रूस-यूक्रेन युद्ध का वाहन कंपनियों पर पड़ रहा असर, होंडा के बाद टोयोटा ने रोका उत्पादन
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच टोयोटा मोटर्स ने अपने रूसी कारखाने में उत्पादन बंद करने की घोषणा की है। कंपनी ने शुक्रवार को कहा कि युद्ध के कारण आपूर्ति बाधित हो गई है जिसके चलते अनिश्चित समय के लिए उत्पादन रोक दिया गया है। बता दें कि अन्य जापानी निर्माताओं के जैसे ही टोयोटा ने भी उत्पादन बंद करने का कदम उठाया है। एक सूचना में कंपनी ने उपकरणों और अन्य कच्चे माल की आपूर्ति में हो रही कमी का हवाला दिया है।

पश्चिमी देशों की कुछ कंपनियों ने रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद रूस में निवेश समाप्त करने की चेतावनी दी है, जबकि इस मामले पर जापानी कंपनियों ने अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है। टोयोटा ने एक बयान में कहा, "दुनिया भर में हर किसी की तरह, टोयोटा यूक्रेन में चल रहे घटनाक्रम को यूक्रेन के लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता के साथ देख रही है और जल्द से जल्द शांति और सुरक्षा की वापसी की उम्मीद करती है।"

टोयोटा रूस का शीर्ष जापानी ब्रांड है, जो अपने सेंट पीटर्सबर्ग संयंत्र में लगभग 80,000 वाहनों का उत्पादन करती है। इस संयंत्र में 2,000 कर्मचारी कार्यरत हैं।अन्य जापानी ब्रांडों में, माजदा मोटर कॉर्प, जिसने पिछले साल रूस में 30,000 कारें बेचीं, ने कहा कि व्लादिवोस्तोक में कंपनी के संयुक्त उद्यम संयंत्र में उत्पादन को रोका जा रहा है। रूस पर प्रतिबंधों के परिणामस्वरूप संभावित आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों का हवाला देते हुए, मित्सुबिशी मोटर कॉर्प रूस में उत्पादन और बिक्री को निलंबित कर सकती है।

होंडा मोटर कंपनी ने कहा कि वाहनों की शिपिंग और भुगतान करने में कठिनाई के चलते रूस में कारों और मोटरसाइकिलों के निर्यात को निलंबित कर दिया गया है। 2020 के वित्तीय वर्ष में होंडा ने रूस में केवल 1,406 कारों की बिक्री की थी। 2021 में 53,000 वाहनों की बिक्री करने वाली निसान मोटर कंपनी ने कहा कि वह वहां की स्थिति की निगरानी करते हुए अभी रूस में परिचालन जारी रखे हुए है।

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार पर भी पड़ेगा असर
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध से सेमीकंडक्टर और अन्य जरूरी वाहन उपकरणों का संकट और गहरा सकता है। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि ऑटो उद्योग तांबे और सिलिकॉन जैसी आवश्यक वस्तुओं पर निर्भर है, इसलिए युद्ध के संकट का इस क्षेत्र पर अल्पकालिक प्रभाव पड़ेगा।

रूस पैलेडियम के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है जिसका उपयोग ऑटोमोटिव निकास प्रणाली में किया जाता है। मौजूदा हालातों में निश्चित रूप से कॉपर, पैलेडियम और अन्य जैसे धातुओं में कमोडिटी की कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जिससे ओईएम के लिए वाहन निर्माण की लागत बढ़ेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि रूस कच्चे तेल के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है, इसलिए मौजूदा संकट से कुछ दिनों में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं। जेपी मॉर्गन के एक विश्लेषण में कहा गया है कि तेल की कीमतों में 150 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से वैश्विक जीडीपी विकास दर घटकर सिर्फ 0.9 फीसदी रह जाएगी।

विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से वैश्विक जीडीपी पर प्रभाव पड़ता है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक एम के सुराणा के अनुसार, मौजूदा समय में प्रति दिन 9,00,000 बैरल कच्चे तेल की कमी है और निश्चित है कि आने वाले दिनों में रूस-यूक्रेन संकट कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित करेगा।


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