इलेक्ट्रिक कार खरीदने का बना रहें है प्लान, तो पहले जान लें क्या होंगे फायदे और नुकसान
समय के साथ जैसे सभी चीजें बदल रही हैं वैसे ही परिवहन के संसाधन भी बदल रहे हैं। आधुनिक जीवन में पेट्रोल और डीजल से चलने वाली पारंपरिक कारों की जगह अब इलेक्ट्रिक कारें ले रही हैं। इलेक्ट्रिक कारों को चलना न केवल किफायती होता है बल्कि इलेक्ट्रिक कारें उत्सर्जन नहीं करती हैं जिससे पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचता है। वर्तमान में इलेक्ट्रिक कारें थोड़ी महंगी हैं लेकिन सरकार द्वारा कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं जिससे इलेक्ट्रिक कारों पर थोड़ी छूट का फायदा जरूर मिल सकता है।

हालांकि, इलेक्ट्रिक कारों के मामले में लोगों के मन में चार्जिंग और रेंज को लेकर कई तरह की उलझनें रहती हैं जिस वजह से वे इलेक्ट्रिक कार खरीदने से हिचकते हैं। अगर आप भी पेट्रोल या डीजल कार चला रहे हैं और भविष्य में इलेक्ट्रिक कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो यहां हम बताएंगे इलेक्ट्रिक कारों की कुछ खूबियों के बारे में, साथ ही आपको यह भी बताएंगे कि इलेक्ट्रिक कारों के साथ आपको किन परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आइये जानते हैं...

इलेक्ट्रिक कार चलाना क्यों है फायदे का सौदा?
इलेक्ट्रिक कार चलाना है किफायती
इस समय जब ईंधन की कीमतें लगातार आसमान छू रही हैं, ऐसे में छोटी और लंबी अवधि में इलेक्ट्रिक कार को चलाना सबसे किफायती है। अगर आप पेट्रोल कार चलाते है तो औसतन प्रति किलोमीटर पर ईंधन का खर्च 9-10 रुपये आता है। वहीं एक इलेक्ट्रिक कार के मामले में यह खर्च सिर्फ 2-2.5 रुपये प्रति किलोमीटर है। आप इलेक्ट्रिक कार को चलाकर हर महीने पेट्रोल में होने वाले हजारों रुपये के खर्च को बचा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, अगर आपके पास टाटा नेक्सन ईवी है तो उसकी 30 kWh की बैटरी को फुल चार्ज करने में 90-100 रुपये का खर्च आएगा। फुल चार्ज पर नेक्सन ईवी को 250 किलोमीटर तक चलाया जा सकता है।

टैक्स में लाभ
इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर केंद्र और राज्य सरकारें कई तरह के लाभ भी दे रही हैं। अगर आप इलेक्ट्रिक कार खरीदना चाहते हैं तो आपको फेम-2 स्कीम (फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) के तहत 1,50,000 तक की सब्सिडी मिल सकती है। इसके अलावा कई राज्य सरकारें रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन में भी पूरी तरह छूट दे रही हैं। यही नहीं, अगर आप लोन पर इलेक्ट्रिक कार खरीदना चाहते हैं तो आपको ब्याज दर पर भी छूट दी जाएगी जो अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक हो सकता है। फिलहाल, इस तरह की कोई भी स्कीम पेट्रोल या डीजल कार खरीदने पर उपलब्ध नहीं है।

रखरखाव में कम खर्च
इलेक्ट्रिक कार खरीदने का सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि इसके मेंटेनेंस का खर्च काफी कम है। इलेक्ट्रिक कार में इंजन नहीं होता है इसलिए इसमें बार-बार इंजन आयल चेंज करने का झंझट नहीं होता। इसके अलावा, एक पेट्रोल कार की तुलना में इलेक्ट्रिक कार में मूविंग पार्ट्स बेहद कम होते हैं जिन्हें बेहद कम मेंटेनेंस की जरूरत पड़ती है। हालांकि, इलेक्ट्रिक कार के मोटर को नियमित रखरखाव की जरूरत होती है और कूलेंट को भी बदलना पड़ता हैं, लेकिन पेट्रोल या डीजल कार की तुलना में इलेक्ट्रिक कार के मेंटेनेंस का खर्च काफी कम है।

