फोर्ड ईकोस्पोर्ट का उत्पादन भारत में किया गया बंद, पिछले साल कंपनी ने छोड़ा था भारत
फोर्ड ईकोस्पोर्ट का उत्पादन अब भारत में बंद कर दिया गया है, हाल ही में इसके आखिरी यूनिट का उत्पादन किया गया है। फोर्ड ने पिछले साल सितंबर में भारत छोड़ने की घोषणा की थी और उसके बाद कंपनी ने अक्टूबर में सानंद प्लांट में उत्पादन बंद कर दिया गया था और अब चेन्नई प्लांट में भी उत्पादन अंततः बंद कर दिया गया है। फोर्ड भारत से कारों को एक्सपोर्ट भी करती थी।

कंपनी ने 2021 में सितंबर महीने भारत छोड़ने की घोषणा की गयी थी, कंपनी ने इसका कारण एक दशक से हो रहे घाटे को बताया है। कंपनी के भारत में दो प्लांट - सानंद व चेन्नई में थे। कंपनी सानंद प्लांट में छोटी कारों जैसे फिगो, फ्रीस्टाइल, एस्पायर व चेन्नई प्लांट में ईकोस्पोर्ट व एंडेवर का उत्पादन किया जाता था। कई मुश्किलों के बाद भी कंपनी एक्सपोर्ट के लिए कारों व इंजन का उत्पादन कर रही थी।

अब इस सफर का अंत हो गया है। फोर्ड ने ईकोस्पोर्ट को 2013 के मध्य में लाया गया था, यह देश की पहली कॉम्पैक्ट सब 4-मीटर एसयूवी में से एक थी। इसे शानदार प्रतिक्रिया मिली थी और कंपनी भारतीय बाजार में अच्छी पकड़ बना रही थी। इसके बाद एक-एक करके फिगो, एस्पायर, फ्रीस्टाइल जैसे मॉडल लाये गये लेकिन यह ग्राहकों को लुभाने में कामयाब नहीं हो पाए।

फोर्ड के पास अब एक भी सफल मॉडल बाकी ना रह गयी थी और ऐसे में कंपनी को हो रहे घाटे के चलते भारतीय बाजार को छोड़ कर जाना पड़ा। यह एक और ऑटो कंपनी थी जिसे भारत छोड़कर जाना पड़ा, अब तक शेवरले, दैटसन, हार्ले डेविडसन, फिएट, जनरल मोटर्स जैसी कंपनियां छोड़ कर जा चुकी है।

उत्पादन समस्या
फोर्ड ने 14 जून से ही फिर से उत्पादन शरू किया था। फोर्ड के प्लांट के कर्मचारी बेहतर पैकेज की मांग के चलते काम को बंद कर दिया था। फोर्ड के प्लांट में करीब 2600 कर्मचारी काम करते है लेकिन सिर्फ 100 - 150 कर्मचारी ही काम पर वापस लौटे थे। वहीं कंपनी का कहना था कि उत्पादन 300 कर्मचारियों के साथ शुरू किया गयाऔर तेजी से बढ़ रही है।

पीएलआई स्कीम
फोर्ड इंडिया ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहन बनाने की अपनी योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। कार निर्माता ने भारत सरकार की उत्पाद लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के लिए अपने चल रहे व्यापार पुनर्गठन के हिस्से के रूप में आवेदन किया था। पीएलआई योजना के तहत, फोर्ड ने निर्यात और घरेलू बाजारों के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण के लिए अपनी दो विनिर्माण सुविधाओं में से एक का उपयोग करने की बात कही थी।

कंपनी ने एक बयान में कहा था कि वह भारत में इलेक्ट्रिक कारों की बनी-बनाई यूनिट को बेचेगी जिसका उत्पादन किसी अन्य देश में किया जाएगा। कंपनी टाटा मोटर्स और हुंडई के साथ देश में अपनी मौजूदा फैक्टरियों को बेचने की भी तलाश कर रही है, जो कथित तौर पर संयंत्रों का अधिग्रहण करने में रुचि रखते हैं।

ड्राइवस्पार्क के विचार
फोर्ड के लिए भारतीय बाजार में सबकुछ सही नहीं चल रहा था और काफी घाटे में चल रही थी। ऐसे में कंपनी फिर से उठने की बजाय भारतीय बाजार को छोड़ने का फैसला किया और यहां से कारों व इंजन को भी निर्यात नहीं करेगी. फोर्ड ने अब अंततः भारत में को अलविदा कह दिया है।


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