बस एक साल में ICE वाहनों की कीमत पर बिकेंगे Electric वाहन, Nitin Gadkari ने दी जानकारी
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रचार तेजी से बढ़ रहा है। जहां वाहन निर्माता कंपनियां ज्यादा से ज्यादा इलेक्टि्क वाहन बेचने के लिए नए और बेहतर वाहन उतार रही हैं, वहीं दूसरी ओर बहुत से लोग इलेक्ट्रिक वाहनों पर स्विच भी करना चाहते हैं। लेकिन इसकी ज्यादा कीमत के चलते लोग में निराशा आ जाती है, क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत ICE वाहनों के मुकाबले काफी ज्यादा होती है।

परिवहन मंत्री, Nitin Gadkari इससे पहले दो बार कह चुके हैं कि इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में कमी आएगी। हालांकि सोचने वाली बात यह है कि अब तक ऐसा कुछ हुआ नहीं है। अब परिवहन मंत्री ने एक बार फिर अपनी बात को दोहराया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत पेट्रोल वाहनों के बराबर हो जाएगी।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा एक साल के भीतर ही किया जाएगा। भारत के सड़क परिवहन और राजमार्ग, Nitin Gadkari ने कहा कि "मैं कोशिश कर रहा हूं... एक साल के भीतर इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत देश में पेट्रोल वाहनों की कीमत के बराबर हो जाएगी और हम जीवाश्म ईंधन पर खर्च किए गए पैसे को बचाएंगे।"

उन्होंने कहा कि सरकार पहले से ही हरित ईंधन को आक्रामक रूप से बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। आपको बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है, जब Nitin Gadkari ने ऐसा कुछ कहा है। उन्होंने यह बात पहले मार्च 2021 में और फिर मार्च 2022 में भी कही थी।

आपको बता दें कि भारतीय बाजार में बिक रहे वाहनों के इलेक्ट्रिक और आंतरिक-दहन इंजन संचालित वर्जन के बीच कीमत का एक बहुत बड़ा अंतर है। उदाहरण के तौर पर भारतीय बाजार में मौजूद अभी तक की सबसे किफायती इलेक्ट्रिक कार स्वदेशी कार निर्माता कंपनी Tata Motors की Tata Tigor EV है।

इसके इलेक्ट्रिक वर्जन की कीमत जहां 12.24 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है, वहीं पेट्रोल से चलने वाली Tata Tigor की कीमत 5.98 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) से शुरू होती है। इसके बाद Tata Nexon EV की बात करें तो, इसकी कीमत 14.79 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है और Nexon का बेस वेरिएंट 7.55 लाख रुपये से शुरू होता है।

आखिर में बात करते हैं MG Motor की MG ZS EV और MG Astor की, तो जहां इसके इलेक्ट्रिक वर्जन की कीमत 22 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) से शुरू होती है, वहीं दूसरी ओर MG Astor की 10.28 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) से शुरू होती है।

इन उदाहरणों से आप देख सकते हैं इनकी कीमतों में कमी लगभग 50 प्रतिशत के आसपास है। ऐसा इसलिए क्योंकि बैटरी महंगी होने के कारण इनकी कीमतें बढ़ जाती है। प्रौद्योगिकी अभी भी अपेक्षाकृत नई है और निर्माताओं को उत्पाद को बाजार में लॉन्च करने से पहले बहुत सारे शोध और विकास करने की आवश्यकता है।


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