड्रोजन को पानी के इलेक्ट्रोलिसिस से तैयार किया जाता है। इसे प्राप्त करने के लिए सोलर या पवन बिजली का उपयोग करके पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है। इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में ऊर्जा की खपत होती है।


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