अगले साल मारुति सुजुकी की कारें करेगी कम प्रदूषण, माइलेज भी हो सकता है कम; जानें क्यों
भारत सरकार 1 अप्रैल 2023 से ई20 इथेनाल ब्लेंडेड पेट्रोल को जरूरी करने वाली है और ऐसे में मारुति सुजुकी ने जानकारी दी है कि उनकी सभी कारें मार्च 2023 तक ई20 से चलने वाली है। अगले अप्रैल से इस नियम का पालन सभी कार निर्माताओं को करना होगा और 2025 से ई20 फ्यूल देश भर में उपलब्ध कराया जाएगा। ई20 में 20% इथेनाल व 80% पेट्रोल शामिल है।

भारत 2070 में शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करना चाहती है और इसकी शुरुआत भी कर दी गयी है। सरकार ने कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए वाहन निर्माताओं को इलेक्ट्रिक वाहन का निर्माण करने की भी सलाह दी है। इसी कदम पर चलते ही वाहन निर्माताओं को अपने वाहनों को ई20 फ्यूल के अनुरूप तैयार करना होगा।

ऐसे में देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि इस नियम के लागू होने के पहले उनकी पूरी पैसेंजर वाहन रेंज ई20 फ्यूल के अनुरूप अपडेट कर दी जायेगी। कंपनी की अब से जो भी नए मॉडल आयेंगे वह शुरू से ई20 फ्यूल के अनुरूप होंगे और मौजूदा मॉडल्स को मार्च 2023 तक इस नियम के अनुरूप ढाल लिया जाएगा।

वर्तमान में कंपनी की अधिकतर वाहन ई10 के अनुरूप है और ऐसे में उन्हें अपने इंजन में बदलाव करने होंगे। वहीं इथेनाल की हिस्सेदारी बढ़ाने से माइलेज में थोड़ी कमी आ सकती है। वहीं कंपनी का मानना है कि ई20 फ्यूल की कीमत सब्सिडी के साथ थोड़ी सोच समझ के रखी जा सकती है। इससे कम माइलेज से बढ़ने वाले खर्च को कम फ्यूल कीमत से संतुलित किया जा सकेगा।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पूरी ने कहा है कि देश में ई20 पेट्रोल की बिक्री अप्रैल 2023 से शुरू हो जाएगी। वहीं 2025 तक इथेनॉल की मात्रा को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने बताया था कि 10 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग से भारत हर साल 41,500 करोड़ रुपये के राजस्व की बचत कर रहा है। इसके अलावा, 27 लाख टन ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम किया जा सकेगा।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पूरी ने कहा है कि देश में ई20 पेट्रोल की बिक्री अप्रैल 2023 से शुरू हो जाएगी। वहीं 2025 तक इथेनॉल की मात्रा को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने बताया था कि 10 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग से भारत हर साल 41,500 करोड़ रुपये के राजस्व की बचत कर रहा है। इसके अलावा, 27 लाख टन ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम किया जा सकेगा।

इस प्लांट में हर साल 3 करोड़ लीटर इथेनॉल (बायो फ्यूल) तैयार किया जाएगा। यह इतना है कि इससे हर साल 63,000 कारें चलाई जा सकती हैं। बायो फ्यूल यानी इथेनॉल कई तरह से फायदेमंद है। अगर वाहन में बायो फ्यूल से तैयार किया गया फ्लेक्स फ्यूल इस्तेमाल किया जा रहा है तो इससे प्रदूषण में कमी की जा सकती है। फ्लेक्स फ्यूल जब वाहन के इंजन में जलता है तो यह कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और अन्य खतरनाक गैसों के उत्सर्जन को कम करता है।


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