टाटा मोटर्स फोर्ड के प्लांट में बनाएगी 2 लाख इलेक्ट्रिक वाहन, 2,000 करोड़ रुपये का किया निवेश
टाटा मोटर्स ने गुजरात के साणंद स्थित फोर्ड मोटर्स के खाली पड़े प्लांट का अधिग्रहण कर लिया है। हालांकि, कंपनी ने इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की हैं लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि कंपनी जल्द ही इस प्लांट में वाहनों का उत्पादन शुरू करेगी। पिछले साल सितंबर में फोर्ड इंडिया के भारत में उत्पादन बंद करने के बाद टाटा मोटर्स ने इस प्लांट को खरीदने की इक्षा जताई थी।

जानकारी के अनुसार, टाटा मोटर्स साणंद प्लांट में उत्पादन शुरू करने के लिए 2,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। कंपनी की योजना इस प्लांट में 2026 तक 2 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन करने की है। इस अधिग्रहण में, टाटा मोटर्स फोर्ड के प्लांट से किसी भी मौजूदा कर्मचारी की छंटनी नहीं करेगी। इस संयंत्र ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 23,000 कर्मियों को रोजगार दिया है।

कंपनी के पास पहले से ही साणंद में एक विनिर्माण सुविधा है, जिसे टाटा नैनो के निर्माण के लिए बनाया गया था। फोर्ड इंडिया प्लांट साणंद में टाटा मोटर्स प्लांट के ठीक सामने है। यह प्लांट वर्तमान में कंपनी अपनी इलेक्ट्रिक कारों के अलावा, टियागो और टिगोर जैसे अन्य पॉपुलर मॉडलों का भी निर्माण करती है।

टाटा मोटर्स अपनी मौजूदा साणंद स्थित फैक्टरी में प्रति वर्ष 10,000 इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन करती है। इस सुविधा की कुल उत्पादन क्षमता 1.5 लाख यूनिट प्रति वर्ष है। टाटा मोटर्स नैनो के रूप में भारत की सबसे सस्ती कार बनाने के लिए 4,500 करोड़ रुपये के निवेश के साथ साणंद में प्रवेश करने वाले पहले प्रमुख वाहन निर्माताओं में से एक था।

आपको बता दें कि भारतीय बाजार में टाटा मोटर्स के इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसकी तुलना में वाहनों का उत्पादन एक बड़े अंतर से पीछे है। पीटीआई को टाटा मोटर्स के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि कंपनी हर महीने अपने इलेक्ट्रिक कारों की 5,500 से 6,000 यूनिट्स की बुकिंग ले रही है। इसकी तुलना में कंपनी केवल 3,300-3,400 यूनिट्स की आपूर्ति कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के पास ग्राहकों के कई आर्डर लंबित हैं और उन्हें जल्द ग्राहकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। कंपनी उत्पादन बढ़ने के लिए सेमीकंडकटर और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों को अलग-अलग वेंडर से मंगा रही है। उम्मीद है कि 2030 में टाटा मोटर्स के इलेक्ट्रिक कारों की मांग कुल कारों की मांग की 30 फीसदी होगी।

जानकारों का मानना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों के चलते कार ग्राहक अधिक कीमत पर भी इलेक्ट्रिक कारें खरीद रहे हैं। इलेक्ट्रिक कारें शुरूआत में तो महंगी होती हैं, लेकिन उन्हें चलाने का खर्च एक पेट्रोल कार की तुलना काफी कम है। जिसके चलते लंबे समय में इलेक्ट्रिक कारें प्रभावी रूप से संचालन लागत को कम करती हैं।

वर्तमान में टाटा मोटर्स के लाइनअप में तीन इलेक्ट्रिक कारें हैं जिसमें टाटा नेक्सन ईवी, टिगोर ईवी और टिगोर एक्सप्रेस-टी शामिल हैं। कंपनी ने हाल ही में अपनी नई कॉन्सेप्ट इलेक्ट्रिक एसयूवी, टाटा कर्व (Tata Curv) का खुलासा किया है, जिसे अगले दो साल के भीतर लॉन्च करने की योजना बनाई जा रही है।

टाटा मोटर्स वर्तमान में ईवी सेगमेंट में 87 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ इलेक्ट्रिक कार बाजार में अग्रणी निर्माता है। कंपनी अब तक 21,500 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन सड़कों पर उतार चुकी है। टाटा मोटर्स अपने समूह की अन्य कंपनियों के साथ भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की पहुंच और अपनाने में तेजी लाने के लिए मिलकर काम कर रही है।


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