टोयोटा ने पेश की देश की पहली फ्लेक्स फ्यूल कार, इथेनाॅल से चलेगी, प्रदूषण भी होगा कम
टोयोटा ने आज (11 अक्टूबर) को देश में अपनी पहली फ्लेक्स फ्यूल कार को पेश कर दिया है। इस कार को खुद केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने पेश किया और इसकी सवारी भी की। टोयोटा ने कोरोला अल्टिस (Toyota Corolla Altis) सेडान को फ्लेक्स इंजन में उतारा है। यह फ्लेक्स फ्यूल और एक बैटरी सोर्स से चलने वाली हाइब्रिड कार है।

बता दें कि टोयोटा ने एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत फ्लेक्स इंजन वाली कोरोला अल्टिस को पेश किया है। भारत सरकार देश में कच्चे ईंधन के आयात को कम करने और वाहनों के होने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए हाइब्रिड और वैकल्पिक ईंधन वाहनों को बढ़ावा दे रही है। यह दूसरी बार है कि टोयोटा ने देश में वैकल्पिक ईंधन से चलने वाले वाहन को पेश किया है।

इससे पहले टोयोटा ने भारत में पूरी तरह हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाली कार टोयोटा मिराई (Toyota Mirai) को लॉन्च किया था। टोयोटा कोरोला अल्टिस की बात करें तो यह देश की पहली ऐसी कार है जो पेट्रोल, इथेनॉल और इलेक्ट्रिक से चलेगी।

इस कार में 1.8-लीटर का पेट्रोल-हाइब्रिड इंजन लगाया गया है 20 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग पर चल सकता है। यह फ्लेक्स इंजन 75.3 kW पॉवर और 142 एनएम पीक टॉर्क जनरेट करता है। कार के इंजन को 1.3 kWh के बैटरी पैक से भी जोड़ा गया है जिसका आउटपुट 53.7 kW पॉवर और 162.8 एनएम टॉर्क है। इसके इंजन को सीवीटी हाइब्रिड ट्रांसएक्सेल गियरबॉक्स से जोड़ा गया है।

देश के पहले फ्लेक्स-फ्यूल कार को पेश करते हुए केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, "एक तरह के ईंधन से चलने के बजाय फ्लेक्स फ्यूल कार 83 प्रतिशत तक इथेनॉल मिश्रित फ्यूल से चल सकती है। आपको बता दें कि केवल टोयोटा ही नहीं बल्कि अन्य कंपनियां भी भारत में फ्लेक्स इंजन वाहनों को पेश कर चुकी हैं। टोयोटा के पहले टीवीएस, बजाज और हीरो ने इथेनॉल से चलने वाले फ्लेक्स इंजन दोपहिया वाहनों को पेश किया था।

क्या हैं फ्लेक्स फ्यूल वाहन?
फ्लेक्स इंजन वाहनों को फ्लेक्स फ्यूल से चलने के लिए तैयार किया जाता है। ऐसे वाहन पूरी तरह इथेनॉल, फ्लेक्स-फ्यूल (पेट्रोल और इथेनॉल का मिश्रण) या पेट्रोल-डीजल से चल सकते हैं। इथेनॉल से चलने के कारण ऐसे वाहन हानिकारक गैसों का उत्सर्जन कम करते हैं और पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचाते हैं। केंद्र सरकार भारत में फ्लेक्स इंजन वाहनों का निर्माण शुरू करने के लिए नीति तैयार कर रही है। इस नीति के लागू होने के बाद देश में वाहनों कंपनियों के लिए फ्लेक्स-इंजन वाहनों का निर्माण करना अनिवार्य होगा।

एक अनुमान के अनुसार, फ्लेक्स फ्यूल से भारत में हर साल 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के इथेनॉल का कारोबार किया जा सकता है। इथेनॉल के उपयोग से भारत की निर्भरता पेट्रोल के आयात पर कम होगी और करोड़ों रुपये के राजस्व की भी बचत होगी। इसके अलावा इथेनॉल मिश्रित फ्लेक्स-फ्यूल के इस्तेमाल से वाहनों से होने वाला प्रदूषण भी कम होगा।

इथेनॉल के उत्पादन को बढ़ाने के लिए हरियाणा के पानीपत में देश का सबसे बड़ा इथेनॉल प्लांट (Ethanol Plant) लगाया गया है। इस प्लांट को 900 करोड़ रुपये की लगत से तैयार किया गया है। देश में ही विकसित तकनीक के आधार पर लगभग दो लाख टन चावल के भूसे का उपयोग करके सालाना लगभग 3 करोड़ लीटर जैव ईंधन यानी इथेनॉल का उत्पादन किया जाएगा।


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