इस देश में जल्द ही बंद हो जाएंगी पेट्रोल-डीजल कारें, इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री का टूटा रिकाॅर्ड
दुनिया भर के कई देशों में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है जिससे वहां उनकी मांग तेजी से बढ़ रही है। कई देशों में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ाने के लिए सरकारी प्रोत्साहन दिया जा रहा है जिससे काफी संख्या में नए ग्राहक आकर्षित हो रहे हैं। उत्तरी यूरोप के देश नॉर्वे में भी पिछले कुछ सालों में इलेक्ट्रिक कारों की मांग तेजी से बढ़ी है। यहां इलेक्ट्रिक कारों की मांग इतनी अधिक है कि इस साल जनवरी में बेचे गए 8,000 कारों में इलेक्ट्रिक कारों की संख्या 6,500 से भी ज्यादा थी।

सड़क यातायात के लिए सूचना जारी करने वाली नॉर्वेजियन सूचना परिषद ने कहा कि इस साल जनवरी में बेची गई इलेक्ट्रिक कारों की संख्या पिछले साल इसी अवधि में बेची गई इलेक्ट्रिक कारों के मुकाबले 53 फीसदी अधिक दर्ज की गई। वहीं 2021 के दौरान नॉर्वे में बेची गई कारों में 65 फीसदी इलेक्ट्रिक कारें थीं।

बस इतनी बिकी पेट्रोल कारें
असल में, पिछले साल नॉर्वे दुनिया का पहला देश बन गया, जहां विभिन्न सरकारी प्रोत्साहनों की बदौलत इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री पेट्रोल मॉडलों से आगे निकल गई। पिछले महीने देश में पेट्रोल और डीजल से चलने वाली केवल 387 कारें ही बेची गई। 20 सबसे लोकप्रिय कार ब्रांडों में से उन्नीस पूरी तरह से इलेक्ट्रिक थे, जबकि Audi Q e-tron, Hyundai Ioniq 5 और BMW iX सबसे ज्यादा बिकने वाली इलेक्ट्रिक कारें रहीं।

2025 से बंद होगी पेट्रोल कारों की बिक्री
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2022 तक तेल संसाधन से समृद्ध देश नॉर्वे, कारों के मामले में पूरी तरह उत्सर्जन-मुक्त हो सकता है। पिछले महीने नॉर्वेजियन काउंसिल ने कहा था कि नॉर्वे कई निर्माताओं के लिए नई इलेक्ट्रिक कारों के लिए "परीक्षण देश" बन गया है। कॉउंसिल ने कहा देश पूरी तरह से उत्सर्जन मुक्त परिवहन प्राप्त करने के लिए 2025 के लक्ष्य के बारे में काफी आशावादी है।

नॉर्वे में बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को करों से मुक्त रखा गया है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत आंतरिक दहन इंजन (आईसीई) वाली कारों की तुलना में कम हो गई है। नॉर्वे ने 2025 तक पेट्रोल और डीजल से चलने वाली कारों की बिक्री को समाप्त करने की समय सीमा निर्धारित की है।

भारत में भी इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर
1 फरवरी को पेश किए गए आम बजट में केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं। हालांकि, बजट में इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों को कम या ज्यादा करने की घोषणा तो नहीं की गई है, लेकिन केंद्र सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी स्वैपिंग नीति लो लागू करेगी, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन को बार-बार चार्ज किये बगैर लंबा सफर करना आसान हो जाएगा।

इसके अलावा बजट में सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की नीति तैयार की गई है। इस नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी बनाने के लिए प्राइवेट क्षेत्र को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिए स्पेशल मोबिलिटी जोन डेवलप किए जाएंगे और सेमीकंडक्टर के प्रोडक्शन के लिए इंडस्ट्री डेवलप की जाएगी।

भारत सरकार जल्द ही इलेक्ट्रोलाइजर बनाने के लिए उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन की घोषणा करेगी ताकि स्थानीय स्तर पर ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जा सके। विद्युत मंत्रालय के साथ नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने राष्ट्रीय हाइड्रोजन नीति तैयार की है जिसे फरवरी के पहले सप्ताह में पेश किया जा सकता है। इस नीति के तहत हाइड्रोजन का उत्पादन करने वाले उपक्रमों को प्रोत्साहन के तौर पर मुफ्त बिजली देने की नीति तैयार की जा सकती है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2021 में आयोजित ग्लासगो जलवायु शिखर सम्मेलन में घोषणा की थी कि भारत 2030 तक कार्बन उत्सर्जन में 1 बिलियन टन की कमी करेगा और अपने 50 प्रतिशत ऊर्जा की जरूरत हो अक्षय ऊर्जा श्रोत से पूरा करेगा।


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