बस कुछ महीनों की मेहमान हैं होंडा की डीजल कारें, अप्रैल 2023 से बंद हो जाएगी बिक्री
होंडा भारत में डीजल कारों को बंद करने वाली है। कंपनी अप्रैल 2023 से भारत में डीजल कारों बिक्री बंद करेगी। इससे अब कंपनी के पास अपनी डीजल कारों की बिक्री के लिए केवल 5 महीने ही बचे हैं। ऑटोकारप्रो के अनुसार, भारत में अप्रैल 2023 से बीएस-6 उत्सर्जन नियमों (BS-6 Emission Norms) के दूसरे चरण के लागू होते ही कई कंपनियां अपने डीजल मॉडलों को बंद करने वाली हैं। इसमें जापानी निर्माता होंडा भी शामिल है।
अगले साल अप्रैल से रियल टाइम ड्राइविंग उत्सर्जन मानदंड लागू होंगे और इन मानदंडों को पूरा करने के लिए डीजल इंजनों पर महंगे उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण की आवश्यकता होगी जो लागत को काफी बढ़ा देगा। पहले से ही डीजल कारें पेट्रोल की तुलना में अधिक महंगी हैं, वहीं अब नए उत्सर्जन नियमों के कारण ये कारें और भी महंगी हो जाएंगी। यही कारण है कि होंडा ने डीजल कारों को बंद करने का फैसला लिया है।

वर्तमान में होंडा अपनी डीजल कारों में 1.5-लीटर i-DTEC टर्बो डीजल इंजन का इस्तेमाल कर रही है। इसके अलावा कंपनी 1.6-लीटर i-DTEC डीजल इंजन कारों को बाहर एक्सपोर्ट कर रही है। भारत में होंडा सिटी, डब्ल्यूआर-वी और अमेज के डीजलों मॉडलों की बिक्री बंद हो जाएगी। हालांकि, कंपनी 2023 में एक नई एसयूवी को लॉन्च करने की तैयारी कर रही है जो स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड इंजन में पेश की जाएगी।
देश में 1 अप्रैल 2023 से बीएस-6 उत्सर्जन नियमों का दूसरा चरण लागू होने वाला है। इसमें वाहनों को अपग्रेड कर उत्सर्जन को और कम करने का दबाव बढ़ेगा। इससे कई कंपनियों की डीजल कारों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। बता दें कि डीजल कारों में पेट्रोल की तुलना में कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन काफी अधिक होता है।

मारुति सुजुकी और फॉक्सवैगन जैसी बड़ी कंपनियों ने तो इस वजह से डीजल कारों का उत्पादन ही बंद कर दिया। फिलहाल दोनों कंपनियां अपने लाइनअप में एक भी डीजल कार नहीं बेच रही हैं। हाल ही में टोयोटा ने भारत में इनोवा के डीजल मॉडलों को बंद करने का ऐलान किया है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2012 में जहां डीजल वाहनों की हिस्सेदारी 54% के साथ पेट्रोल वाहनों से भी ज्यादा थी, वहीं 2022 में यह कम होकर मात्र 18 प्रतिशत रह गई है। छोटी डीजल कारों के मामले में यह स्थिति और भी खराब है। बाजार में छोटी डीजल कारों की हिस्सेदारी अब केवल 1% रह गई है। वहीं कॉम्पैक्ट एसयूवी में यह 16% और फुल साइज एसयूवी में 80% है।


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