सीएट ने इलेक्ट्रिक कारों के लिए लाॅन्च किए एनर्जीड्राइव साइलेंट टायर, जानें क्या हैं खूबियां
सीएट (Ceat) ने गुरुवार को देश में इलेक्ट्रिक कारों (Electric Cars) के लिए टायरों (Tyres) की एक विशेष श्रृंखला लॉन्च की है। कंपनी का दावा है कि इलेक्ट्रिक कारों के लिए खासतौर पर तैयार किए गए ये विशेष टायर साइलेंट तकनीक पर आधारित है और इलेक्ट्रिक कारों की रेंज को बढ़ाने में कारगर हैं। इलेक्ट्रिक कारों में इंजन नहीं होने के कारण ये शांत होते हैं जिसके चलते टायर का आवाज इलेक्ट्रिक कार के केबिन में अधिक सुनाई देता है।

सीएट के नए एनर्जीड्राइव टायर इस तरह बनाये गए हैं कि सतह से संपर्क करने पर कम शोर करते हैं। कंपनी का कहना है कि ये टायर कंपन को अवशोषित करके शोर को कम करते हैं। कंपनी का यह भी कहना है कि एनर्जीड्राइव टायरों को खास तरह से डिजाइन किया गया है जिससे यह सतह से संपर्क होने पर कम ड्रैग उत्पन्न करते हैं। इससे इलेक्ट्रिक कार की रेंज को बढ़ाने में मदद मिलती है।

दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में की रफ्तार बढ़ रही है। ऑटो उपकरण निर्माता अब ऐसे उत्पादों की पेशकश कर रहे हैं जो विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों की जरूरत को पूरा करते हैं। भारत में, इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का नेतृत्व दोपहिया वाहनों द्वारा किया जा रहा है, जिसमें कई स्थापित कंपनियों के साथ-साथ नई कंपनियां भी प्रवेश कर रही हैं।

इलेक्ट्रिक वाहनों के पैसेंजर कार सेगमेंट में टाटा मोटर्स का दबदबा है। वहीं आज हर लग्जरी कार निर्माता के पास एक या उससे ज्यादा इलेक्ट्रिक मॉडल का विकल्प उपलब्ध है।

नतीजतन, ऑटो कंपोनेंट निर्माता बदलाव के समय का अधिकतम लाभ उठाना चाहते हैं। सिएट के सीओओ अर्नब बनर्जी ने कहा, "यह पहली बार है जब भारत में चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के उद्देश्य से एनर्जीड्राइव जैसा टायर लॉन्च किया गया है। 'शांत' तकनीक के साथ हमारी एनर्जीड्राइव टायर घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों की समस्या को हल करती है। हम इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों के लिए बेहतरीन टायर लाते रहेंगे।"

टायर रेटिंग सिस्टम होगा लागू
अक्टूबर 2022 से देश भर में कार, बस और ट्रक के टायरों के लिए नए मानक लागू होने वाले हैं। केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक आधिकारिक सूचना में कहा है कि अब नए टायरों को को रोलिंग रेसिस्टेंस, वेट ग्रिप (गीली सड़क पर पकड़) और रोलिंग ध्वनि उत्सर्जन के लिए निर्धारित मानकों को पूरा करना होगा।

मंत्रालय ने सूचना में कहा कि अक्टूबर 2022 से कार, बस और ट्रक के टायर बनाने वाली कंपनियों को ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (AMI) 142:2019 में परिभाषित उद्योग मानकों का पालन करना होगा। यह मानक नए टायर के रोलिंग रेसिस्टेंस, वेट ग्रिप और रोलिंग ध्वनि की जरूरतों को परिभाषित करते हैं। सूचना में कहा गया है कि इस नियम के साथ भारत UNECE (यूरोप के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक आयोग) के मानकों का अनुपालन करने वाला देश बन जाएगा।

टायर के रोलिंग रेजिस्टेंस (रोलिंग प्रतिरोध) का वाहन के माइलेज पर असर पड़ता है, जबकि टायर का वेट ग्रिप (गीली सड़क पर पकड़) यह बताता है कि गीली सड़क पर टायर का ब्रेकिंग परफॉर्मेंस कैसा है। वहीं, टायर का रोलिंग साउंड (रोलिंग ध्वनि) यह बताता है कि सड़क पर टायर के घर्षण से कितना शोर पैदा होता है।


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