सीट बेल्ट नहीं लगाया तो एयरबैग भी नहीं बचाएंगे आपकी जान, जानें क्या हैं सीट बेल्ट न पहनने के खतरे
हाल ही में टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री की मौत एक कार दुर्घटना में हो गई। जानकारी के अनुसार, सायरस जिस कार में सफर कर रहे थे वह काफी तेज रफ्तार से चल रही थी और उन्होंने सीट बेल्ट भी नहीं लगाया था। इस घटना के बाद सरकार ने नियमों में तुरंत सुधार करते हुए कार में बैठने वाले हर व्यक्ति को सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य कर दिया है। हालांकि, अब हर तरफ सीट बेल्ट और एयरबैग की चर्चा शुरू हो गई है। तो चलिए जानते हैं दुर्घटना के समय सीट बेल्ट और एयरबैग आपके लिए कितना जरूरी है।

क्यों जरूरी है सीट बेल्ट?
सीट बेल्ट कार में मिलने वाला एक बेसिक सेफ्टी फीचर है। यह दुर्घटना के समय आपको सीट से बांधे रख आपकी जान बचा सकता है। केवल सीट बेल्ट न लगाने के वजह से हर साल हजारों कार सवार दुर्घटना में अपनी जान गंवा देते हैं। भारत में कार के सामने की सीट पर बैठने वाले लोगों के लिए सीट बेल्ट का इस्तेमाल करना अनिवार्य था लेकिन पीछे बैठने वाले लोगों के लिए इस तरह को कोई सख्त कानून नहीं था। इस वजह से कार में पीछे बैठने वाले लोग सीट बेल्ट को नजरअंदाज करते हैं और यह दुर्घटना के दौरान काफी घातक साबित होता है।

दुर्घटना के समय कार के अंदर बैठे लोगों को आगे की तरफ काफी तेज झटका लगता है जिससे सर, छाती और कन्धों पर गहरी चोट लग सकती है। आगे के तरफ झटका लगने से कार चालक का सर डैशबोर्ड या स्टीयरिंग से टकरा सकता है। सीट बेल्ट दुर्घटना के समय यात्रियों को सीट से बांधे रखता है जिससे सर और शरीर के अन्य हिस्सों के कार से टकराने की गुंजाईश काफी हद तक कम हो जाती है।

मान लीजिये कि आपकी कार का 100 किमी/घंटा की रफ्तार से चलते हुए एक्सीडेंट हो जाता है। ऐसे में कार रुक जाती है लेकिन आपका शरीर अब भी उसी रफ्तार से आगे बढ़ रहा होता है। इस वजह से एक्सीडेंट होने पर आपको कार के अंदर तेज झटका लगता है। तेज झटके के बावजूद सीट बेल्ट आपको सीट पर नियंत्रित रखने में मदद करता है और आपको कार से बाहर नहीं निकलने देता।

क्यों जरूरी है एयरबैग?
सीट बेल्ट और एयरबैग साथ-साथ काम करते हैं। भारत में ज्यादातर कारें डुअल एयरबैग और सभी सीटों पर सीट बेल्ट के साथ आती हैं। सेट बेल्ट नहीं लगाने पर भी एयरबैग काम करते हैं। इन कारों में ऐसे एयरबैग होते हैं उनमें SRS लिखा होता है। इसका मतलब सप्लीमेंट्री रिस्ट्रेनिंग सिस्टम होता है। इसका मतलब यह होता है कि एयर बैग आपकी जान बचाने के लिए एकलौता उपकरण नहीं है। इसलिए ऐसी कारों में सफर करते समय सीट बेल्ट लगाना जरूरी होता है।

एयरबैग ऐसे करता है काम
एयरबैग को कार में लगे कई सेंसर कंट्रोल करते हैं। कार में लगे स्पीड सेंसर, इम्पैक्ट सेंसर, प्रेशर सेंसर और ब्रेक सेंसर जैसे उपकरण एयरबैग को खुलने के लिए सिग्नल भेजते हैं। कार के टकराने के साथ ये सेंसर एक्टिवेट हो जाते हैं और एक सेकंड से भी कम समय में एयरबैग खुल जाते हैं। हालांकि, अगर कार किसी बड़ी चीज से नहीं टकराती है तो एयरबैग नहीं खुलेंगे। एयरबैग तभी खुलते हैं जब कार अधिक रफ्तार में किसी बड़ी चीज से टकराती है।

नियमों का उल्लंघन पड़ता है भारी
एक सर्वे में पता चला है कि भारत में 10 में से 7 यात्री ड्राइविंग करते समय सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करते हैं। सीट बेल्ट लगाने की अपील करने के लिए सरकार अभियान चलाती रहती है लेकिन हर रोज हजारों लोग बिना सीट बेल्ट के ड्राइविंग करते पाए जाते हैं।

अगर आप सीट बेल्ट लगाते हैं तभी एयर बैग आपकी पूरी तरह सुरक्षा कर पाता है। सेट बेल्ट न लगाने पर केवल एयर बैग से आपकी पूरी तरह सुरक्षा मुमकिन नहीं है।


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