चीन-ताइवान के बीच बढ़ रहे तनाव से गाड़ियों की डिलीवरी में हो सकती है देरी, जानें क्या है वजह
कोविड-19 महामारी और रूस-यूक्रेन संघर्ष के चलते पहले से ही ऑटो उद्योग उपकरणों की आपूर्ति की कमी से जूझ रहा है, अब एक और नया खतरा सामने आया है जो संभवतः दुनिया भर में वाहन निर्माण को और भी अधिक प्रभावित कर सकता है। अमेरिकी हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी की ताइपे की यात्रा के बाद चीन और ताइवान के बीच यदि स्थिति पूरी तरह तनाव में बदल जाती है तो चिप निर्माण कंपनियों को खतरा हो सकता है।

सेमीकंडक्टर चिप आधुनिक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के साथ-साथ नए जमाने के वाहनों का एक प्रमुख घटक है। लेकिन अब लगभग दो वर्षों से मौजूदा कमी है और इससे वैश्विक स्तर पर आपूर्ति और विनिर्माण कार्य प्रक्रियाओं में बाधा उत्पन्न हुई है। यहां ताइवान की महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि यहां कई चिप-निर्माण सुविधाएं स्थित हैं। हालांकि, सैन्य संघर्ष की स्थिति में, इन सुविधाओं पर संचालन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।

ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड (टीएसएमसी) दुनिया की सबसे बड़ी अनुबंध चिप निर्माता है और ताइवान की सबसे मूल्यवान कंपनी है, जिसने पहले ही चेतावनी दी है कि अगर चीन के साथ तनाव बढ़ता है, तो संचालन को 'नॉन-ऑपरेट' किया जा सकता है। टीएसएमसी के मार्क लियू हाल ही में सीएनएन को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है, तो टीएसएमसी काम नहीं कर पाएगा क्योंकि यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भर है। और इसका न केवल उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के उत्पादन पर बल्कि वाहनों पर भी दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।

लेकिन यह सिर्फ टीएसएमसी नहीं है जो प्रभावित हो सकता है। इसके परिणाम यूनाइटेड माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक कॉर्प, एएसई टेक्नोलॉजी, मीडियाटेक, एयू ऑप्ट्रोनिक्स जैसे अन्य निर्माताओं के लिए भी दूरगामी हो सकते हैं।

भारत में फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) ने पहले ही एक चेतावनी जारी कर दी है। फाडा ने कहा है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद, दुनिया एक बार फिर ताइवान-चीन युद्ध के खतरे का सामना कर रही है। इसके कारण, सेमी-कंडक्टर की कमी का खतरा एक बार फिर मंडरा रहा है क्योंकि चिप बनाने वाली टीएसएमसी युद्ध की स्थिति में अपना उत्पादन रोक सकती है।

क्या होते हैं सेमीकंडक्टर
सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक चिप होते हैं जिन्हें सिलिकॉन से बनाया जाता है। ये कारों के इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में करंट को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इनके बिना आज कारों की कल्पना ही नहीं की जा सकती। मौजूदा समय में बाजार में जितनी भी कारें उपलब्ध हैं, सभी में सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल किया जाता है। इनके बिना कारों को हाईटेक नहीं बनाया जा सकता।

कारों में डिस्प्ले पैनल, नेविगेशन, लाइट, पावर स्टीयरिंग और लगभग सभी ऑटोमैटिक फीचर्स में सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल किया जाता है। चिप्स की कमी की वजह से ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में सेमीकंडक्टर की भारी कमी हो गई है, इसलिए कारों का उत्पादन तय संख्या में नहीं हो रहा है।

क्यों हुई सेमीकंडक्टर की कमी
अभी सबसे अच्छी गुणवत्ता के चिप की सप्लाई फिलहाल टीएसएमसी, क्वालकॉम इंक और इंटेल कॉर्प जैसी कंपनियां कर रही हैं। हालांकि, वैश्विक कोरोना महामारी ने कंपनियों की चिप की सप्लाई को बाधित कर दिया है। इसी वजह से ये कंपनियां डिमांड के अनुसार सेमीकंडक्टर का उत्पादन नहीं कर पा रही हैं।

इसके अलावा स्मार्टफोन, टीवी, ऐसी जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में सेमीकंडक्टर की डिमांड बढ़ गई है जिससे निर्माण करने वाली कंपनियां आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं। इसी कारण से कारों में लगने वाले कुछ सेमीकंडक्टर चिप की कीमत में उछाल आ गया है। कारों में लगने वाले डिस्प्ले ड्राइवर चिप की कीमत बढ़ गई है, जिनका इस्तेमाल टेलीविजन, लैपटॉप, कार और विमानों के उत्पादन में भी होता है।


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