एक्सीडेंट होने पर नहीं खुला कार का एयरबैग, हुंडई ने ग्राहक को दिया 1.25 लाख रुपये का मुआवजा
देश की दूसरी सबसे बड़ी कार कंपनी हुंडई (Hyundai) इस बार एक नई वजह से चर्चा में है। दरअसल, कंपनी ने गुजरात में अपने एक ग्राहक के साथ चल रहे विवाद को खत्म कर दिया है। गुजरात स्टेट कंज्यूमर फोरम ने हुंडई को विवाद को निपटाने के लिए कार मालिक को 1.25 लाख रुपये देने का फैसला सुनाया था। हुंडई कार ओनर और कंपनी के बीच यह विवाद 11 साल से चल रहा था। यानी कार मालिक को यह भुगतान पाने के लिए एक दशक से अधिक समय तक इंतजार करना पड़ा। आखिर 11 साल पहले ऐसा क्या हुआ था कि हुंडई को अब जाकर 1.25 लाख रुपये चुकाने पड़े। आइए जानते हैं...

यह विवाद गुजरात के अहमदाबाद के साबरमती निवासी अभय कुमार जैन और हुंडई इंडिया के बीच है। अभय ने 2010 में एक हुंडई की एक हैचबैक कार खरीदी थी जो 2011 में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। वे जुंडल की ओर जाने के लिए ड्राइव कर रहे थे, तभी उनकी कार पत्थर से टकरा गई और सड़क पर पलट गई। हादसे में चालक समेत सभी यात्री बाल-बाल बच गए। अभय को इस हादसे के बाद बीमा कंपनी से 2.75 लाख रुपये मिले।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे खास बात यह रही कि कार का एयरबैग नहीं खुला। इंश्योरेंस सर्वेयर ने कहा कि कार का एयरबैग खराब था और यह मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट था। जब अभय ने अहमदाबाद कंज्यूमर कोर्ट में डीलर पर मुकदमा किया, तो हुंडई का प्रतिनिधि अनुपस्थित रहा। डीलर ने तर्क दिया कि एक सर्वेक्षक यह निर्धारित नहीं कर सकता कि एयरबैग में गलती थी। डीलर का तर्क था कि हो सकता है कि गाड़ी चलाते समय सीटबेल्ट न पहनी हो, जिसके कारण एयरबैग नहीं खुला।

हुंडई ने भरा 1.25 लाख रुपये का मुआवजा
अभय ने एयरबैग में खराबी के कारण कंपनी से मुआवजे के रूप में 2 लाख रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 50,000 रुपये की मांग की। अदालत ने इसे हुंडई द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवा में दोष माना और कंपनी से जुर्माना भरने को कहा। हालांकि, उपभोक्ता अदालत ने मुआवजे की राशि को आधा कर दिया। जिसके बाद हुंडई ने कार मालिक को मुआवजे के तौर पर 1.25 लाख रुपये दिए।

इसी साल एक और ऐसे ही मामले में हुंडई ने क्रेटा एसयूवी के मालिक को 3 लाख रुपये का मुआवजा दिया था। क्रेटा मालिक ने कंपनी पर आरोप लगाया था कि कार की टक्कर के समय एयरबैग नहीं खुला जिसके चलते उसे सर और चहरे समेत शरीर पर कई जगह गंभीर चोटें आयीं।

मालिक ने कार निर्माता के खिलाफ दिल्ली स्टेट कंज्यूमर रिड्रेसल कमीशन में केस दर्ज कराया। राज्य आयोग ने मालिक के पक्ष में फैसला सुनाया और हुंडई को 3 लाख रुपये का मुआवजा देने को कहा। मुआवजे में चिकित्सा खर्च और आय की हानि के लिए 2 लाख रुपये, मुकदमेबाजी के लिए 50,000 रुपये और कार मालिक को मानसिक पीड़ा के लिए 50,000 रुपये शामिल थे।

ऐसे काम करता है एयरबैग
दुर्घटना के समय कार के टकराने पर एयरबैग अपने आप खुल जाता है। एयरबैग 320 किमी/घंटा की रफ्तार से एक सेकेंड से भी कम समय में खुल जाता है। दुर्घटना की स्थिति में, सेंसर सक्रिय हो जाता है और एयरबैग को खोलने के लिए एक संकेत भेजता है। सिग्नल मिलते ही स्टीयरिंग के नीचे मौजूद इनफ्लेटर सक्रिय हो जाता है।

इन्फ्लेटर सोडियम एजाइड के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया द्वारा नाइट्रोजन गैस का उत्पादन करता है। दुर्घटना की स्थिति में नाइट्रोजन से भरा एयरबैग ड्राइवर के सामने खुल जाता है और यात्री को चोटिल होने से बचाता है। हालांकि, अगर सीट बेल्ट नहीं लगाई जाती है, तो इससे यात्री को भी नुकसान होता है।


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