सीएट ने लाॅन्च किया नया टायर, पता चलेगा टायर बदलने का सही समय
सिएट टायर्स ने अपने नए कलर ट्रेड वियर इंडिकेटर टायर्स लॉन्च करने की घोषणा की है। यह टायरों को बदलने का समय आने पर उपयोगकर्ता को संकेत देता है। कंपनी के मुताबिक, टायर के बाहरी हिस्से में पीले रंग की पट्टी लगी होती है, जो नए टायर में दिखाई नहीं देती है। जैसे ही टायर घिसता है, यह पीली पट्टी दिखने लगती है, जो यह संकेत देती है कि टायर बदलने का समय आ गया है।

कलर ट्रेड इंडिकेटर वाले टायर दो आकारों में उपलब्ध हैं, टोयोटा इनोवा के लिए 205/65 R15 Milaze X3 और इनोवा क्रिस्टा के लिए 205/65 R16 Milaze X3। CEAT (सीएट) टायर आरपीजी समूह की प्रमुख कंपनी है। इसकी स्थापना 1924 में ट्यूरिन, इटली में हुई थी।
वर्तामान मे, सीएट भारत के प्रमुख टायर निर्माताओं में से एक है और इसकी वैश्विक बाजारों में उपस्थिति है। सीएट एक वर्ष में 165 मिलियन से अधिक टायर का उत्पादन करती है। कंपनी यात्री कारों, दोपहिया, ट्रकों और बसों, हल्के वाणिज्यिक वाहनों, फोर्कलिफ्ट, ट्रैक्टर, और ऑटो-रिक्शा के लिए टायर का निर्माण करती है। सीईएटी टायर के संयंत्रों की वर्तमान क्षमता प्रति दिन 800 टन से अधिक है।
बता दें कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने पिछले महीने पांच टायर कंपनियों पर करीब 1,650 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इन पांच कंपनियों में अपोलो टायर, सिएट, एमआरएफ, जेके टायर और बिड़ला टायर का नाम शामिल है।
सीसीआई ने अपोलो टायर पर 425 करोड़ रुपये, एमआरएफ पर 309 करोड़ रुपये, सिएट टायर पर 252 करोड़ रुपये, जेके टायर पर 309 करोड़ रुपये और बिड़ला टायर पर 178 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।
टायर बनाने वाली इन प्रमुख कंपनियों पर आरोप है कि ये सप्लाई कम करके कीमतों में इजाफा करती हैं। सीसीआई 2018 से इस मामले की जांच कर रही है। मद्रास उच्च न्यायालय ने सीसीआई को अपना आदेश पारित करने की अनुमति दी थी जिसके बाद सीसीआई ने देश की इन प्रमुख टायर कंपनियों पर जुर्माना लगाया है।


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