कार में 6 एयरबैग का नियम 1 अक्टूबर 2023 से होगा लागू, नितिन गडकरी ने दी जानकारी
यात्री कारों में 6 एयरबैग के कानून पर केंद्र सरकार ने अंतिम फैसला ले लिया है। गुरुवार (29 सितंबर) को केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि देश में 1 अक्टूबर, 2023 से कार में छह एयरबैग का नियम लागू हो जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने यह जानकारी अपने ट्विटर हैंडल के जरिये दी। गडकरी ने कहा कि मोटर वाहनों में यात्रा करने वाले सभी यात्रियों की सुरक्षा उनकी लागत और वेरिएंट की परवाह किए बिना सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता है।

उन्होंने आगे कहा कि ऑटो उद्योग द्वारा वैश्विक आपूर्ति बाधाओं और व्यापक आर्थिक परिदृश्य के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए, 1 अक्टूबर 2023 से यात्री कारों (एम -1 श्रेणी) में न्यूनतम 6 एयरबैग अनिवार्य करने वाले प्रस्ताव को लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस श्रेणी की कारों में 6 एयरबैग का नियम लागू होने से सुरक्षा में सुधार होगा। एक बयान में गडकरी ने कहा था कि इस नियम को यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लाया जा रहा है। उन्होंने सड़क हादसों में यात्रियों के बुरी तरह घायल होने और मौत के लिए कारों में एयरबैग की कमी को भी जिम्मेदार बताया था।

क्या हैं एम -1 श्रेणी के वाहन
ध्यान देने वाली बात है कि 6 एयरबैग के नियम को एम -1 श्रेणी के वाहनों के लिए लाया जा रहा है। यह ऐसे वाहन हैं जिनकी क्षमता ड्राइवर के साथ आठ यात्रियों की है। यानी यह नियम छोटी कारों के लेकर 7 या 8-सीटर वाली बड़ी एसयूवी तक में लागू होगा। जानकारी के अनुसार, नियम के लागू होने के बाद कार कंपनियों को एम -1 श्रेणी के तहत आने वाली सभी कार मॉडलों में अनिवार्य रूप से 6 एयरबैग लगाना होगा।

क्यों है कार में ज्यादा एयरबैग की जरूरत?
कार में लगे एयरबैग दुर्घटना के समय यात्रियों की सुरक्षा करते हैं। वर्तमान में भारत में बनने वाली कारों में केवल दो एयरबैग देना ही अनिवार्य किया गया है। यह दोनों एयरबैग सामने की सीटों पर होते हैं। ऐसे में कार की पिछली सीट पर बैठने वाले यात्री दुर्घटना के समेत सबसे ज्यादा असुरक्षित हो जाते हैं। हालांकि, अगर कार में ज्यादा यात्री हों तो दो या चार एयरबैग काफी नहीं हैं।

ऐसे में सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कम से कम 6 एयरबैग बेहद जरूरी हैं। अमेरिकी सरकार की संस्था नेशनल हाईवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन (NHTSA) के आंकड़ों के अनुसार, साल 1987 से 2017 तक केवल फ्रंट एयरबैग ने अमेरिका में 50,457 लोगों की जान बचाई थी।

हालांकि, भारत वाहनों के सेफ्टी फीचर्स के मामले में अभी काफी पीछे है। परिवहन मंत्रालय ने एक रिपोर्ट में बताया था कि साल 2020 में 13,022 लोगों की मौत कार में एयरबैग न होने की वजह से हुई। इसमें 4,424 लोगों की मौत कार में साइड इम्पैक्ट के वजह से हुई। इन सभी मामलों को देखते हुए सरकार छह एयरबैग के नियम को आवश्यक बनाने की नीति पर काम कर रही है।

कार कंपनियों के सामने ये हैं चुनौतियां
कार कंपनियों का कहना है कि इस नियम ने आने के बाद सस्ती कारें महंगी हो जाएंगी। वर्तमान में 10 लाख रुपये से ऊपर की कीमत वाली कारों में ही छह एयरबैग दिए जाते हैं। इन कारों में दो फ्रंट एयर बैग के साथ दो साइड और दो कर्टेन एयर बैग होते हैं। सस्ती कारों में अतिरिक्त एयरबैग को जोड़ने से कीमत में 20-25 हजार रुपये का इजाफा हो सकता है। कार निर्माताओं का कहना है कि सस्ती कारों की कीमत में इजाफा होने से बिक्री प्रभावित होगी।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कार ग्राहक डुअल एयरबैग, एबीएस, सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम जैसे सेफ्टी फीचर्स पर ज्यादा ध्यान देते हैं। कार निर्माता इन विकल्पों को अब एंट्री-लेवल कारों में भी पेश करने लगे हैं। इसके अतिरिक्त अन्य फीचर्स को जोड़ने से कार 1 लाख रुपये से 1.20 रुपये तक महंगी हो जाती है। इससे भारत में पहले से ही बिक्री के लिए मशक्कत कर रही एंट्री-लेवल की छोटी कारें और महंगी हो जाएंगी।


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