सस्ते कार लोन के दिन गए, जानें रेपो रेट बढ़ने से कार की ईएमआई पर क्या पड़ेगा असर
अगर आप लोन पर नई कार खरीदने का मन बना रहे हैं तो अब आपके लिए कार खरीदना अब महंगा हो सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank Of India) ने बुधवार को रेपो रेट (Repo Rate) 0.40% बढ़ाने ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही अब रेपो रेट 4% से बढ़कर अब 4.40% हो गया है। इस पहले आरबीआई ने 22 मई, 2020 को रेपो रेट में बदलाव किया था।

बढ़ जाएगी कार लोन की ईएमआई
रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर होम लोन, पर्सनल लोन के साथ वाहन लोन (Vehicle Loan) पर भी पड़ेगा। रेपो रेट में वृद्धि के बाद बैंकों से कार लोन लेने वाले नए उधारकर्ता अब अपनी कार पर ज्यादा ईएमआई का भुगतान करेंगे। हालांकि पहले से ही ईएमआई का भुगतान कर रहे लोगों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। आइये विस्तार से जानते हैं कि रेपो रेट में बढ़ोतरी से कार की ईएमआई पर क्या असर पड़ेगा।

कितनी बढ़ेगी ईएमआई?
पर्सनल और वाहन लोन पर ब्याज एक निश्चित दर पर आकर्षित होता है। इसलिए जो लोग पहले से ही कार लोन (Car Loan) ले चुके हैं उनके लिए चिंता की कोई बात नहीं है, उनके लिए ईएमआई और ब्याज दर समान रहेंगी। हालांकि कार खरीदने वाले नए ग्राहकों को अब बढ़ी हुई दरों पर कार लोन दिया जाएगा, जिससे उनपर ईएमआई का बोझ बढ़ेगा।

क्या है रेपो दर?
जिस दर पर आरबीआई कमर्शियल बैंकों को कर्ज देता है उसे रेपो दर (रेट) कहते हैं। रेपो रेट बढ़ने का अर्थ यह है कि आरबीआई अब बैंकों को कर्ज देने के लिए ज्यादा ब्याज लेगा। इसके प्रभाव से बैंक भी अपने ग्राहकों को दिए जाने वाले कर्ज पर अब ज्यादा ब्याज दर लगाएंगे।

इससे होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन समेत बैंकों द्वारा दिए जाने वाले सभी तरह के कर्ज पर ब्याज दर बढ़ेगा। इससे लोन लेने वाले लोगों को अब ज्यादा ईएमआई का भुगतान करना पड़ेगा। आपको बता दें, बाजार में नकद के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए आरबीआई समय-समय पर रेपो दर में बदलाव करता है।

आरबीआई क्यों बढ़ाती हैं रेपो दर
रेपो रेट बढ़ाने का सीधा सा कारण है महंगाई को कम करना है। जब बाजार में नगद प्रवाह अधिक होता है तो महंगाई तेजी से बढ़ती है। ऐसे में रिजर्व बैंक अन्य कमर्शियल बैंकों को दी जाने वाली राशि पर रेपो दर को बढ़ाकर अर्थव्यवस्था में नगद की अत्यधिक मात्रा को कम करता है। इससे कई तरह के लोन महंगे हो जाते हैं और महंगाई पर लगाम लगने लगता है।

भारतीय रिजर्व बैंक रेपो दर को 4 से 6 प्रतिशत तक रखती है और समय-समय पर इनमें बदलाव होते रहता है। आखिरी बार रेपो रेट में बदलाव 20 मई, 2020 को किया गया था। इसलिए सरकार ने एक बार फिर रिजर्व बैंक से रेपो दर को बढ़ाने की अपील की थी।

सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के कई देश रेपो दर में उतार-चढ़ाव कर अर्थव्यवस्था को सुनियोजित करते हैं। अमेरिकी रिजर्व बैंक ने भी ब्याज दर बढ़ाने के संकेत दे दिए हैं। इसी साल फेडरल रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में दो प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। अमेरिका से तुलना करें तो भारत में रेपो दर की बढ़ोतरी मामूली है।


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