दिल्ली में पुरानी कारों में इलेक्ट्रिक किट रेट्रोफिटिंग करने वाली कंपनियों का रजिस्ट्रेशन हुआ शुरू
दिल्ली राज्य परिवहन विभाग ने उन केंद्रों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी है जो पुराने डीजल और पेट्रोल वाहनों की इलेक्ट्रिक रेट्रोफिटिंग करेंगे और उन्हें इलेक्ट्रिक कारों में बदल देंगे। इस कदम से शहर में वाहनों के विद्युतीकरण को एक बड़ा प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। अब तक विभाग ने पुराने आईसीई वाहनों को इलेक्ट्रिक कारों में बदलने के लिए इलेक्ट्रिक किट के 10 निर्माताओं को सूचीबद्ध किया है।

2016 में, केंद्र ने वाहनों में इलेक्ट्रिक किट को लगाने के लिए मानदंडों को अधिसूचित किया था। मानदंडों के अनुसार, इलेक्ट्रिक किट के इंस्टॉलर को उनकी ओर से वाहनों में इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन फिट करने के लिए किट के निर्माता या आपूर्तिकर्ता द्वारा अधिकृत किया जाएगा। इलेक्ट्रिक किट इनस्टॉल करने वाली कंपनी प्रशिक्षित तकनीशियन होने चाहिए जिन्हें आपूर्तिकर्ता द्वारा व्यापक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इंस्टालर उन वाहनों का रिकॉर्ड भी बनाए रखेंगे जिन्हें रेट्रोफिट किया गया है और जब भी आवश्यक हो इसे सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को प्रदान करेंगे।

साल में कम से कम एक बार, इलेक्ट्रिक किट का इंस्टॉलर वाहन का फिटनेस परीक्षण करेगा और ऑडिट किए गए मापदंडों के रिकॉर्ड को बनाए रखेगा। इंस्टालरों को किट लगाने के लिए वाहन की फिटनेस का आकलन करने और मूल्यांकन की व्याख्या करने के बाद मालिक की लिखित सहमति लेने की भी आवश्यकता होती है।

पिछले साल नवंबर में, दिल्ली सरकार ने कहा कि जिन लोगों के पास 10 साल से अधिक पुरानी डीजल कारें हैं, उन्हें राष्ट्रीय राजधानी में चलने की अनुमति तभी दी जाएगी, जब उनके इंजनों को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन से बदल दिया जाए। रेट्रोफिटिंग के लिए दिल्ली परिवहन विभाग के पैनल में शामिल केंद्रों को इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (आईसीएटी) द्वारा अनुमोदित किया जाता है, जो एक प्रमुख परीक्षण प्रमाणन, अनुसंधान और विकास एजेंसी है।

जानकारों के मुताबिक बैटरी क्षमता और रेंज के आधार पर पुरानी पेट्रोल और डीजल कारों और चारपहिया वाहनों में इलेक्ट्रिक किट लगाने की लागत करीब 3-5 लाख रुपये होगी। वहीं दो और तीन पहिया वाहनों को इलेक्ट्रिक किट से रेट्रोफिट कराने की लागत कम होगी।

आपको बता दें कि 10 साल पुराने डीजल वाहन जिन्हें नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली-एनसीआर में बैन कर दिया गया था, उन्हें अब इलेक्ट्रिक किट के साथ रेट्रोफिट होने के बाद इस्तेमाल किया जा सकता है।

दिल्ली-राज्यक्षेत्र में गंभीर वायु प्रदूषण का मुख्य कारन वाहनों से होने वाला उत्सर्जन है। इसमें डीजल से चलने वाले कमर्शियल वाहनों की अहम भूमिका है। डीजल वाहन को इलेक्ट्रिक में बदलने के बाद वाहन मालिक दिल्ली सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत मिलने वाली सब्सिडी और छूट का लाभ उठा सकते हैं।

दिल्ली सरकार का मानना है कि डीजल वाहनों के लिए इलेक्ट्रिक किट के रेट्रोफिटमेंट की अनुमति से राष्ट्रीय राजधानी में इलेक्ट्रिक और शून्य-उत्सर्जन वाहनों को बढ़ावा देने में सहायता मिलेगी। बता दें कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए राज्य सरकार ने दिल्लीवासियों से महीने में कम से कम एक बार सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने की अपील की है।

वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में 15 साल से ज्यादा पुराने पेट्रोल वाहन और 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों को पहले ही प्रतिबंधित कर दिया है। इसके अलावा अब वाहनों के वैध पीयूसी (PUC) की भी जांच की जा रही है।


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