पर्यावरण के लिए अनुकूल
इलेक्ट्रिक कार से किसी भी तरह की हानिकारक गैस या धुंए का उत्सर्जन नहीं होता, इसलिए ये पर्यावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित होती हैं। देश भर में होने वाले कार्बन उत्सर्जन का 30 प्रतिशत पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों से आता है। इसमें दोपहिया, तिपहिया, बस, कार और ट्रक जैसे सभी वाहन शामिल हैं। अगर आप पर्यावरण प्रेमी हैं और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग हैं तो आपको इलेक्ट्रिक कारें खूब पसंद आएंगी।

आइये अब बात करते हैं इलेक्ट्रिक कारों से जुड़ी कुछ परेशानियों के बारें में...
ऊंची कीमत
इलेक्ट्रिक कारों की अधिक कीमत इन्हें एक आम आदमी के पहुंच से बाहर कर देती है। बाजार में अधिकतर इलेक्ट्रिक कारों की कीमत 12 लाख रुपये से अधिक है। वहीं ऑनरोड इनकी कीमत 15-16 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। भारत में उपलब्ध सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक कार टाटा टिगोर ईवी है जिसकी कीमत 12.49 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) से शुरू होती है। इसकी तुलना में एक सबसे किफायती पेट्रोल कार 5-6 लाख रुपये (ऑन-रोड) की कीमत में उपलब्ध हो जाती है।

चार्जिंग स्टेशनों की कमी
चार्जिंग स्टेशनों की कमी चिंता का एक प्रमुख बिंदु है जो लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से हतोत्साहित करती है। यही वजह है कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री धीमी गति से बढ़ रही है। इलेक्ट्रिक कार खरीदने वालों को हमेशा रेंज की चिंता सताती रहती है। जरूरत के हिसाब से चार्जिंग स्टेशनों के उपलब्ध न होने से इलेक्ट्रिक कारों का इस्तेमाल केवल सीमित दूरी के लिए ही किया जा सकता है। अगर चार्ज खत्म हो जाए तो आप बीच रास्ते में भी फंस सकते हैं।फिलहाल, देश के कई शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन बनाये जा रहे हैं लेकिन उन्हें पूरी तरह विकसित होने में अभी कुछ और समय लग सकता है।

चार्ज होने में अधिक समय
एक इलेक्ट्रिक कार को चार्ज करने में औसतन 4-6 घंटे का समय लगता है। वहीं पेट्रोल से चलने वाली कार के टैंक को महज कुछ मिनट में ही पूरी तरह भरा जा सकता है। अगर आप इलेक्ट्रिक कार खरीदना चाहते हैं तो इस समस्या से आपको दो चार होना पड़ेगा। इसलिए इलेक्ट्रिक कार से कहीं निकलने के पहले उसे चार्ज करने की प्लानिंग करनी पड़ती है।

बैटरी रिप्लेसमेंट में अधिक खर्च
इलेक्ट्रिक कारों की बैटरियां महंगी होती हैं इसलिए जब भी वे अपनी साइकिल के अंत तक पहुंचती हैं, तो उन्हें बदलने का खर्च लाखों में आता है। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहन बेचने वाली कंपनियां बैटरी पर भी 5-6 साल की वारंटी देती हैं। आमतौर पर एक इलेक्ट्रिक कार की बैटरी 8-9 साल तक चल जाती है। कार का ज्यादा उपयोग न होने पर बैटरी 10-12 साल तक भी चल सकती है।

तो ये थे इलेक्ट्रिक कारों के कुछ फायदे और नुकसान। हमें उम्मीद है आप इलेक्ट्रिक कार खरीदते समय इन जरूरी बातों को ध्यान में रख कर फैसला करेंगे।


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